
Nag Panchami 2024 Details: धर्म ग्रंथों के अनुसार, हर साल श्रावण (सावन) मास के शुक्ल पक्ष की पचंमी तिथि को नागपंचमी का पर्व मनाया जाता है। इस दिन नागों की पूजा की जाती है। ये परंपरा हजारों सालों से चली आ रही है। इस परंपरा के पीछे कईं धार्मिक और मनोवैज्ञानिक कारण छिपे हुए हैं। इस बार नागपंचमी का पर्व अगस्त 2024 में मनाया जाएगा। आगे जानिए नागपंचमी 2024 की सही डेट, पूजा विधि, शुभ मुहूर्त, आरती की डिटेल…
कब है नागपंचमी 2024? (Kab Hai Nag Panchami 2024)
पंचांग के अनुसार, इस बार सावन मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि 8 अगस्त, गुरुवार की रात 12 बजकर 37 मिनिट से शुरू होगी, जो 10 अगस्त, शनिवार की सुबह 03 बजकर 14 मिनिट तक रहेगी। उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. प्रवीण द्विवेदी के अनुसार, चूंकि पंचमी तिथि का सूर्योदय 9 अगस्त, शुक्रवार को होगा, इसलिए इसी दिन नागपंचमी का पर्व मनाया जाएगा। इस दिन सिद्ध, साध्य और अमृत नाम के 3 शुभ योग भी बनेंगे, जिसके चलते इस पर्व का महत्व और भी बढ़ गया है।
नागपंचमी 2024 पूजा शुभ मुहूर्त (Nag Panchami 2024 Shubh Muhurat)
सुबह 05:47 से 08:27 तक
सुबह 07:41 से 09:18 तक
दोपहर 12:06 से 12:58 तक
दोपहर 12:32 से 02:09 तक
नागपंचमी पूजा विधि (Nag panchami Puja Vidhi)
- 9 अगस्त, शुक्रवार को यानी नागपंचमी पर सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि करें और व्रत-पूजा का संकल्प लें। इस बात का विशेष ध्यान रखें कि जीवित नाग की पूजा भूलकर भी न करें।
- ऊपर बताए गए किसी शुभ मुहूर्त में नाग-नागिन का जोड़े की प्रतिमा या चित्र को स्थापित करें और कुमकुम व चावल चढ़ाएं। शुद्ध घी का दीपक जलाकर नीचे लिखा मंत्र बोलें-
अनन्तं वासुकिं शेषं पद्मनाभं च कम्बलम्।
शंखपाल धृतराष्ट्रं तक्षकं कालियं तथा।।
एतानि नव नामानि नागानां च महात्मनाम्।
सायंकाले पठेन्नित्यं प्रात:काले विशेषत:।।
तस्मै विषभयं नास्ति सर्वत्र विजयी भवेत्।।
- नाग-नागिन की प्रतिमा का दूध से अभिषेक करें। इसे बाद शुद्ध जल से स्नान करवाएं। अबीर, गुलाल, रोली, फूल, चावल चावल, सफेद वस्त्र आदि चीजें एक-एक करके चढ़ाते रहें।
- गाय के दूध से बनी खीर या अन्य किसी मिठाई का भोग लगाएं। नारियल चढ़ाएं। अंत में आरती करें। इस प्रकार पूजा करने से नागदेवता के साथ-साथ महादेव भी प्रसन्न होते हैं।
नाग देवता की आरती (Nag devta aarti)
आरती कीजे श्री नाग देवता की, भूमि का भार वहनकर्ता की ।
उग्र रूप है तुम्हारा देवा भक्त, सभी करते है सेवा ।।
मनोकामना पूरण करते, तन-मन से जो सेवा करते ।
आरती कीजे श्री नाग देवता की , भूमि का भार वहनकर्ता की ।।
भक्तों के संकट हारी की आरती कीजे श्री नागदेवता की ।
आरती कीजे श्री नाग देवता की, भूमि का भार वहनकर्ता की ।।
महादेव के गले की शोभा ग्राम देवता मै है पूजा ।
श्वेत वर्ण है तुम्हारी ध्वजा।।
दास ऊंकार पर रहती कृपा सहस्त्रफनधारी की ।
आरती कीजे श्री नाग देवता की, भूमि का भार वहनकर्ता की ।।
आरती कीजे श्री नाग देवता की, भूमि का भार वहनकर्ता की ।।
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