
Navratri 2026 Devi Chandraghanta Puja Vidhi: शारदीय नवरात्रि के तीसरे दिन मां दुर्गा के तीसरे स्वरूप देवी चंद्रघंटा की पूजा की जाती है। इनकी पूजा से जीवन में चल रही कईं परेशानियां दूर हो सकती हैं और भक्तों को सुख-समृद्धि का आशीर्वाद मिलता है। इस बार 13 अक्टूबर, मंगलवार को देवी चंद्रघंटा की पूजा की जाएगी। आगे जानिए मां चंद्रघंटा की पूजा विधि, शुभ मुहूर्त, मंत्र और आरती, भोग की डिटेल
सुबह 09:19 से 10:46 तक
सुबह 10:46 से दोपहर 12:13 तक
दोपहर 11:49 से 12:36 तक (अभिजीत मुहूर्त)
दोपहर 12:13 से 01:39 तक
दोपहर 03:06 से शाम 04:32 तक
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नवरात्रि के तीसरे दिन यानी 13 अक्टूबर, मंगलवार को सुबह जल्दी उठकर स्नान करें। इसके बाद व्रत और पूजा का संकल्प लें। घर के साफ स्थान पर मां चंद्रघंटा की तस्वीर या प्रतिमा स्थापित करें। देवी को कुमकुम से तिलक लगाएं और फूलों की माला अर्पित करें। इसके बाद शुद्ध घी का दीपक जलाएं। पूजा के दौरान मां को चावल, अबीर, गुलाल, रोली, मेहंदी और फूल जैसी पूजन सामग्री अर्पित करें। मां चंद्रघंटा की आरती करें और श्रद्धापूर्वक उनका ध्यान लगाएं। पूजा के दौरान नीचे दिए गए मंत्र का 108 बार जाप करें-
पिण्डज प्रवरारूढा चण्डकोपास्त्रकैर्युता।
प्रसादं तनुते मह्यम् चन्द्रघण्टेति विश्रुता॥
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जय मां चंद्रघंटा सुख धाम। पूर्ण कीजो मेरे काम।।
चंद्र समान तू शीतल दाती। चंद्र तेज किरणों में समाती।।
क्रोध को शांत बनाने वाली। मीठे बोल सिखाने वाली।।
मन की मालक मन भाती हो। चंद्र घंटा तुम वरदाती हो।।
सुंदर भाव को लाने वाली। हर संकट मे बचाने वाली।।
हर बुधवार जो तुझे ध्याये। श्रद्धा सहित जो विनय सुनाय।।
मूर्ति चंद्र आकार बनाएं। सन्मुख घी की ज्योत जलाएं।।
शीश झुका कहे मन की बाता। पूर्ण आस करो जगदाता।।
कांची पुर स्थान तुम्हारा। करनाटिका में मान तुम्हारा।।
नाम तेरा रटू महारानी। भक्त की रक्षा करो भवानी।।
देवी पुराण के अनुसार नवरात्रि के तीसरे दिन देवी चंद्रघंटा को गाय के दूध का भोग लगाएं। या दूध से बनी चीजों का भोग भी लगा सकते हैं जैसे खीर या अन्य कोई मिठाई।
शारदीय नवरात्रि के तीसरे दिन लाल रंग के कपड़े पहनना चाहिए। ये रंग शक्ति, ऊर्जा, साहस और प्रेम का प्रतीक है।
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