Hindu Panchang: हिंदू पंचांग में 12 महीने होते हैं लेकिन बहु कम लोगों को इनके नामों की जानकारी है। खास बात ये है कि इन सभी महीनों का नाम नक्षत्रों का आधार पर रखा गया है। आगे जानिए हिंदू पंचांग के दसवें महीने का नाम क्या है और ये कब से कब तक रहेगा।

Paush Month 2025 Calender: जिस तरह अंग्रेजी साल में 12 महीने होते हैं, उसी तरह हिंदू वर्ष में भी 12 महीने निश्चित हैं। इनमें से हिंदू पंचांग के दसवें महीने का खास महत्व है। इस महीने का नाम पौष है। ये महीना शीत ऋतु के अंतर्गत आता है। इस दौरान कईं प्रमुख त्योहार भी मनाए जाते हैं। इस महीने से जुड़े कुछ नियम और मान्यताएं भी हैं जैसे इस महीने में क्या-क्या नहीं आदि? आगे जानिए इस बार पौष मास कब से शुरू होकर कब तक रहेगा और इस महीने के व्रत-त्योहारों की डिटेल…

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कब से कब तक रहेगा पौष मास 2025?

पंचांग के अनुसार, इस बार पौष मास की शुरूआत 5 दिसंबर, शुक्रवार से हो चुकी है, जो 3 जनवरी 2026 तक रहेगा। यानी इस बार पौष मास 30 दिन का रहेगा। इस महीने का नाम पौष क्यों रखा गया है, इसके पीछे भी एक खास वजह है। पौष मास के अंतिम दिन यानी पूर्णिमा तिथि पर चंद्रमा पुष्य नक्षत्र में होता है, इसी के आधार पर इस महीने का नाम पौष रखा गया है।

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पौष मास का महत्व

धर्म ग्रंथ के अनुसार पौष मास के स्वामी भगवान सूर्यदेव हैं, इसलिए पौष मास में रोज सुबह जल्दी उठकर सूर्यदेव को जल चढ़ाने का नियम है। इस महीने में खान-पान को लेकर भी अनेक नियम हैं जैसे इस दौरान हल्का और सात्विक भोजन करना चाहिए। मांसाहारी, शराब आदि चीजों से दूर रहना चाहिए। इनके अलावा इस महीने में मूली, बैंगन, काले चने, फूलगोभी, मसूर की दाल आदि चीजों के खाने पर भी पाबंदी है।

पौष मास में कौन-से उपाय करें?

1. पौष मास में रोज सुबह सुबह सूर्य देव को जल चढ़ाएं। इस जल में लाल चंदन और लाल फूल भी जरूर डालें। इससे आपको शुभ फलों की प्राप्ति हो सकती है।
2. पौष मास में जितना संभव हो सके सूर्यदेव के मंत्रों का जाप करें-ऊं घृणिः सूर्याय नम:।
3. संभव हो तो पौष मास के प्रत्येक रविवार को व्रत रखें। अगर ऐसा न कर पाएं तो रविवार को बिना नमक का भोजन करें।
4. पौष मास में जरूरतमंदों को कंबल, घी, गुड़, चावल, दाल तिल आदि चीजों का दान करना चाहिए।
5. पौष मास में पितरों के तर्पण का भी विशेष महत्व है। इससे पितृ दोष का प्रभाव कम होता है।

पौष मास 2025 के व्रत त्योहार

8 दिसंबर, सोमवार- गणेश चतुर्थी व्रत
12 दिसंबर, शुक्रवार- रुक्मिणी अष्टमी, हनुमान अष्टमी
15 दिसंबर, सोमवार- सफला एकादशी
16 दिसंबर, मंगलवार- सुरुप द्वादशी, खर मास प्रारंभ
17 दिसंबर, बुधवार- प्रदोष व्रत
18 दिसंबर, गुरुवार- शिव चतुर्दशी व्रत
19 दिसंबर, शुक्रवार- पौष अमावस्या
23 दिसंबर, मंगलवार- अंगारक विनायकी चतुर्थी व्रत
28 दिसंबर, रविवार- शाकंभरी यात्रा
30 दिसंबर, मंगलवार- पुत्रदा एकादशी
1 जनवरी 2026, गुरुवार- प्रदोष व्रत
3 जनवरी 2026, शनिवार- पौष पूर्णिमा


Disclaimer
इस आर्टिकल में जो जानकारी है, वो धर्म ग्रंथों, विद्वानों और ज्योतिषियों से ली गईं हैं। हम सिर्फ इस जानकारी को आप तक पहुंचाने का एक माध्यम हैं। यूजर्स इन जानकारियों को सिर्फ सूचना ही मानें।