कृष्णपिंगल संकष्टी चतुर्थी व्रत कब? जानें डेट, चंद्रोदय का समय, पूजा विधि, मंत्र और मुहूर्त

Published : Jul 02, 2026, 01:33 PM IST

Krishnapingal Sankashti Chaturthi 2026: हर महीने भगवान श्रीगणेश को प्रसन्न करने के लिए कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि पर व्रत-पूजा की जाती है। इसे संकष्टी चतुर्थी कहते हैं।

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3 या 4 जुलाई कब करें कृष्णपिंगल संकष्टी चतुर्थी व्रत?

Krishnapingal Sankashti Chaturthi Vrat 2026: आषाढ़ मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि पर संकष्टी चतुर्थी का व्रत किया जाता है, इसे कृष्णपिंगल चतुर्थी के नाम से भी जाना जाता है। धर्म ग्रंथों में इस व्रत क विशेष महत्व बताया गया है। इस बार कृष्णपिंगल संकष्टी चतुर्थी का व्रत जुलाई 2026 में किया जाएगा। आगे जानिए कृष्णपिंगल संकष्टी चतुर्थी की डेट, पूजा विधि, शुभ योग, मुहूर्त आदि की जानकारी…


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कब करें कृष्णपिंगल संकष्टी चतुर्थी व्रत 2026?

पंचांग के अनुसार आषाढ़ मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि 3 जुलाई, शुक्रवार की सुबह 11 बजकर 20 मिनिट से शुरू होगी जो 04 जुलाई, शनिवार की दोपहर 12 बजकर 40 मिनिट तक रहेगी। चूंकि चतुर्थी तिथि का चंद्रोदय 3 जुलाई, शुक्रवार को होगा, इसलिए इसी दिन कृष्णपिंगल संकष्टी चतुर्थी का व्रत किया जाएगा।


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कृष्णपिंगल संकष्टी चतुर्थी 2026 चंद्रोदय समय

3 जुलाई, शुक्रवार को चंद्रोदय रात 9 बजकर 53 मिनिट पर होगा। इस व्रत में भगवान श्रीगणेश के साथ-साथ चंद्रमा की पूजा भी की जाती है। इस दिन के शुभ मुहूर्त इस प्रकार हैं-
दोपहर 12:04 से 12:57 तक (अभिजीत मुहूर्त)
दोपहर 12:31 से 02:11तक
शाम 05:32 से 07:12 तक

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कृष्णपिंगल संकष्टी चतुर्थी व्रत-पूजा विधि

- 3 जुलाई, शुक्रवार की सुबह स्नान आदि करने के बाद व्रत-पूजा का संकल्प लें। पूरे दिन व्रत के नियमों का पालन करें। जिस भी मुहूर्त में आप पूजा करना चाहते हैं उसके पहले पूजन सामग्री एकत्रित कर लें।
- घर में साफ स्थान पर भगवान श्रीगणेश की प्रतिमा स्थापित कर पूजा शुरू करें। सबसे पहले श्रीगणेश की प्रतिमा पर कुमकुम से तिलक लगाएं, ताजे फूलों की माला पहनाएं और शुद्ध घी का दीपक भी जलाएं।
- रोली, वस्त्र, जनेऊ, अबीर, गुलाल आदि चीजें भगवान को एक-एक करके चढ़ाएं। दुर्वा भी चढ़ाएं, ये भगवान को अति प्रिय है। नारियल के लड्डू व मौसमी फल आदि चीजों का का भोग भी भगवान को लगाएं।
- पूजा के दौरान मन में ऊं गं गणपतये नम: का जाप भी करें। पूजा के बाद भगवान श्रीगणेश की विधि-विधान से आरती करें। चंद्रमा उदय होने पर जल से अर्ध्य दें और फूल-चावल चढ़ाकर पूजा करें।
- इसके बाद पैर छूकर परिवार के बुजुर्गों का आशीर्वाद लें। प्रसाद खाकर व्रत पूर्ण करें और भोजन करें। इस तरह कृष्णपिंगल संकष्टी चतुर्थी का व्रत करने से घर में सुख-शांति समृद्धि और खुशहाली बनी रहती है।

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गणेशजी की आरती लिरिक्स हिंदी में

जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा ॥
जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा ॥
एक दंत दयावंत, चार भुजाधारी
माथे पे सिंदूर सोहे, मूसे की सवारी ॥
जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा ॥
अंधन को आंख देत, कोढ़िन को काया
बांझन को पुत्र देत, निर्धन को माया ॥
जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा ॥
हार चढ़ै, फूल चढ़ै और चढ़ै मेवा
लड्डुअन को भोग लगे, संत करे सेवा ॥
जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा ॥
दीनन की लाज राखो, शंभु सुतवारी
कामना को पूर्ण करो, जग बलिहारी ॥
जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा ॥

Disclaimer
इस आर्टिकल में जो जानकारी है, वो धर्म ग्रंथों, विद्वानों और ज्योतिषियों से ली गईं हैं। हम सिर्फ इस जानकारी को आप तक पहुंचाने का एक माध्यम हैं। यूजर्स इन जानकारियों को सिर्फ सूचना ही मानें।

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