Bhai Dooj 2025: 22 या 23 अक्टूबर कब है भाई दूज, जानिए सही तारीख और शुभ मुहूर्त

Published : Oct 15, 2025, 08:42 PM IST
Bhai Dooj 2025 Date

सार

दिवाली के दो दिन बाद पड़ने वाला भाई दूज 2025 एक खास उलझन लेकर आता है- सही तारीख कौन सी है, 22 अक्टूबर या 23? जानिए इस दिन के रहस्य, शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और यमराज व यमुना की पौराणिक कथा के बारे में जो इस त्योहार को दिव्य और पवित्र बनाती है।

Bhai Dooj 2025 Date: भैया दूज का त्योहार दिवाली के दो दिन बाद मनाया जाता है। इस साल भैया दूज 23 अक्टूबर को है। यह दिन भाई-बहन के अटूट प्रेम का प्रतीक है। ऐसा माना जाता है कि रक्षाबंधन पर बहनें अपने भाई की लंबी उम्र की कामना करती हैं, वहीं भैया दूज पर वे अपने भाई को तिलक लगाकर उनकी सुख-समृद्धि की कामना करती हैं। भाई अपनी बहनों को उपहार देते हैं। भैया दूज को भाई दूज, भातृ द्वितीया, भाई द्वितीया और भ्रातृ द्वितीया के नाम से भी जाना जाता है।

इस दिन बहनें सुबह जल्दी उठकर स्नान करके व्रत रखती हैं। इसके बाद, वे अपने भाई को आमंत्रित करती हैं और पूजा की थाली सजाती हैं। वे अपने भाई को तिलक लगाती हैं, पवित्र धागा बांधती हैं और आरती उतारती हैं। इसके बाद, बहन अपने भाई को मिठाई खिलाती है। फिर भाई अपनी बहन को उपहार देता है।

पंचांग के अनुसार, भाई दूज को यम द्वितीया इसलिए कहा जाता है क्योंकि इस दिन यमुना में स्नान करने का विशेष महत्व है, जो यमराज और यमुना के मिलन की स्मृति में है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन यमुना में स्नान करने से सभी पापों का नाश होता है और दीर्घायु व धन की वृद्धि होती है। इस दिन पवित्र स्नान करने से मृत्यु के समय यमदूत आत्मा को ले जाने नहीं आते।

दृक पंचांग में कहा गया है कि धार्मिक ग्रंथ भाई दूज के अनुष्ठान के महत्व का वर्णन करते हुए कहते हैं कि जो भाई इस दिन अपनी बहन के घर तिलक लगाने जाता है, वह यमलोक के भय से मुक्त हो जाता है और दीर्घायु प्राप्त करता है। इस व्रत को करने वाली बहनों को सौभाग्य और समृद्धि की प्राप्ति होती है। इस प्रकार, भाई दूज केवल पारिवारिक बंधनों का उत्सव नहीं है, बल्कि धार्मिक शास्त्रों में वर्णित एक पवित्र व्रत है। यह पर्व भाई-बहन के प्रेम, स्नेह और कर्तव्य की अभिव्यक्ति है। पुराणों में वर्णित यमराज और यमुना की कथा इसके मूल में है। उनकी स्मृति आज भी इस पर्व को धार्मिक महत्व और सामाजिक उत्साह के साथ मनाने का आधार प्रदान करती है।

यमराज और यमुना की कथा

भाई दूज की कथा सूर्यदेव और छाया की संतान यमराज और उनकी बहन यमुना से संबंधित है। एक दिन, कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को, यमराज अचानक अपनी बहन यमुना के घर पहुँचे। यमुना ने उनका स्वागत किया और उन्हें भोजन कराया। प्रसन्न होकर, यमराज ने यमुना से वरदान माँगने को कहा। यमुना ने वर माँगा कि वह हर वर्ष इस दिन उनके घर आए और जो भी बहन अपने भाई को तिलक लगाए और उसे भोजन कराए, उसे यमराज का भय न हो। यमुना के वरदान के बारे में यमराज ने कहा, "ऐसा ही हो।" उन्होंने यमुना को वरदान दिया। तभी से भाई दूज का त्योहार मनाया जाने लगा।

भैया दूज पूजा विधि

सुबह स्नान करके घर की सफाई करें और पूजा स्थल पर एक चौकी रखें।

चौकी पर कलश और दीपक रखें। फिर उसे फूलों से सजाएं।

बहन अपने भाई को तिलक लगाए, अक्षत, रोली, दूर्वा और मिठाई चढ़ाएं।

भाई को दक्षिणा दें और अपने हाथों से भोजन कराएं।

भाई को बदले में बहन को उपहार देकर उसका आशीर्वाद लेना चाहिए।

भैया दूज शुभ मुहूर्त (2025)

भैया दूज तिथि प्रारंभ: 22 अक्टूबर 2025, रात्रि 8:16 बजे

भैया दूज तिथि समाप्त: 23 अक्टूबर 2025, रात्रि 10:46 बजे

भैया दूज पूजा मुहूर्त: दोपहर 1:13 बजे से दोपहर 3:28 बजे तक

Disclaimer: इस आर्टिकल में जो जानकारी है, वो धर्म ग्रंथों, विद्वानों और ज्योतिषियों से ली गईं हैं। हम सिर्फ इस जानकारी को आप तक पहुंचाने का एक माध्यम हैं। यूजर्स इन जानकारियों को सिर्फ सूचना ही मानें।

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