जन्माष्टमी पर कृष्ण को क्यों चढ़ाते हैं माखन-मिश्री? कान्हा को क्यों बहुत पसंद थीं ये दोनों चीजें?

Published : Sep 01, 2026, 02:29 PM IST
Janmashtami 2026

सार

Janmashtami Traditions: इस बार 4 सितंबर, शुक्रवार को श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का पर्व मनाया जाएगा। इस दिन भगवान को विशेष भोग लगाएं जाते हैं, माखन-मिश्री भी इन भोगों में से एक है।

Makhan Mishri Bhog: जन्माष्टमी भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव का पावन पर्व है। इस दिन भक्त कान्हा को तरह-तरह के पकवानों का भोग लगाते हैं, लेकिन माखन-मिश्री का भोग सबसे खास माना जाता है। बाल कृष्ण को माखन बेहद प्रिय था और वह गोकुल में अपनी बाल लीलाओं के दौरान घर-घर जाकर माखन चुराकर खाते थे। यही वजह है कि जन्माष्टमी पर कान्हा को माखन-मिश्री का भोग लगाने की परंपरा है।

कृष्ण को क्यों प्रिय था माखन?

कृष्ण की बाल लीलाओं में माखन चोरी का विशेष महत्व है। माता यशोदा और गोकुल की दूसरी गोपियां घर में दूध-दही से माखन निकालकर मटकी में रखती थीं। बाल कृष्ण अपने सखाओं के साथ मिलकर माखन चुरा लिया करते थे। इसी वजह से कृष्ण को 'माखन चोर' और 'नंदलाल' जैसे नामों से भी पुकारा जाता है। कृष्ण की ये लीलाएं केवल बाल शरारत नहीं मानी जातीं, बल्कि इनमें भगवान और भक्त के बीच प्रेम और अपनत्व का भाव देखा जाता है। कृष्ण के लिए गोपियों का माखन उनके प्रेम का प्रतीक माना गया है।

माखन में छिपा है प्रेम का भाव

दूध से दही और फिर दही को मथकर माखन निकाला जाता है। इसी तरह भक्त के मन को भी प्रेम और भक्ति से 'मथने' पर उसमें से निर्मल भाव प्रकट होता है। इसलिए कृष्ण को माखन चढ़ाने को शुद्ध प्रेम और समर्पण से जोड़कर देखा जाता है। कान्हा की माखन चोरी की कथाएं यह भाव भी दर्शाती हैं कि भगवान अपने भक्तों के प्रेम से बंध जाते हैं। गोपियों के घर से माखन लेना उनके लिए उस प्रेम को स्वीकार करने जैसा माना जाता है।

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फिर मिश्री क्यों साथ रखी जाती है?

माखन के साथ मिश्री का भोग लगाया जाता है। मिश्री मिठास का प्रतीक है। भक्त भगवान कृष्ण को माखन-मिश्री चढ़ाकर अपने जीवन में प्रेम, सुख और मधुरता की कामना करते हैं। धार्मिक रूप से माखन को कृष्ण की प्रिय वस्तु और मिश्री को शुभ एवं मधुर भाव का प्रतीक माना जाता है। इसलिए दोनों को साथ रखकर भोग लगाने की परंपरा है।

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जन्माष्टमी पर माखन-मिश्री का भोग

जन्माष्टमी की रात भगवान कृष्ण के जन्म के बाद भक्त उन्हें स्नान कराते हैं, नए वस्त्र पहनाते हैं और झूले में विराजमान करते हैं। इसके बाद बाल गोपाल को माखन-मिश्री सहित अन्य प्रसाद चढ़ाया जाता है। कई घरों और मंदिरों में माखन-मिश्री को विशेष रूप से बाल कृष्ण का प्रिय भोग मानकर तैयार किया जाता है। इसलिए जन्माष्टमी पर माखन-मिश्री सिर्फ एक प्रसाद नहीं, बल्कि बाल कृष्ण की माखन चोरी वाली लीलाओं, भक्त के प्रेम और भगवान के प्रति समर्पण का प्रतीक भी है। यही वजह है जन्माष्टमी पर कान्हा के भोग में माखन-मिश्री जरूर होता है।


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