Navratri 2026: तंत्र पूजा के लिए प्रसिद्ध हैं देवी के ये 5 मंदिर, कहीं लगाते मछली का भोग-कहीं चढ़ाते शराब

Published : Oct 16, 2026, 01:34 PM IST

Unique Temples of the Goddess: इस बार शारदीय नवरात्रि का पर्व 11 अक्टूबर से शुरू हो चुका है जो 20 अक्टूबर तक मनाया जाएगा। इस दौरान देवी के मंदिरों में भक्तों की भीड़ उमड़ती है। देश में कुछ ऐसे मंदिर भी हैं जहां देवी को मांस-मदिरा का भोग लगाया जाता है।

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ये हैं देवी के 5 अनोखे मंदिर

Mysterious Temples of the Goddess: हमारे देश में देवी मां के कई ऐसे मंदिर हैं, जो अपनी अनोखी परंपराओं और मान्यताओं के लिए प्रसिद्ध हैं। इनमें कुछ मंदिर ऐसे भी हैं, जहां देवी को मांस, मछली और शराब जैसी चीजें अर्पित की जाती हैं। आमतौर पर मंदिरों में सात्विक भोग चढ़ाने की परंपरा देखने को मिलती है, लेकिन कुछ शक्तिपीठों और देवी मंदिरों में स्थानीय रीति-रिवाजों के अनुसार तामसिक भोग भी लगाया जाता है। नवरात्रि के मौके पर जानिए देश के ऐसे ही 5 प्रसिद्ध मंदिरों के बारे में, जहां इस तरह की परंपराएं प्रचलित हैं…

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यहां देवी को चढ़ाते हैं शराब

मध्य प्रदेश के उज्जैन में स्थित गढ़कालिका मंदिर देवी उपासना का प्रसिद्ध केंद्र है। मान्यता है कि देवी गढ़कालिका महाकवि कालिदास की आराध्य देवी थीं। इस मंदिर में मां काली की पूजा विशेष विधि से की जाती है। यहां देवी को मदिरा अर्पित करने की परंपरा भी है। गढ़कालिका मंदिर तंत्र साधना से जुड़ी मान्यताओं के लिए भी जाना जाता है।


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तंत्र साधना का केंद्र है ये मंदिर

असम के गुवाहाटी में स्थित कामाख्या मंदिर देश के प्रमुख शक्तिपीठों में गिना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इसी स्थान पर देवी सती का योनि भाग गिरा था। यह मंदिर तंत्र साधना और शक्ति उपासना के लिए भी काफी प्रसिद्ध है। यहां पूजा-पाठ की कुछ परंपराएं दूसरे मंदिरों से अलग हैं। यहां देवी को मांस का भोग विशेष रूप से लगाया जाता है। यहां पशु बलि की परंपरा हजारों सालों से चली आ रही है।


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यहां देवी को लगाते मांस का भोग

पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में स्थित काली मंदिर देवी उपासना के प्रमुख स्थलों में शामिल है। इस मंदिर को लेकर मान्यता है कि यहां देवी सती के पैर की उंगलियां गिरी थीं। यहां मां काली की पूजा में अलग-अलग तरह के भोग अर्पित किए जाते हैं। कुछ परंपराओं में मांस का भोग भी शामिल है। यहां दूर-दूर से श्रद्धालु देवी के दर्शन और पूजा के लिए पहुंचते हैं।

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यहां देवी को चढ़ाते हैं मांसाहार

उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में स्थित तरकुलहा देवी मंदिर अपनी अलग धार्मिक परंपराओं के लिए प्रसिद्ध है। यहां देवी को सात्विक भोग के साथ मांसाहारी चीजें अर्पित करने की परंपरा भी बताई जाती है। मान्यता के अनुसार, देवी को चढ़ाया गया भोग बाद में प्रसाद के रूप में श्रद्धालुओं को बांटा जाता है।

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यहां देवी को लगाते मछली का भोग

ओडिशा के पुरी स्थित जगन्नाथ मंदिर परिसर में देवी विमला का प्राचीन मंदिर है। धार्मिक परंपरा में इस मंदिर का विशेष महत्व माना जाता है। मान्यता है कि यहां देवी को पकी हुई मछली का भोग लगाया जाता है। इसके बाद इसे प्रसाद के रूप में भक्तों में बांटा जाता है। देवी विमला को अर्पित इस प्रसाद को 'बिमला परुसा' कहा जाता है। यहां की परंपराएं पुरी की धार्मिक संस्कृति का खास हिस्सा हैं।



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