Masik Shivratri January 2026: साल 2026 का पहला मासिक शिवरात्रि व्रत 16 जनवरी, शुक्रवार को किया जाएगा। इस दिन कईं शुब योग बन रहे हैं जिसके चलते इस व्रत का महत्व और भी बढ़ गया है।
January 2026 Mai Masik Shivratri Kab Hai: हर महीने के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मासिक शिवरात्रि व्रत किया जाता है। धर्म ग्रंथों में इसे शिव चतुर्दशी भी कहा गया है। इस व्रत का विशेष महत्व पुराणों में भी बताया गया है। साल 2026 के पहले महीने यानी जनवरी में मासिक राशिवरात्रि व्रत का संयोग 16 जनवरी, शुक्रवार को बन रहा है। आगे जानिए कैसे करें मासिक शिवरात्रि व्रत और शुभ मुहूर्त सहित के बारे में…
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16 जनवरी 2026 शिवरात्रि व्रत शुभ मुहूर्त
मासिक शिवरात्रि में दिन भर व्रत रखा जाता है और रात में शिवजी की पूजा की जाती है। 16 जनवरी, शुक्रवार को शिवरात्रि व्रत का पूजा मुहूर्त रात 12 बजकर 04 मिनिट से 12 बजकर 58 मिनिट तक रहेगा। यानी भक्तों को महादेव की पूजा के लिए पूरे 54 मिनट का समय मिलेगा।
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मासिक शिवरात्रि व्रत-पूजा विधि
- 16 दिसंबर, शुक्रवार की सुबह स्नान आदि करने के बाद व्रत-पूजा का संकल्प करें। दिन भर कुछ भी खाए नहीं। - रात को मुहूर्त शुरू होने पर शिवजी की पूजा शुरू करें। सबसे पहले शिवलिंग का अभिषेक शुद्ध जल से करें। - इसके बाद शुद्ध घी का दीपक जलाएं। फूल, बिल्व पत्र, धतूरा आदि चीजें एक-एक करके महादेव को चढ़ाएं। - पूजा के दौरान ऊं नम: शिवाय मंत्र का जाप निरंतर करते रहें और अगर कोई इच्छा है तो वह भी बोल सकते हैं। - अपनी इच्छा अनुसार महादेव को भोग लगाएं और अंत में आरती करें। पूजा के बाद रात भर भजन-कीर्तन करें। - अगले दिन यानी 17 जनवरी, शनिवार को सुबह ब्राह्मणों को सात्विक भोजन करवाएं और दान-दक्षिणा आदि दें। - इसके बाद स्वयं भोजन कर व्रत पूरा करें। इस व्रत को करने से जीवन का हर तरह का सुख आपको मिल सकता है।
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भगवान शिव की आरती (Shiv Ji Ki Aarti Lyrics In Hindi)
जय शिव ओंकारा ऊं जय शिव ओंकारा । ब्रह्मा विष्णु सदा शिव अर्द्धांगी धारा ॥ ॥ ऊं जय शिव ओंकारा ॥ एकानन चतुरानन पंचानन राजे । हंसानन गरुड़ासन वृषवाहन साजे ॥ ॥ ऊं जय शिव ओंकारा॥ दो भुज चार चतुर्भुज दस भुज अति सोहे । त्रिगुण रूपनिरखता त्रिभुवन जन मोहे ॥ ॥ ऊं जय शिव ओंकारा॥ अक्षमाला बनमाला रुण्डमाला धारी। चंदन मृगमद सोहै भाले शशिधारी ॥ ॥ ऊं जय शिव ओंकारा॥ श्वेताम्बर पीताम्बर बाघम्बर अंगे । सनकादिक गरुणादिक भूतादिक संगे ॥ ॥ ऊं जय शिव ओंकारा॥ कर के मध्य कमंडलु चक्र त्रिशूल धर्ता । जगकर्ता जगभर्ता जगसंहारकर्ता ॥ ॥ ऊं जय शिव ओंकारा॥ ब्रह्मा विष्णु सदाशिव जानत अविवेका । प्रणवाक्षर मध्ये ये तीनों एका ॥ ॥ ऊं जय शिव ओंकारा॥ काशी में विश्वनाथ विराजत नन्दी ब्रह्मचारी । नित उठि भोग लगावत महिमा अति भारी ॥ ॥ ऊं जय शिव ओंकारा॥ त्रिगुण शिवजीकी आरती जो कोई नर गावे । कहत शिवानन्द स्वामी मनवांछित फल पावे ॥ ॥ ऊं जय शिव ओंकारा॥
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