
उज्जैन. धर्म ग्रंथों के अनुसार, चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की पंचमी तिथि को रंगपंचमी (Rangpanchami 2023) का पर्व मनाया जाता है। इस बार ये तिथि 12 मार्च, रविवार को है। ये पर्व मध्य प्रदेश के मालवा क्षेत्र में विशेष रूप से मनाया जाता है। इस दिन यहां विभिन्न समाज व संगठन वाले गैर (जुलूस) निकालते हैं। इंदौर में निकलने वाली गैर तो विश्व प्रसि्दध है। उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. प्रवीण द्विवेदी के अनुसार, मान्यता है कि भगवान श्रीकृष्ण ने इसी दिन राधा और गोपियों के साथ होली खेली थी, तभी से रंगपंचमी मनाने की परंपरा चली आ रही है। इस दिन भगवान श्रीकृष्ण और देवी राधा की पूजा भी विशेष रूप से की जाती है। आगे जानिए पूजा विधि…
रंगपंचमी पर इस विधि से करें राधा-कृष्ण की पूजा
- रंगपंचमी की सुबह स्नान आदि करने के बाद व्रत-पूजा का संकल्प लें और घर के किसी साफ स्थान पर एक बाजोट (पटिए) पर भगवान राधा-कृष्ण की तस्वीर या प्रतिमा स्थापित करें।
- तस्वीर के निकट ही तांबे का पानी से भरा कलश भी रखें। इसके बाद तस्वीर पर कुंकम से तिलक लगाएं और फूल माला पहनाएं। कलश पर स्वस्तिक का चिह्न बनाएं और इसके ऊपर मौली बांधें।
- राधा-कृष्ण के सामने शुद्ध घी का दीपक जलाएं और धूप बत्ती भी। इसके साथ फूल, अबीर, गुलाल, रोली, चावल, पान आदि चीजें एक-एक करके चढ़ाते रहें। गाय के दूध से बनी खीर का भोग लगाएं।
- इसके बाद आसन पर बैठकर ॐ श्रीं श्रीये नमः मंत्र का जाप कमलगट्टे की माला से करें। कम से कम 1 माला (108 बार) जाप अवश्य करें। कलश में रखे जल को घर के हर कोने में छिड़कें।
- ऐसा करने से घर में सुख-समृद्धि बनी रहेगी। अंत में भगवान राधा-कृष्ण की आरती करें और खीर का का प्रसाद परिवार के लोगों में बांट दें। राधा-कृष्ण की कृपा से आपकी हर कामना पूरी होगी।
ये है राधा-कृष्ण की आरती
ॐ जय श्री राधा जय श्री कृष्ण
श्री राधा कृष्णाय नमः .
घूम घुमारो घामर सोहे जय श्री राधा
पट पीताम्बर मुनि मन मोहे जय श्री कृष्ण
जुगल प्रेम रस झम झम झमकै
श्री राधा कृष्णाय नमः .
राधा राधा कृष्ण कन्हैया जय श्री राधा
भव भय सागर पार लगैया जय श्री कृष्ण
मंगल मूरति मोक्ष करैया
श्री राधा कृष्णाय नमः .
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