Sheetala Mata Vrat Katha: शीतला सप्तमी व्रत कथा, जिसे सुने बिना अधूरा माना जाता है व्रत का फल

Published : Mar 10, 2026, 07:34 AM IST
Sheetala Mata Vrat Katha

सार

Sheetala Puja Katha: चैत्र मास के कृष्ण पक्ष में शीतला पूजन किया जाता है। बिना कथा सुने इस व्रत का पूरा फल नहीं मिलता। इसकी व्रत की कथा बहुत ही रोचक है जिसे हर व्रती (व्रत करने वाला) को जरूर सुनना चाहिए।

Sheetala Mata Ki Katha: हर साल चैत्र कृष्ण पक्ष की सप्तमी और अष्टमी तिथि पर देवी शीतला की पूजा की जाती है। इस बार शीतला सप्तमी की पूजा 10 मार्च, मंगलवार को और शीतला अष्टमी की पूजा 11 मार्च, बुधवार को की जाएगी। देवी शीतला से जुड़ी एक प्राचीन कथा भी है जिसे सुनने के बाद ही इस व्रत का पूरा फल मिलता है। आगे जानिए शीतला सप्तमी की कथा…

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ये है देवी शीतला की कथा (Story Of Sheetala Mata)

- प्रचलित कथा के अनुसार, किसी समय एक गांव में एक ब्राह्मण परिवार रहता था। उस परिवार में माता-पिता के अलावा दो बेटे और 2 बहुएं थीं। विवाह के बाद काफी समय तक ब्राह्मण की दोनों बहुओं को संतान नहीं हुई। तब किसी ने उन्हें शीतला सप्तमी का व्रत करने की सलाह दी। इस व्रत के शुभ प्रभाव से दोनों बहुएं जल्दी ही मां बन गईं।

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- अगली बार जब शीतला पूजन का समय आया तो दोनों बहुओं ने बच्चों की सेहत को ध्यान में रखते हुए चुपके से गर्म खाना खा लिया। इसके बाद जब दोनों बहुएं अपने बच्चों को उठाने गई तो देखा कि दोनों बच्चे मृत हो चुके हैं। दोनों बहुओं ने सास ने जब उनसे पूछा तो दोनों बहुओं ने उन्हें पूरी बात सच-सच बता दी। सास को तुरंत पूरी बात समझ आ गई।
- सास ने अपनी दोनों बहुओं को घर से निकाल दिया और कहा ‘जब तक दोनों बच्चे जिंदा न हो जाएं, तब तक घर मत लौटना।’ दोनों बहुएं बच्चों को टोकरी में रख घर से निकल गई। रास्ते में उन्हें दो बहनें मिलीं। दोनों बहुओं ने उनके सिर से जुएं निकाल दी, खुश होकर उन बहनों ने कहा ‘तुम दोनों ने हमारे मस्तक को शीतल किया है तुम्हारी हर इच्छा पूरी होगी।’
- दोनों बहुओं ने उन्हें पूरी बात सच-सच बता दी। उन बहनों में से एक ने कहा ‘तुम दोनों ने शीतला सप्तमी पर गर्म भोजन किया था, इसी कारण तुम्हारे बच्चों की ये हालत हुई है। बहुएं समझ गईं कि ये कोई और नहीं बल्कि स्वयं देवी शीतला ही हैं। दोनों बहुओं ने माता शीतला से माफी मांगी। शीतला माता ने खुश होकर उनके मृत पुत्रों को जिंदा कर दिया।
- अपने पुत्रों को जीवित देख दोनों बहुएं बहुत खुश हुई और अपने पुत्रों को लेकर गांव में आईं और पूरी बात अपनी सास को बता दी। गांव वालों ने जब ये बात सुनी तो वे भी माता शीतला की पूजा करने लगे और शीतला माता का मंदिर भी बनवा दिया। तभी से घर-घर में शीतला माता की पूजा की परंपरा चली आ रही है।

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