Radha Ashtami 2025: 30 या 31 अगस्त, कब करें राधा अष्टमी व्रत? जानें पूजा विधि, मंत्र सहित पूरी डिटेल

Published : Aug 29, 2025, 03:23 PM IST
radha ashtami 2025

सार

Radha Ashtami 2025 Date: भाद्रपद मास में हर साल राधा अष्टमी का पर्व मनाया जाता है। मान्यता है कि द्वापर युग में भगवान श्रीकृष्ण की प्रेयसी के रूप में देवी लक्ष्मी के एक अंश ने राधा के रूप में जन्म लिया था। जानें 2025 में कब है राधा अष्टमी?

Kab Hai Radha Ashtami 2025: धर्म ग्रंथों के अनुसार, हर साल भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को राधा अष्टमी का उत्सव मनाया जाता है। इस दिन श्रीराधा जी के मंदिरों में भक्तों की भीड़ उमड़ती है और विशेष पूजन, भजन आदि कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। पुराणों की मानें तो श्रीराधा स्वयं देवी लक्ष्मी का अंशावतार थीं। राधा अष्टमी पर यदि विशेष पूजन आदि किया जाए तो जीवन में सुख-समृद्धि बनी रहती है। आगे जानिए 2025 में कब है राधा अष्टमी, कैसे करें पूजा, शुभ मुहूर्त आदि की डिटेल…

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राधा अष्टमी कब है 2025 में?

पंचांग के अनुसार, भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि 30 अगस्त, शनिवार की रात 10 बजकर 46 मिनिट से शुरू होगी, जो 31 अगस्त, रविवार की रात 12 बजकर 58 मिनिट तक रहेगी। चूंकि अष्टमी तिथि का सूर्योदय 31 अगस्त, रविवार को होगा, इसलिए इसी दिन राधा अष्टमी का पर्व मनाया जाएगा।

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राधा अष्टमी 2025 शुभ मुहूर्त

राधा अष्टमी पर पूजा का श्रेष्ठ मुहूर्त सुबह 11 बजकर 05 मिनिट से दोपहर 01 बजकर 38 मिनिट तक रहेगा। यानी पूजा के लिए भक्तों को पूरे 02 घण्टे 33 मिनट का समय मिलेगा। इसके अलावा अन्य मुहूर्त इस प्रकार हैं-
सुबह 07:46 से 09:19 तक
सुबह 09:19 से 10:53 तक
दोपहर 12:02 से 12:52 तक
दोपहर 02:00 से 03:34 तक

राधा अष्टमी व्रत-पूजा विधि

- 31 अगस्त, रविवार की सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि करें और हाथ में जल-चावल लेकर राधा अष्टमी व्रत-पूजा का संकल्प लें। जैसा व्रत आप करना चाहते हैं, उसी के अनुसार संकल्प लें।
- शुभ मुहूर्त से पहले घर में किसी स्थान की साफ-सफाई कर पूजा योग्य बना लें और गंगा जल या गौमूत्र छिड़क कर पवित्र कर लें। इस स्थान पर लकड़ी का एक बाजोट रख लाल कपड़ा बिछा लें।
- शुभ मुहूर्त में इस बाजोट पर भगवान श्रीकृष्ण के साथ देवी राधा की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें। भगवान की प्रतिमा पर तिलक लगाएं। फूलों की माला पहनाएं और शुद्ध घी का दीपक जलाएं।
- इसके बाद अबीर, गुलाल, रोली, हल्दी, मेहंदी, चावल, इलाइची, लौंग, इत्र, जनेऊ आदि चीजें राधाकृष्ण को एक-एक कर अर्पित करें। भगवान श्रीकृष्ण को पीले और श्रीराधा को लाल वस्त्र अर्पित करें।
- इस तरह पूजा करने के बाद अपनी इच्छा अनुसार भगवान को भोग लगाएं। दिन भर व्रत के नियमों का पालन करें यानी किसी पर क्रोध न करें, झूठ न बोलें, बुरे विचार मन में न लाएं आदि।
- रात में सोए नहीं बल्कि जागकर भजन-कीर्तन करें। सुबह पारणा कर व्रत पूर्ण करें। इस तरह राधा अष्टमी का व्रत करने से आपके घर में सुख-समृद्धि और शांति हमेशा बनी रहेगी।

राधा देवी की आरती लिरिक्स हिंदी में (Radha Devi Ki Aarti Lyrics In Hindi)

त्रिविध तापयुत संसृति नाशिनि,
विमल विवेकविराग विकासिनि ।
पावन प्रभु पद प्रीति प्रकाशिनि,
सुन्दरतम छवि सुन्दरता की ॥
॥ आरती श्री वृषभानुसुता की..॥
मुनि मन मोहन मोहन मोहनि,
मधुर मनोहर मूरति सोहनि ।
अविरलप्रेम अमिय रस दोहनि,
प्रिय अति सदा सखी ललिता की ॥
॥ आरती श्री वृषभानुसुता की..॥
संतत सेव्य सत मुनि जनकी,
आकर अमित दिव्यगुन गनकी ।
आकर्षिणी कृष्ण तन मनकी,
अति अमूल्य सम्पति समता की ॥
॥ आरती श्री वृषभानुसुता की..॥
। आरती श्री वृषभानुसुता की ।
कृष्णात्मिका, कृष्ण सहचारिणि,
चिन्मयवृन्दा विपिन विहारिणि ।
जगजननि जग दुखनिवारिणि,
आदि अनादिशक्ति विभुता की ॥
॥ आरती श्री वृषभानुसुता की..॥
आरती श्री वृषभानुसुता की,
मंजुल मूर्ति मोहन ममता की


Disclaimer
इस आर्टिकल में जो जानकारी है, वो धर्म ग्रंथों, विद्वानों और ज्योतिषियों से ली गईं हैं। हम सिर्फ इस जानकारी को आप तक पहुंचाने का एक माध्यम हैं। यूजर्स इन जानकारियों को सिर्फ सूचना ही मानें।

 

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