
The story of Lord Vishnu's daughters: भगवान विष्णु त्रिदेवों में से एक है। संसार में धर्म की स्थापना के लिए ये समय-समय पर अवतार लेते रहते हैं। भगवान विष्णु से जुड़ी अनेक कथाएं प्रचलित हैं। ऐसी ही एक रोचक कथा दक्षिण भारत में सुनने को मिलती है जिसमें उनकी 2 पुत्रियों के बारे में बताया गया है। ये कथा जितनी रोचक है उतनी ही रहस्यमयी भी है। आगे जानिए कौन हैं भगवान विष्णु की पुत्रियां और कैसे हुआ इनका जन्म?
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प्रचलित कथा के अनुसार, जब भगवान विष्णु वामन अवतार के समय राजा बलि के पास 3 पग भूमि दान में मांगने गए तो उन्होंने दो पग में ही तीनों लोकों को नाप लिया। इसके बाद राजा बलि ने भगवान वामन को तीसरा पग उनके सिर पर रखने के लिए कहा। राजा बलि की वचनबद्धता देखकर वामनदेव अति प्रसन्न हुए और उसी समय उनकी आंखों से आंसू की 2 बूंदे धरती पर गिरी। इन्हीं बूंदों से कन्याओं का जन्म हुआ। यही भगवान विष्णु की पुत्रियां कहलाईं?
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प्रचलित कथा के अनुसार, भगवान विष्णु की इन पुत्रियों के नाम अमृतवल्ली ओर सुंदरवल्ली है। जन्म लेते ही ये दोनों तपस्या करने जंगल में चली गईं। जब ये दोनों अपनी तपस्या पूरी कर पुन: वैकुंठ लौट रही थीं, तभी रास्ते में इन्हें भगवान शिव के पुत्र कार्तिकेय मिले। कार्तिकेय के रूप और सौंदर्य को देखकर भगवान विष्णु की ये दोनों पुत्रियां उन पर मोहित हो गईं। भगवान विष्णु ने अपनी दोनों पुत्रियों का विवाह शिवपुत्र कार्तिकेय से करवा दिया।
संसार के पालक भगवान विष्णु की पुत्री होने के बाद भी अमृतवल्ली ओर सुंदरवल्ली की पूजा नहीं होती, इसके पीछे वजह है कि ये दोनों देवियां नहीं हैं। ये दोनों ही कार्तिकेय की ऊर्जा स्वरूप हैं, इसलिए इन दोनों की पूजा अपने पति के साथ स्वत: ही हो जाती है, ऐसी भी मान्यता है। दक्षिण भारत के कुछ मंदिरों में जरूर कार्तिकेय के साथ इनकी प्रतिमाएं देखने को मिलती हैं। ऐसा कहा जाता है कि भगवान विष्णु की दोनों बेटियां कभी दक्षिण क्षेत्र से बाहर नहीं गई, ऐसे में देश के अन्य हिस्सों में इनकी पूजा का विधान नहीं है।
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इस आर्टिकल में जो जानकारी है, वो धर्म ग्रंथों, विद्वानों और ज्योतिषियों से ली गईं हैं। हम सिर्फ इस जानकारी को आप तक पहुंचाने का एक माध्यम हैं। यूजर्स इन जानकारियों को सिर्फ सूचना ही मानें।
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