
Vinayak Chaturthi October 2026: हिंदू धर्म में भगवान श्रीगणेश को प्रसन्न करने के लिए अनेक व्रत किए जाते हैं, विनायक चतुर्थी भी इनमें से एक है। इनमें से आश्विन मास की विनायकी चतुर्थी को कपर्दिश चतुर्थी कहते हैं। इस व्रत में भगवान श्रीगणेश के साथ-साथ चंद्रमा की पूजा भी की जाती है। अक्टूबर 2026 में ये व्रत किया जाएगा? 13 या 14 अक्टूबर, ये व्रत किस दिन करें। आगे जानिए कपर्दिश विनायक चतुर्थी व्रत की सही डेट, पूजा विधि, शुभ मुहूर्त सहित पूरी डिटेल…
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पंचांग के अनुसार, आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि 13 अक्टूबर, मंगलवार की दोपहर 01 बजकर 57 मिनिट से शुरू होगी जो 14 अक्टूबर, बुधवार की दोपहर 03 बजकर 43 मिनिट तक रहेगी। चूंकि चतुर्थी तिथि का चंद्रोदय 14 अक्टूबर को होगा, इसलिए इसी दिन कपर्दिश विनायक चतुर्थी का व्रत किया जाएगा। इस दिन कईं शुभ योग भी बनेंगे, जिससे इस व्रत का महत्व और भी अधिक माना जाएगा।
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14 अक्टूबर, बुधवार को पूजा का शुभ मुहूर्त सुबह 11 बजकर 46 मिनिट से दोपहर 02 बजकर 01 मिनिट तक रहेगा यानी भक्तों को पूजा के लिए पूरे 02 घण्टे 15 मिनट का समय मिलेगा।
- 14 अक्टूबर, बुधवार को सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और व्रत-पूजा का संकल्प लें। इस दिन कुछ भी न खाएं। पूरे दिन भूखे रहना संभव न हो, तो एक समय फलाहार कर सकते हैं या दूध पी सकते हैं।
- शुभ मुहूर्त में साफ जगह पर भगवान श्रीगणेश की प्रतिमा स्थापित करें। गणेश जी को कुंकुम से तिलक लगाएं और फूलों की माला पहनाएं। इसके बाद दीपक जलाएं।
- भगवान गणेश को अबीर, गुलाल, कुंकुम, चावल, इत्र, सुपारी, जनेऊ और दूर्वा समेत अन्य पूजन सामग्री चढ़ाएं। पूजा के दौरान ऊं गं गणपतये नमः मंत्र का जाप करते रहें।
- अपनी श्रद्धा के अनुसार भगवान गणेश को भोग लगाएं और उनकी आरती करें। चंद्रमा के उदय होने पर जल चढ़ाएं। इसके बाद फूल, चावल और कुंकुम से पूजा करें।
- पूजा के बाद प्रसाद खाकर व्रत पूरा करें। इसके बाद भोजन कर सकते हैं। विनायक चतुर्थी का व्रत करने से भगवान गणेश की कृपा मिलती है और भक्तों की मनोकामनाएं पूरी होती हैं।
जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा ॥
जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा ॥
एक दंत दयावंत, चार भुजाधारी
माथे पे सिंदूर सोहे, मूसे की सवारी ॥
जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा ॥
अंधन को आंख देत, कोढ़िन को काया
बांझन को पुत्र देत, निर्धन को माया ॥
जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा ॥
हार चढ़ै, फूल चढ़ै और चढ़ै मेवा
लड्डुअन को भोग लगे, संत करे सेवा ॥
जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा ॥
दीनन की लाज राखो, शंभु सुतवारी
कामना को पूर्ण करो, जग बलिहारी ॥
जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा ॥
Disclaimer
इस आर्टिकल में जो जानकारी है, वो धर्म ग्रंथों, विद्वानों और ज्योतिषियों से ली गईं हैं। हम सिर्फ इस जानकारी को आप तक पहुंचाने का एक माध्यम हैं। यूजर्स इन जानकारियों को सिर्फ सूचना ही मानें।
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