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Sheetala Saptami 2026: शीतला सप्तमी कब, कैसे कैसे करें पूजा? जानें मंत्र-आरती सहित पूरी विधि, शुभ मुहूर्त
Sheetala Saptami 2026 Kab Hai: होलिका दहन के 6 दिन बाद शीतला देवी की पूजा की परंपरा है। कुछ लोग सप्तमी तो कुछ अष्टमी तिथि पर देवी शीतला की पूजा करते हैं। इस पूजा को बसोड़ा और बसियोरा आदि नामों से जाना जाता है।
कैसे करें शीतला पूजा?
Sheetala Puja 2026 Details: चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की सप्तमी और अष्टमी तिथि पर देवी शीतला की पूजा की जाती है। देवी शीतला माता पार्वती का ही एक रूप हैं। शीतला देवी की पूजा करने से कईं तरह के रोग होने का खतरा टल जाता है, ऐसा धर्म ग्रंथों में लिखा है। शीतला देवी की पूजा ठंडी चीजों जैसे जल और बासी भोजन से की जाती है। आगे जानिए इस बार कब है शीतला सप्तमी और अष्टमी, साथ ही पूजा विधि, मंत्र सहित पूरी डिटेल…
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कब है शीतला सप्तमी-अष्टमी 2026?
कुछ स्थानों पर देवी शीतला की पूजा चैत्र कृष्ण सप्तमी तिथि पर तो कुछ स्थानों पर अष्टमी तिथि पर की जाती है। पंचांग के अनुसार, इस बार शीतला सप्तमी का पर्व 10 मार्च, मंगलवार और शीतला अष्टमी का पर्व 11 मार्च, बुधवार को मनाया जाएगा।
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शीतला सप्तमी-अष्टमी 2026 पूजा मुहूर्त
उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. प्रवीण द्विवेदी के अनुसार, 10 मार्च, मंगलवार को शीतला सप्तमी पर पूजा का शुभ मुहूर्त सुबह 06:37 से शाम 06:26 तक रहेगा। अगले दिन यानी 11 मार्च, बुधवार को शीतला अष्टमी पर पूजा का शुभ मुहूर्त सुबह 06:36 से शाम 06:27 तक रहेगा।
कैसे करें देवी शीतला की पूजा?
- महिलाएं अपनी परंपरा के अनुसार सप्तमी या अष्टमी तिथि पर देवी शीतला की पूजा कर सकती हैं। देवी शीतला के पूजन से एक दिन पहले भोजन और देवी शीतला की पूजा में चढ़ाई जाने वाली चीजें बनाकर रख लें।
- अगले दिन सुबह स्नान आदि करने के बाद हाथ में जल, चावल और फूल लेकर व्रत-पूजा का संकल्प लें। एक दिन पहले बनाए पुरी-भजिए, चावल, थूली, भिगोई हुई चने की आदि का चीजों का भोग देवी शीतला को लगाएं।
- लोटे से जल डालते हुए पूजा स्थान की 7 परिक्रमा करें। देवी शीतला की पूजा में दीपक और अगरबत्ती न जलाएं, ऐसा शास्त्रों में लिखा है। इसके बाद शीतला माता की कथा सुनें और बिना दीपक के ही आरती गाएं।
- संभव हो तो ऊं ह्रीं श्रीं शीतलायै नमः मंत्र का जाप कम से कम 11 माला करें। इस तरह देवी शीतला की पूजा से परिवार में सुख-शांति बनी रहेगी और शीतजनित रोग होने का खतरा भी कम हो जाता है।
- इस बात का ध्यान रखें कि इस दिन घरों में गर्म भोजन न बनाएं। एक दिन पहले का बनाया हुआ भोजन ही प्रसाद के रूप में खाएं। महिलाएं इस दिन तन और मन से सात्विकता का पूरी तरह से पालन करें।
ये है देवी शीतला की आरती (Devi Sheetala Ki Arti Lyrics in Hindi)
जय शीतला माता, मैया जय शीतला माता ।
आदि ज्योति महारानी, सब फल की दाता ॥
ऊं जय शीतला माता..॥
रतन सिंहासन शोभित, श्वेत छत्र भाता ।
ऋद्धि-सिद्धि चँवर ढुलावें,
जगमग छवि छाता ॥
ऊं जय शीतला माता, मैया जय शीतला माता ।
विष्णु सेवत ठाढ़े, सेवें शिव धाता ।
वेद पुराण वरणत, पार नहीं पाता ॥
ऊं जय शीतला माता, मैया जय शीतला माता ।
इन्द्र मृदङ्ग बजावत, चन्द्र वीणा हाथा ।
सूरज ताल बजावै, नारद मुनि गाता ॥
ऊं जय शीतला माता,
मैया जय शीतला माता ।
घण्टा शङ्ख शहनाई, बाजै मन भाता ।
करै भक्तजन आरती, लखि लखि हर्षाता ॥
ऊं जय शीतला माता,
मैया जय शीतला माता ।
ब्रह्म रूप वरदानी, तुही तीन काल ज्ञाता ।
भक्तन को सुख देती, मातु पिता भ्राता ॥
ऊं जय शीतला माता,
मैया जय शीतला माता ।
जो जन ध्यान लगावे, प्रेम शक्ति पाता ।
सकल मनोरथ पावे, भवनिधि तर जाता ॥
ऊं जय शीतला माता,
मैया जय शीतला माता ।
रोगों से जो पीड़ित कोई, शरण तेरी आता ।
कोढ़ी पावे निर्मल काया, अन्ध नेत्र पाता ॥
ऊं जय शीतला माता,
मैया जय शीतला माता ।
बांझ पुत्र को पावे, दारिद्र कट जाता ।
ताको भजै जो नाहीं, सिर धुनि पछताता ॥
ऊं जय शीतला माता,
मैया जय शीतला माता ।
शीतल करती जननी, तू ही है जग त्राता ।
उत्पत्ति व्याधि बिनाशन, तू सब की घाता ॥
ऊं जय शीतला माता, मैया जय शीतला माता ।
दास विचित्र कर जोड़े, सुन मेरी माता ।
भक्ति आपनी दीजै, और न कुछ भाता ॥
जय शीतला माता,
मैया जय शीतला माता ।
आदि ज्योति महारानी, सब फल की दाता ॥
ऊं जय शीतला माता..॥
Disclaimer
इस आर्टिकल में जो जानकारी है, वो धर्म ग्रंथों, विद्वानों और ज्योतिषियों से ली गईं हैं। हम सिर्फ इस जानकारी को आप तक पहुंचाने का एक माध्यम हैं। यूजर्स इन जानकारियों को सिर्फ सूचना ही मानें।
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