
Chaitra Navratri 2025 Day 9: 6 अप्रैल, रविवार को चैत्र नवरात्रि का अंतिम दिन है। इस तिथि की देवी सिद्धिदात्री हैं जो सभी का मंगल करती हैं। राक्षस, असुर, देवता, ऋषि, किन्नर आदि सभी इनकी पूजा से ही सिद्धियां प्राप्त करते हैं। देवी सिद्धिदात्री का आसन कमल है। इनकी 4 भुजाएं हैं, जिनमें गदा, चक्र, कमल और शंख है। आगे जानिए कैसे करें देवी सिद्धिदात्री की पूजा, आरती, मंत्र, जानें शुभ मुहूर्त भी…
- सुबह 11:08 से दोपहर 01:39 तक (श्रेष्ठ मुहूर्त)
- दोपहर 12:04 से 12:54 तक (अभिजीत मुहूर्त)
- सुबह 09:23 से 10:56 तक
- दोपहर 02:02 से 03:34 तक
- 6 अप्रैल, रविवार की सुबह स्नान आदि करने के बाद व्रत-पूजा का संकल्प लें। शुभ मुहूर्त में घर में किसी साफ स्थान पर देवी सिद्धिदात्री का चित्र या प्रतिमा स्थापित करें।
- देवी के चित्र पर पहले तिलक लगाएं फिर फूलों की माला पहनाएं। शुद्ध घी का दीपक जलाएं। इसके बाद अबीर, गुलाल, रोली, फूल, चावल, हल्दी, मेहंदी भी चढ़ाएं।
- देवी दिद्धिदात्री को नारियल या इससे बनी चीजों का भोग अतिप्रिय है। भोग लगाने के बाद देवी के मंत्रों का जाप करें और इसके बाद आरती करें। ये है देवी का मंत्र और आरती-
सिद्धगंधर्वयक्षाद्यैरसुरैरमरैरपि।
सेव्यमाना यदा भूयात् सिद्धिदा सिद्धिदायनी॥
जय सिद्धिदात्री तू सिद्धि की दाता, तू भक्तों की रक्षक तू दासों की माता।
तेरा नाम लेते ही मिलती है सिद्धि, तेरे नाम से मन की होती है शुद्धि।
कठिन काम सिद्ध कराती हो तुम, हाथ सेवक के सर धरती हो तुम।
तेरी पूजा में न कोई विधि है, तू जगदंबे दाती तू सर्वसिद्धि है।
रविवार को तेरा सुमरिन करे जो, तेरी मूर्ति को ही मन में धरे जो।
तू सब काज उसके कराती हो पूरे, कभी काम उस के रहे न अधूरे।
तुम्हारी दया और तुम्हारी यह माया, रखे जिसके सर पैर मैया अपनी छाया।
सर्व सिद्धि दाती वो है भाग्यशाली, जो है तेरे दर का ही अम्बे सवाली।
हिमाचल है पर्वत जहां वास तेरा, महानंदा मंदिर में है वास तेरा।
मुझे आसरा है तुम्हारा ही माता, वंदना है सवाली तू जिसकी दाता...
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