Makar Sankranti 2026: बाजार में मंदी-बॉर्डर पर संघर्ष, देश-दुनिया पर कैसा होगा मकर संक्रांति का असर?

Published : Jan 13, 2026, 11:49 AM IST

Makar Sankranti 2026: हर बार की तरह इस बार भी 14 जनवरी को ही मकर संक्रांति पर्व मनाया जाएगा। हालांकि इसका पुण्य काल अगले दिन यानी 15 जनवरी को भी माना जाएगा। आगे जानिए इस मकर संक्रांति का नाम और वाहन क्या है?

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जानें मकर संक्रांति से जुड़ी रोचक बातें

Makar Sankranti 2026: ज्योतिष शास्त्र के अनुसार जब सूर्य मकर राशि में प्रवेश करता है तो मकर संक्रांति उत्सव मनाया जाता है। जिस समय ऐसा होता है, उस समय के पंचांग के अनुसार संक्रांति का एक स्वरूप निर्धारित होता है इस संक्रांति का नाम क्या है, इसका वाहन कौन-सा है आदि। संक्रांति का ये स्वरूप देश-दुनिया और समाज पर पड़ने वाले शुभ-अशुभ फलों का संकेत देता है। उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. नलिन शर्मा से जानिए साल 2026 की मकर संक्रांति के स्वरूप और उससे होने वाले प्रभाव के बारे में पूरी डिटेल…

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कैस है मकर संक्रांति 2026 का स्वरूप।

ज्योतिषाचार्य पं. शर्मा के अनुसार इस बार की मकर संक्रांति का नाम मंदा है और इसका वाहन गर्दभ यानी गधा है। उपवाहन की बात की जाए तो ये मेष यानी बकरा है। इसके वस्त्र सफेद हैं और अस्त्र गदा है। ये बैठी हुई अवस्था में दक्षिण से उत्तर की ओर गति कर रही है।


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बारिश के लिए शुभ संकेत

मकर संक्रांति का वाहन गधा होने के प्रभाव पूरे देश और समाज पर देखने को मिलेगा। इससे समाज में मेहनत और संघर्ष बढ़ सकती है। लोग आलसी हो सकते हैं और मेहनत करने कतराएंगे। जरूरी कामों में थोड़ी सुस्ती रह सकती है। वहीं संक्रांति का उत्तर की ओर गति करना शुभ है जो वर्षा के लिए अनुकूल संकेत है। इससे फसलों की पैदावार अच्छी होने की संभावना बनेगी।

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बाजार में आएगा उतार-चढ़ाव

इस मकर संक्रांति का नाम मंदा होने से बिजनेस और बाजार में उतार-चढ़ाव की स्थिति बनने के संकेत मिल रहे हैं। शेयर मार्केट में अचानक उतार चढ़ाव से बहुत नुकसान हो सकता है। सफेद चीजों जैसे चावल, चीनी, चांदी और कपास के बिजनेस में तेजी आ सकती है। साथ ही कीमती धातुओं के दाम भी बढ़ सकते हैं।

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पड़ोसी देशों से हो सकता है संघर्ष

इस मकर संक्रांति का अस्त्र है गदा है, जो शक्ति और सुरक्षा का प्रतीक है। ये इस बात की संकेत दे रही है कि देश की सुरक्षा व्यवस्था में पहले से और ज्यादा मजबूत आएगी। पड़ोसी देशों से छिट-पुट विवाद या संघर्ष की स्थितियां भी बन सकती हैं। ऐसी स्थिति में देश का सम्मान बना रहेगा।


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