Makar Sankranti 2026: MP का रहस्यमयी किला, सिर्फ एक दिन खुलता है यहां का प्राचीन मंदिर
Makar Sankranti 2026: मध्य प्रदेश का पन्ना जिला अनेक कारणों से प्रसिद्ध हैं। इनमें से एक वजह है यहां का अजयगढ़ किला। इस किले में एक मंदिर भी है जो सिर्फ मकर संक्रांति पर ही खोला जाता है। दूर-दूर से लोग यहां आते हैं।

जानें अजयगढ़ किले से जुड़ी रोचक बातें
Ajaygarh Fort of Panna District: हर साल की तरह इस साल भी मकर संक्रांति पर्व 14 जनवरी को मनाया जाएगा। देश में अलग-अलग हिस्सों में ये पर्व विभिन्न नामों से मनाया जाता है। इस दिन से जुड़ी कुछ खास परपराएं भी हैं। मध्य प्रदेश के पन्ना जिले स्थित अजयगढ़ किले में एक प्राचीन मंदिर है जो सिर्फ मकर संक्रांति पर ही खोला जाता है। दूर-दूर से लोग मकर संक्रांति पर यहां आते हैं। आगे जानिए इस किले और मंदिर का रहस्य…
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क्या है अजयगढ़ किले का रहस्य?
इतिहासकारों की माने तो अजयगढ़ किले का निर्माण चंदेल वंश के शासकों ने 9 वी शताब्दी में करवाया था। बाद में ये किला बुंदेशा शासकों के अधीन हो गया। आज भी ये किला अपने अंदर बहुत सारे रहस्यों को समेटे हुए है। इस किले में एक प्राचीन मंदिर है। इसे बाबा अजय पाल का मंदिर कहा जाता है जिन्हें यहां का स्थानीय देवता माना जाता है। किले में स्थित ये मंदिर साल में सिर्फ बार मकर संक्रांति पर ही खोला जाता है। स्थानीय के अलावा अन्य लोग भी दूर-दूर से यहां दर्शन करने आते हैं।
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एक दिन के लिए रखते हैं बाबा मूर्ति
अजयगढ़ किले में स्थित मंदिर में कोई भी प्रतिमा नहीं है। इस मंदिर की प्रतिमा साल भल रीवा के पुरातत्व संग्रहालय में रखी जाती है जिसे सिर्फ एक दिन के लिए यानी मकर संक्रांति पर यहां लाकर स्थापित किया जाता है। भक्त दिन भर बाबा अजयपाल की पूजा करते हैं और अगले दिन पुन: बाबा अजयपाल की मूर्ति को पुरातत्व संग्रहालयमें रख दिया जाता है। ये काम शासन-प्रशासन की निगरानी में किया जाता है। किले के नजदीक ही एक तालाब भी है। मकर संक्रांति पर इस तालाब में स्नान करना बहुत ही शुभ माना जाता है।
यहां से जुड़ी है खजाने की मान्यता
अजयगढ़ किले में अनेक सुरंगें हैं जो बंद हैं। कहते हैं कि इन्हीं सुरंगों में चंदेल राजाओं का खजाना छिपा है। कईं लोगों ने इस खजाने को खोजने की कोशिश की, लेकिन आज तक किसी को सफलता नहीं मिली। कुछ लोग तंत्र-मंत्र करने के लिए भी रात के अंधेरे में यहां आते हैं। इस किले की बनावट दिन में ही काफी डरावनी लगती है इसलिए शाम के बाद यहां आने की हिम्मत किसी में नहीं होती।
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