Holika Pujan Samigiri Details : 2 मार्च, सोमवार को फाल्गुन मास की पूर्णिमा तिथि के संयोग में होलिका पूजन और इसके बाद दहन किया जाएगा। होलिका पूजन के लिए अनेक सामग्री की जरूरत होती है।

Holi Pujan Mein Kya-Kya Samagri Chahiye: हर साल फाल्गुन मास की पूर्णिमा तिथि पर प्रदोष काल में यानी शाम को होलिका पूजन किया जाता है। इस बार होलिका पूजन 2 मार्च, सोमवार को किया जाएगा। मान्यता है कि होलिका पूजन करने से घर में सुख-शांति और समृद्धि बनी रहती है। साथ ही बुरा समय भी टल जाता है। होलिका पूजन करते समय बहुत सारी चीजों की जरूरत होती हैं। इस पूरी सामग्री को पहले से ही एक जगह एकत्रित कर लेना चाहिए, जिससे कि कोई चीज छूट न जाए। आगे नोट करें होलिका पूजन की सामग्री की पूरी डिटेल…

ये भी पढ़ें-
Holi Puja Vidhi: होलिका पूजन 2 मार्च को, जानें पूजा विधि, मंत्र, मुहूर्त, पूजन सामग्री और दहन की समय

होलिका पूजन की सामग्री

अगरबत्ती और दीपक, आरती के लिए कपूर, कच्चा सूत, साबूत मूंग या चना (भीगा हुआ), गेहूं की बालियां, नारियल, गुड़, बताशे, रोली, कुमकुम, हल्दी, चावल, फूल और फूलों की माला, पूरी-भजिए आदि भोग्य पदार्थ, शुद्ध जल से भरा पानी का लोटा, उपले (गोबर के कंडे), बड़कुले (छोटे-छोटे उपलों की माला)

ये भी पढ़ें-
Chandra Grahan Streaming: 3 मार्च को होगा 2026 का पहला चंद्र ग्रहण, कहां देखें लाइव स्ट्रीमिंग?

होलिका पर क्यों चढ़ाते हैं गेहूं की बालियां?

गेहूं की बालियों को उंबी भी कहा जाता है। होलिका पूजन में इसे विशेष रूप से चढ़ाया जाता है। यह नए धान्य यानी अनाज का प्रतीक है। इस समय गेहूं की फसल कटती है। ईश्वर को धन्यवाद देने के उद्देश्य से होलिका की अग्नि में गेहूं की बालियां चढ़ाते है और बाद में इसे प्रसाद के रूप में खाते भी हैं।

होलिका पर क्यों चढ़ाते हैं गोबर के बड़कुले?

होलिका पर गोबर के छोटे-छोटे उपलों की माला भी चढ़ाई जाती है जिसे बड़कुले कहते हैं। इन्हें अग्निदेव के गहनों के रूप में अर्पित किया जाता है। ऐसी भी मान्यता है कि इस बड़कुलों की माला छोटी बालिकाओं द्वारा बनाई जाए तो और भी शुभ रहता है।

होलिका पूजन में किन चीजों का भोग लगाएं?

होलिका पूजन में भगवान नृसिंह, भक्त प्रह्लाद और होलिका को भोग भी लगाया जाता है। इस दिन घर में विशेष पकवान जैसे भजिए, पूरी व मालपुए आदि बनाए जाते हैं और इनका भोग लगाया जाता है। इनके अलावा नारियल यानी श्रीफल का भोग लगाने की भी परंपरा है। बाद में नारियल को प्रसाद के रूप में खाया भी जाता है।


Disclaimer
इस आर्टिकल में जो जानकारी है, वो धर्म ग्रंथों, विद्वानों और ज्योतिषियों से ली गईं हैं। हम सिर्फ इस जानकारी को आप तक पहुंचाने का एक माध्यम हैं। यूजर्स इन जानकारियों को सिर्फ सूचना ही मानें।