सावन शिवरात्रि 2026: जानें पूजा विधि, मंत्र, शुभ मुहूर्त, पूजन सामग्री और जलाभिषेक का समय

Published : Aug 10, 2026, 01:54 PM IST

Sawan Shivratri 2026 Date: धर्म ग्रंथों में सावन मास की शिवरात्रि बहुत ही खास मानी गई है। इस दिन की गई शिव पूजा का कईं गुना फल मिलता है। इस व्रत में रात्रि पूजन का विशेष महत्व है।

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जानें सावन शिवरात्रि 2026 से जुड़ी हर बात

Sawan Shivratri 2026 Details: भगवान शिव का प्रिय सावन मास इस बार 30 जुलाई से शुरू हो चुका है, जो 28 अगस्त तक रहेगा। इस महीने के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मासिक शिवरात्रि का पर्व मनाया जाता है। सावन में शिवरात्रि व्रत का विशेष महत्व धर्म ग्रंथों में बताया गया है। मान्यता है कि सावन शिवरात्रि पर की गई पूजा, उपाय, मंत्र जाप आदि बहुत ही जल्दी शुभ फल देते हैं। इस बार सावन शिवरात्रि का पर्व 11 अगस्त, मंगलवार को है। आगे जानिए सावन शिवरात्रि व्रत की पूजा विधि, मंत्र और शुभ मुहूर्त की डिटेल…

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सावन शिवरात्रि जलाभिषेक का समय

सावन शिवरात्रि पर शिवलिंग का जलाभिषेक करने का विशेष महत्व है। 11 अगस्त को शिवलिंग पर जल चढ़ाने के सबसे श्रेष्ठ मुहूर्त इस प्रकार हैं-
ब्रह्म मुहूर्त- सुबह 04:29 से 05:17 तक
अमृत काल - सुबह 07:58 से 09:25 तक
अभिजीत मुहूर्त- दोपहर 12:06 से 12:57 तक
प्रदोष काल- शाम 07:05 से रात 09:14 तक

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सावन शिवरात्रि 2026 रात्रि पूजन के शुभ मुहूर्त

सावन शिवरात्रि में महादेव का रात्रि पूजन का विशेष महत्व है। रात के चारों प्रहर शिवजी की पूजा की जाती है। जानें रात्रि पूजा के शुभ मुहूर्त
- रात्रि प्रथम प्रहर पूजा मुहूर्त- शाम 07:04 से रात 09:45 तक
- रात्रि द्वितीय प्रहर पूजा मुहूर्त- रात 09:45 से 12:26 तक
- रात्रि तृतीय प्रहर पूजा मुहूर्त- रात 12:26 से 03:07 तक
- रात्रि चतुर्थ प्रहर पूजा मुहूर्त- रात 03:07 से सुबह 05:49 तक
- निशिता काल पूजा मुहूर्त- रात 12:05 से 12:48 तक


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सावन शिवरात्रि पूजन सामग्री लिस्ट

शुद्ध जल, गाय का कच्चा दूध, दही, शहद, बिल्व पत्र, धतूरा, शमी के पत्ते, आंकड़े के फूल, भांग, चावल, चंदन, जनेऊ, कलावा, दीपक, कपूर, नारियल, मिठाई, नारियल, सफेद कपड़े


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सावन शिवरात्रि पूजा विधि

- शुभ मुहूर्त से पहले पूरी पूजन सामग्री एक स्थान पर एकत्रित कर लें। स्नान आदि करने के बाद साफ कपड़े पहनें। मन में श्रद्धा का भाव होना चाहिए।
- सबसे पहले शिवलिंग का अभिषेक जल से करें फिर गाय के दूध से। इसके बाद दही, शहद से भी अभिषेक करें और फिर एक बार शुद्ध जल चढ़ाएं।
- शिवलिंग के सामने दीपक जलाएं और बेल पत्र, भांग, आंकड़े के फूल, धतूरा, चावल, कपड़े, जनेऊ, कलावा, शमी के पत्ते आदि चीजें एक-एक कर चढ़ाएं।
- पूजा करते समय ऊं नम: शिवाय या नीचे लिखे मंत्र का जाप करते रहें-
ऊं तत्पुरुषाय विद्महे महादेवाय धीमहि तन्नो रुद्रः प्रचोदयात्॥
- इसके बाद नारियल, मिठाई और फल का फलों का भोग लगाएं। परिवार सहित कपूर आरती करें। रात के चारों प्रहर इसी तरह से पूजा करते रहें।
- अगले दिन सुबह व्रत पूर्ण होने के बाद ब्राह्मणों को घर बुलाकर भोजन करवाएं और दान-दक्षिणा देकर विदा करें। इसके बाद स्वयं भोजन करें।
- मान्यता है कि इस तरह सावन शिवरात्रि का व्रत करने से जीवन में सुख-समृद्धि बनी रहती है और हर तरह की परेशानी से छुटकारा भी मिल जाता है।

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सावन शिवरात्रि का महत्व

हर महीने के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मासिक शिवरात्रि का पर्व मनाया जाता है। इसे शिव चतुर्दशी भी कहते हैं। जब सावन में मासिक शिवरात्रि आती है तो इसे सावन शिवरात्रि कहते हैं। सावन भगवान शिव की भक्ति का महीना है, इसलिए इस महीने में मनाया जाने वाला शिवरात्रि व्रत बहुत खास माना गया है।



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