Pradosh Vrat May 2026: 14 या 15 मई, कब करें प्रदोष व्रत, कैसे करें पूजा? जानें मंत्र और मुहूर्त

Published : May 14, 2026, 02:32 AM IST
Pradosh Vrat May 2026

सार

Pradosh Vrat May 2026: मई 2026 के दूसरे सप्ताह में प्रदोष व्रत किया जाएगा। ये प्रदोष व्रत 14 मई को करें या 15 को? इसे लेकर मतभेद है। आगे जानें मई 2026 में कब करें प्रदोष व्रत?

Guru Pradosh Vrat May 2026 Shubh Muhurat: प्रदोष व्रत रहने महीने के दोनों पक्षों की त्रयोदशी तिथि पर किया जाता है। इस व्रत में भगवान शिव की पूजा शाम के समय यानी प्रदोष काल में की जाती है, इसलिए इस व्रत का नाम प्रदोष है। इस बार मई 2026 के दूसरे सप्ताह में प्रदोष व्रत का संयोग बन रहा है। ये व्रत 14 मई को किया जाएगा या 15 मई को? इसे लेकर संशय हैं। आगे जानिए मई 2026 में प्रदोष व्रत की सही डेट क्या है, साथ ही पूजा विधि, मंत्र सहित पूरी डिटेल…



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क्या है प्रदोष व्रत की सही डेट?

पंचांग के अनुसार ज्येष्ठ मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि 14 मई, गुरुवार की सुबह 11 बजकर 20 मिनिट से शुरू होगी जो अगले दिन यानी 15 मई, शुक्रवार की सुबह 08 बजकर 31 मिनिट तक रहेगी। चूंकि प्रदोष व्रत में भगवान शिव की पूजा शाम को की जाती है और ये स्थिति 14 मई, गुरुवार को बन रही है तो इसी दिन ये व्रत किया जाएगा। गुरुवार को प्रदोष व्रत होने से ये गुरु प्रदोष कहलाएगा।



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14 मई 2026 प्रदोष व्रत पूजा शुभ मुहूर्त

पंचांग के अनुसार 14 मई, गुरुवार को प्रदोष व्रत की पूजा का शुभ मुहूर्त शाम 07 बजकर 04 मिनिट से शुरू होगा जो रात 09 बजकर 09 मिनिट तक रहेगा। यानी भक्तों को पूजा के लिए पूरे 02 घण्टे 05 मिनट का समय मिलेगा।

इस विधि से करें गुरु प्रदोष व्रत-पूजा

- 14 मई, गुरुवार की सुबह स्नान करने के बाद हाथ में जल, चावल और फूल लेकर व्रत-पूजा का संकल्प लें। दिन भर व्रत के नियमों का पालन करें और कुछ भी खाएं नहीं। यदि ऐसा करना संभव न हो तो फलाहार कर सकते हैं।
- मुहूर्त से पहले पूजन सामग्री एक स्थान पर एकत्रित कर लें। सबसे पहले शिवजी का अभिषेक जल से, फिर गाय के दूध से और फिर एक बार शुद्ध जल से करें। महादेव को बिल्व पत्र, फूल, धतूरा आदि चीजें एक-एक करके अर्पित करें।
- पूजा करते समय ऊं नम: शिवाय मंत्र का जाप मन ही मन में करते रहें। इच्छा अनुसार महादेव को भोग लगाएं और शुद्ध घी के दीपक से आरती करें। पूजा के बाद गरीबों को दान करें और इसके बाद सात्विक भोजन करें।
- रात में ब्रह्मचर्य का पालन करें। संभव हो तो भजन कीर्तन भी कर सकते हैं। अगर सोना चाहते हैं को जमीन पर ही सोएं। इस प्रकार जो व्यक्ति श्रद्धा और भक्ति से प्रदोष व्रत करता है, उसकी सभी मनोकामना पूरी होती हैं।


Disclaimer
इस आर्टिकल में जो जानकारी है, वो धर्म ग्रंथों, विद्वानों और ज्योतिषियों से ली गईं हैं। हम सिर्फ इस जानकारी को आप तक पहुंचाने का एक माध्यम हैं। यूजर्स इन जानकारियों को सिर्फ सूचना ही मानें।

 

 

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