Kamika Ekadashi Vrat Katha: क्षत्रिय युवक को कैसे मिली ब्रह्म हत्या के पाप से मुक्ति? पढ़ें कामिका एकादशी की कथा

Published : Aug 09, 2026, 06:00 AM IST
Kamika Ekadashi Vrat Katha

सार

Kamika Ekadashi Katha: ज्योतिष शास्त्र में जो 16 तिथियां बताई गई हैं, इनमें से एकादशी को सबसे पवित्र माना गया है। एक महीने में 2 बार इस तरह एक साल में कुल 24 एकादशी आती है।

Kamika Ekadashi Vrat Katha In Hindi: वैसे तो सावन भगवान शिव की भक्ति की महीना है लेकिन इस महीने में आने वाली एकादशी पर की गई विष्णु पूजा का भी बहुत अधिक महत्व माना गया है। सावन कृष्ण एकादशी का नाम कामिका है। इस बार कामिका एकादशी का व्रत 9 अगस्त, रविवार को किया जाएगा। इस एकादशी की एक रोचक कथा भी है जिसे सुनने के बाद ही इस व्रत का पूरा फल मिलता है। ये कथा स्वयं नारदजी को गंगापुत्र भीष्म ने सुनाई थी। आगे पढ़ें कामिका एकादशी व्रत की कथा…

कामिका एकादशी व्रत की कथा

प्रचलित कथा के अनुसार, प्राचीन समय में किसी गांव में एक बहुत ही बहादुर और शक्तिशाली क्षत्रिय युवक रहता था। वह स्वभाव से साहसी था, लेकिन एक दिन किसी बात पर उसका गांव के ही एक ब्राह्मण से विवाद हो गया। शुरुआत में दोनों के बीच कहासुनी हुई और फिर हाथापाई शुरू हो गई।

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गुस्से में हुए इस झगड़े के दौरान क्षत्रिय युवक के हाथों ब्राह्मण की मृत्यु हो गई। यह देख क्षत्रिय युवक बुरी तरह से घबरा गया। उसे अपने किए पर बहुत पछतावा हुआ। उसने ब्राह्मण का अंतिम संस्कार करने का फैसला किया लेकिन गांव के अन्य ब्राह्मणों ने उसे ऐसा करने से रोक दिया।

गांव के ब्राह्मणों ने कहा कि उसके ऊपर ब्रह्म हत्या का दोष लग चुका है और जब तक वह इस पाप से मुक्ति नहीं पा लेता, तब तक उसे ब्राह्मण के अंतिम संस्कार में शामिल नहीं होना चाहिए। क्षत्रिय युवक ने ब्राह्मणों से अपने पाप का प्रायश्चित करने का उपाय पूछा।

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तब ब्राह्मणों ने उसे श्रावण मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी का व्रत करने को कहा और बताया कि इस व्रत के प्रभाव से तुम पर लगा ब्रह्म हत्या का दोष खत्म हो जाएगा। क्षत्रिय युवक ने पूरे श्रद्धा और विश्वास के साथ कामिका एकादशी का व्रत किया, जिससे वह ब्रह्म हत्या के दोष से मुक्त हो गया।

मान्यता है कि जो भी कामिका एकादशी का व्रत करता है, उसके सभी पाप नष्ट हो जाते हैं और वह व्यक्ति मृत्यु के बाद बैकुंठ लोक में भगवान विष्णु के पास निवास करता है। इस कथा को सुने बिना कामिका एकादशी व्रत का पूरा फल नहीं मिलता, ऐसा धर्म ग्रंथों में लिखा है।


Disclaimer
इस आर्टिकल में जो जानकारी है, वो धर्म ग्रंथों, विद्वानों और ज्योतिषियों से ली गईं हैं। हम सिर्फ इस जानकारी को आप तक पहुंचाने का एक माध्यम हैं। यूजर्स इन जानकारियों को सिर्फ सूचना ही मानें।

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