
Holika Dahan Time: ज्योतिष शास्त्र में अनेक अशुभ योग व समय के बारे में बताया गया है, भद्रा भी इनमें से एक है। इसलिए शुभ कार्य करते समय भद्रा का विचार जरूर किया जाता है। होलिका दहन पर हमेशा भद्रा का संयोग बनता है। विद्वानों का कहना है कि भद्रा में भूलकर भी होलिका दहन नहीं करना चाहिए, ऐसा करना अशुभ होता है। भद्रा क्या है, क्यों इसे अशुभ मानते हैं और हर बार होलिका दहन पर ही भद्रा का संयोग क्यों बनता है। आगे जानिए…
ये भी पढ़ें-
Holika Ki Kahani: 3 प्राचीन कथाएं, जो बताती हैं होलिका दहन और रंग-गुलाल खेलने की वजह?
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार तिथि के आधे भाग को करण कहते हैं। करण की संख्या 11 है। इनमें से एक करण का नाम है विष्टि है, जिसे भद्रा भी कहते हैं। ग्रंथों की मानें तो भद्रा सूर्यदेव की पुत्री और शनि की बहन हैं। पैदा होने पर जब भद्रा संसार को खाने के लिए दौड़ी तो ये देख सभी देवी-देवता डर गए। तब ब्रह्मदेव ने भद्रा को शांत किया और तीनों लोकों में उसके घूमने का समय निश्चित किया। यही कारण है कि भद्रा का अशुभ समय माना जाता है।
ये भी पढ़ें-
Holika Pujan Samagri List: होलिका पूजन में क्या-क्या सामग्री चाहिए? यहां नोट करें पूरी लिस्ट
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार भद्रा का संयोग कुछ विशेष तिथियों पर ही बनता है जैसे-कृष्ण पक्ष की सप्तमी और चतुर्दशी तिथि और शुक्ल पक्ष की अष्टमी व पूर्णिमा तिथि पर। होलिका दहन का पर्व फाल्गुन मास की पूर्णिमा तिथि पर मनाया जाता है, इसलिए हर साल इसी समय भद्रा का संयोग बनता है। भद्रा में होलिका दहन करने की मनाही है। विशेष परिस्थिति में भद्रा के पुच्छ काल में होलिका दहन किया जा सकता है।
ज्योतिषियों का मत है कि होलिका दहन का मुहूर्त किसी अन्य त्योहार के मुहूर्त से ज्यादा महत्वपूर्ण है क्योंकि अन्य त्योहार की पूजा उपयुक्त समय पर न की जाये तो सिर्फ पूजा का लाभ नहीं मिलेगा लेकिन होलिका दहन अगर गलत समय पर कर दिया जाए तो यह दुर्भाग्य को आमंत्रण देने जैसा है। भद्रा में होलिका दहन करने से देश-दुनिया और समाज सभी पर इसका बुरा असर होता है।
2 मार्च, मंगलवार को भद्रा शाम 5 बजकर 56 मिनिट से शुरू होगी होगी, जो 03 मार्च, मंगलवार सुबह 05 बजकर 28 मिनिट तक रहेगी। भद्रा का पुच्छ काल 2-3 मार्च की दरमियानी रात 12 बजकर 50 मिनिट से शुरू होगा जो 02 बजकर 32 मिनिट तक रहेगा। यही होलिका दहन का सर्वश्रेष्ठ मुहूर्त है।
Disclaimer
इस आर्टिकल में जो जानकारी है, वो धर्म ग्रंथों, विद्वानों और ज्योतिषियों से ली गईं हैं। हम सिर्फ इस जानकारी को आप तक पहुंचाने का एक माध्यम हैं। यूजर्स इन जानकारियों को सिर्फ सूचना ही मानें।
धार्मिक परंपराओं, मंदिरों, त्योहारों, यात्रा स्थलों और आध्यात्मिक ज्ञान से जुड़ी खबरें पढ़ें। पूजा पद्धति, पौराणिक कथाएं और व्रत-त्योहार अपडेट्स के लिए Religion News in Hindi सेक्शन देखें — आस्था और संस्कृति पर सटीक और प्रेरक जानकारी।