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Holika Ki Kahani: 3 प्राचीन कथाएं, जो बताती हैं होलिका दहन और रंग-गुलाल खेलने की वजह?

Story Of Holika Dahan In Hindi: इस बार होलिका पूजन और दहन 2 मार्च, सोमवार को किया जाएगा, वहीं पंचांग भेद के चलते होली उत्सव 2 दिन यानी 3 व 4 मार्च को मनाया जाएगा। होली से जुड़ी अनेक कथाएं हैं जो बहुत ही रोचक है।

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Author : Manish Meharele
Published : Mar 02 2026, 10:19 AM IST
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होली की 3 प्राचीन और रोचक कथाएं
Image Credit : chatgpt

होली की 3 प्राचीन और रोचक कथाएं

holika story in hindi: हिंदू धर्म ग्रंथों में फाल्गुन मास की पूर्णिमा का विशेष महत्व बताया गया है। इस दिन होलिका पूजन और दहन करने की परंपरा है। इस बार होलिका पूजन व दहन 2 मार्च, सोमवार को किया जाएगा, वहीं पंचांग भेद और चंद्र ग्रहण के चलते होली उत्सव 2 यानी 3 व 4 मार्च को मनाया जाएगा। होलिका दहन क्यों किया जाता है और होल उत्सव क्यों मनाते हैं, इसके पीछे कईं रोचक कथाएं छिपी हैं। आगे आप भी पढ़िए होली की 3 कथाएं…


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क्यों करते हैं होलिका दहन?
Image Credit : Getty

क्यों करते हैं होलिका दहन?

सतयुग में हिरण्यकश्यपु नाम का राक्षसों का राजा था, उसका पुत्र प्रह्लाद था भगवान विष्णु का परम भक्त था। हिरण्यकश्यपु को जब ये पता चला तो वह अपने पुत्र को तरह-तरह की यातनाएं देने लगा। लेकिन फिर भी प्रह्लाद की भक्ति कम नहीं हुई। अंत में हिरण्यकश्यपु ने प्रह्लाद को मारने के लिए अपनी बनन होलिका को बुलाया और उसके साथ अग्नि में बैठा दिया। होलिका को अग्नि से न जलने का वरदान था। लेकिन भगवान विष्णु की कृपा से भक्त प्रह्लाद बच गया और होलिका जल गई। तभी से अधर्म पर धर्म की जीत के रूप में होलिका दहन करने की परंपरा शुरू हुई जो आज भी चली आ रही है।


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होली पर क्यों खेलते हैं रंग-गुलाल?
Image Credit : ANI

होली पर क्यों खेलते हैं रंग-गुलाल?

होली उत्सव से जुड़ी एक अन्य कथा भी प्रचलित है, उसके अनुसार, प्राचीन समय में तारकासुर नाम का एक राक्षस था, उसे वरदान था कि उसका वध सिर्फ महादेव के पुत्र के हाथों होगा। लेकिन महादेव देवी सती के वियोग में ध्यान में बैठे थे। तब देवताओं ने शिवजी का ध्यान भंग करने के लिए कामदेव को बुलाया। कामदेव ने जैसे ही शिवजी का ध्यान भंग किया वैसे ही उनका तीसरा नेत्र खउल गया और उसकी अग्नि में कामदेव भस्म हो गए। कामदेव की पत्नी रति ने जब महादेव से क्षमा मांगी तो उन्होंने कामदेव को पुनर्जन्म का वरदान दिया। महादेव की तपस्या भंग होने की खुशी में ही देवी-देवताओं ने रंग-गुलाल लगाकर त्योहार मनाया, जिसे हम होली के रूप में मनाते हैं।

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जब बच्चों के शोर से मारी गई ढूंढा राक्षसी?
Image Credit : chatgpt

जब बच्चों के शोर से मारी गई ढूंढा राक्षसी?

प्राचीन समय में अयोध्या में राजा रघु राज करते थे। उनके राज्य में एक राक्षसी थी जिसका नाम ढूंढा था। वह छोटे बच्चों को मारकर खा जाती थी। उसे कईं वरदान मिले थे, जिस वजह से उसे कोई भी मार नहीं सकता था। एक बार अयोध्या के पुरोहित ने राजा रघु को बताया कि बच्चों के खेल-कूद और तेज आवाज से ढूंढा राक्षसी की शक्ति को कम किया जा सकता है। तब राजा रघु ने बच्चों की मदद से उस राक्षसी का वध करने में सफलता प्राप्त की। इसके बाद लोगों ने रंग-गुलाल लगाकर खुशियां मनाई, तभी से धुरेड़ी यानी होली उत्सव मनाया जा रहा है।


Disclaimer
इस आर्टिकल में जो जानकारी है, वो धर्म ग्रंथों, विद्वानों और ज्योतिषियों से ली गईं हैं। हम सिर्फ इस जानकारी को आप तक पहुंचाने का एक माध्यम हैं। यूजर्स इन जानकारियों को सिर्फ सूचना ही मानें।

धार्मिक परंपराओं, मंदिरों, त्योहारों, यात्रा स्थलों और आध्यात्मिक ज्ञान से जुड़ी खबरें पढ़ें। पूजा पद्धति, पौराणिक कथाएं और व्रत-त्योहार अपडेट्स के लिए Religion News in Hindi सेक्शन देखें — आस्था और संस्कृति पर सटीक और प्रेरक जानकारी।

About the Author

MM
Manish Meharele
मनीष मेहरेले। मीडिया में 19 साल का अनुभव, अभी एशियानेट न्यूज हिंदी के डिजिटल में काम कर रहे हैं। महाभारत, रामायण जैसे धार्मिक ग्रंथों का अच्छा ज्ञान है। ज्योतिष-हस्तरेखा, उपाय, वास्तु, कुंडली जैसे टॉपिक पर पकड़ है। यह जीव विज्ञान में बीएससी स्नातक हैं । करियर की शुरुआत स्थानीय अखबार दैनिक अवंतिका से की। 2010 से 2019 तक दैनिक भास्कर डॉट कॉम में धर्म डेस्क पर काम किया है।
होली

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