Navratri Visarjan 2026: नवरात्रि के बाद कलश, जवारे, नारियल और पूजन सामग्री का क्या करें?

Published : Oct 20, 2026, 09:44 AM IST
Navratri Visarjan 2026

सार

Navratri Visarjan Vidhi: इस बार शारदीय नवरात्रि का समापन 20 अक्टूबर, मंगलवार को हो रहा है। इस दिन लोग स्थापित की गई दुर्गा प्रतिमा का विसर्जन करते हैं। प्रतिमा विसर्जन के बाद कलश, जवारे और नारियल का क्या करें? आगे जानिए।

Navratri Kalash Visarjan: शारदीय नवरात्रि में नौ दिनों तक मां दुर्गा की पूजा-अर्चना करने के बाद दशमी तिथि पर घट स्थापना के कलश, जवारे और पूजा में इस्तेमाल की गई दूसरी चीजों को लेकर लोगों के मन में सवाल रहता है कि इनका क्या करना चाहिए? धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भूल से भी इन चीजों का अपमान नहीं करना चाहिए। जानिए नवरात्रि के बाद कलश, नारियल, जवारे और दूसरी पूजन सामग्री का क्या करें।

नवरात्रि के बाद कलश का क्या करें?

नवरात्रि के पहले दिन घट स्थापना के समय कलश में जल भरकर पूजा की जाती है। पूजा पूरी होने के बाद कलश के जल को घर में छिड़क सकते हैं। इसे साफ गमले या पौधों में डालना भी एक विकल्प है। अगर कलश में सिक्का, सुपारी या दूसरी सामग्री रखी थी, तो उन्हें निकालकर साफ कर लें। कलश को धोकर अगले साल की पूजा के लिए संभालकर रख सकते हैं।

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नारियल और जवारे का क्या करें?

नवरात्रि में कलश पर रखा नारियल पूजा के बाद प्रसाद के रूप में परिवार के सदस्यों में बांटा जा सकता है। यदि नारियल खराब हो गया हो, तो उसे खाने से बचें। वहीं, जवारे को मां दुर्गा का आशीर्वाद मानने की परंपरा है। इन्हें श्रद्धापूर्वक किसी साफ जगह पर मिट्टी में दबा सकते हैं या स्थानीय परंपरा के अनुसार विसर्जित कर सकते हैं।

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नवरात्रि की पूजन सामग्री का क्या करें?

पूजा में उपयोग हुई सामग्री का उपयोग भी अलग-अलग तरीके से कर सकते हैं। फूल, पत्ते और अन्य प्राकृतिक चीजों को मिट्टी में दबाया जा सकता है या प्रवाहित भी किया जा सकता है। मौली, चुनरी और कपड़े को साफ करके पूजा की परंपरा के अनुसार संभालकर रखें। दीपक और पूजा के बर्तन साफ करके रख दें। अगर पूजा में मिट्टी की प्रतिमा का इस्तेमाल किया गया है, तो उसका विसर्जन स्थानीय नियमों और परंपरा के अनुसार करें।

इस बात का रखें ध्यान

नदी या तालाब में पूजा से संबंधित ऐसी भी चीज प्रवाहित न करें जिससे जल प्रदूषित हो। ऐसी चीजों को सम्मान पूर्वक जमीन में दबा दें। इन चीजों को दोबारा उपयोग में लेने में भी कोई परेशानी नहीं है। स्थानीय परंपरा के अनुसार इन चीजों का निस्तारण करें।


Disclaimer
इस आर्टिकल में जो जानकारी है, वो धर्म ग्रंथों, विद्वानों और ज्योतिषियों से ली गईं हैं। हम सिर्फ इस जानकारी को आप तक पहुंचाने का एक माध्यम हैं। यूजर्स इन जानकारियों को सिर्फ सूचना ही मानें।

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