Sawan Third Somwar 2026: कब है सावन का तीसरा सोमवार? जानें जलाभिषेक का मुहूर्त-मंत्र और विधि

Published : Aug 16, 2026, 03:30 PM IST
Sawan Third Somwar 2026

सार

Sawan Somwar 2026 Date: सावन सोमवार का विशेष महत्व धर्म ग्रंथों में बताया गया है। इस बार सावन में 4 सोमवार का संयोग बन रहा है। इनमें से 2 सोमवार निकल चुके हैं। जानें सावन का तीसरा सोमवार कब है?

Sawan Ka Tesra Somwar Kab Hai: सावन का महीना भगवान शिव की आराधना के लिए बेहद खास माना जाता है। इस दौरान पड़ने वाले हर सोमवार को शिव भक्त व्रत रखते हैं और शिवलिंग पर जल, दूध, बेलपत्र और फूल चढ़ाकर महादेव की पूजा करते हैं। इस दिन जलाभिषेक का विशेष महत्व भी है। भक्त शुभ मुहूर्त में शिवलिंग पर जल चढ़ाकर पुण्य प्राप्त करते हैं। जानें कब है सावन 2026 का तीसरा सोमवार, शुभ मुहूर्त व जलाभिषेक की विधि…

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कब है सावन 2026 का तीसरा सोमवार?

इस बार सावन का तीसरा सोमवार 17 अगस्त को पड़ रहा है। इस दिन नागपंचमी का पर्व भी मनाया जाएगा, जिसके चलते इस पर्व का महत्व और भी अधिक हो गया है। साथ ही इस दिन शुभ, शुक्ल और छत्र नाम के 3 शुभ योग भी बनेंगे। सोमवार को सूर्य कर्क से निकलकर सिंह राशि में प्रवेश करेगा, जिससे सिंह संक्रांति का पर्व भी इस दिन मनाया जाएगा।

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17 अगस्त 2026 जलाभिषेक का मुहूर्त

ब्रह्म मुहूर्त- सुबह 04:31 से 05:19 तक
अभिजीत मुहूर्त - 12:05 से 12:56 तक
प्रदोष काल- शाम 07:10 से 08:40 तक

ऐसे करें भगवान शिव का जलाभिषेक

- सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और पूजा, व्रत व जलाभिषेक का संकल्प लें। शुभ मुहूर्त से पहले जलाभिषेक की पूरी तैयारी कर लें।
- इसके बाद पास स्थित शिव मंदिर जाएं और विधि-विधान से पूजा करें। सबसे पहले शिवलिंग पर साफ जल या गंगाजल चढ़ाएं।
- इसके बाद दूध, दही, शहद आदि से अभिषेक करें। फिर दोबारा जल अर्पित करें। जलाभिषेक करते समय ऊं नमः शिवाय मंत्र बोलें।
- शिवलिंग पर बेलपत्र, धतूरा, आक के फूल चढ़ाएं। अंत में धूप-दीप जलाकर शिवजी की आरती करें। इससे आपको शुभ फल मिलेंगे।

शिवजी की आरती लिरिक्स हिंदी में (Shivji Ki Aarti Lyrics in Hindi)

ओम जय शिव ओंकारा॥
ब्रह्मा, विष्णु, सदाशिव, अर्द्धांगी धारा॥
ओम जय शिव ओंकारा॥
एकानन चतुरानन, पंचानन राजे।
हंसासन गरूड़ासन, वृषवाहन साजे॥
ओम जय शिव ओंकारा॥
दो भुज चार चतुर्भुज, दसभुज अति सोहे।
त्रिगुण रूप निरखत, त्रिभुवन जन मोहे॥
ओम जय शिव ओंकारा॥
अक्षमाला वनमाला, मुण्डमाला धारी।
त्रिपुरारी कंसारी, कर माला धारी॥
ओम जय शिव ओंकारा॥
श्वेताम्बर पीताम्बर, बाघम्बर अंगे।
सनकादिक गरुणादिक, भूतादिक संगे॥
ओम जय शिव ओंकारा॥
कर के मध्य कमण्डलु, चक्र त्रिशूलधारी।
जगकर्ता जगभर्ता, जगसंहारकर्ता॥
ओम जय शिव ओंकारा॥
ब्रह्मा विष्णु सदाशिव, जानत अविवेका।
प्रणवाक्षर के मध्ये, ये तीनों एका॥
ओम जय शिव ओंकारा॥
पर्वत सोहैं पार्वती, शंकर कैलासा।
भांग धतूरे का भोजन, भस्मी में वासा॥
ओम जय शिव ओंकारा॥
जटा में गंग बहत है, गल मुण्डन माला।
शेष नाग लिपटावत, ओढ़त मृगछाला॥
ओम जय शिव ओंकारा॥
काशी में विराजे विश्वनाथ, नन्दी ब्रह्मचारी।
नित उठि दर्शन पावत, महिमा अति भारी॥
ओम जय शिव ओंकारा॥
त्रिगुणस्वामी जी की आरती, जो कोइ नर गावे।
कहत शिवानंद स्वामी, मनवांछित फल पावे॥
ओम जय शिव ओंकारा॥
स्वामी ओम जय शिव ओंकारा॥


Disclaimer
इस आर्टिकल में जो जानकारी है, वो धर्म ग्रंथों, विद्वानों और ज्योतिषियों से ली गईं हैं। हम सिर्फ इस जानकारी को आप तक पहुंचाने का एक माध्यम हैं। यूजर्स इन जानकारियों को सिर्फ सूचना ही मानें।

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