Shiv Chalisa Lyrics In Hindi: सावन में करें शिव चालीसा का पाठ, जानें सही समय, लाभ और जरूरी नियम

Published : Aug 10, 2026, 09:31 AM IST
Shiv Chalisa In Hindi

सार

Shiv chalisa video: भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए अनेक मंत्र व स्तुतियों की रचना की गई है, शिव चालीसा भी इनमें से एक है। शिव चालीसा का पाठ करने से सभी परेशानियां दूर हो सकती हैं।

Shiv Chalisa In Hindi: महादेव का प्रिय महीना सावन इस बार 30 जुलाई से शुरू हो चुका है जो 28 अगस्त तक रहेगा। इस महीने में भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए अनेक उपाय किए जाते हैं। अनेक भक्त इस पवित्र महीने में शिव चालीसा का पाठ कर महादेव की कृपा पाने का प्रयास करते हैं। मान्यता है कि शिव चालीसा का पाठ करने से हमारी सभी परेशानियां दूर हो सकती हैं। आगे सुनें और पढ़ें शिव चालीसा और इससे जुड़ी अन्य खास बातें…

शिव चालीसा (Shiv Chalisa Lyrics In Hindi)

जय गिरिजा पति दीन दयाला। सदा करत सन्तन प्रतिपाला ॥
भाल चन्द्रमा सोहत नीके। कानन कुण्डल नागफनी के ॥
अंग गौर शिर गंग बहाये। मुण्डमाल तन क्षार लगाए ॥
वस्त्र खाल बाघम्बर सोहे। छवि को देखि नाग मन मोहे॥
मैना मातु की हवे दुलारी। बाम अंग सोहत छवि न्यारी॥
कर त्रिशूल सोहत छवि भारी। करत सदा शत्रुन क्षयकारी ॥
नन्दि गणेश सोहै तहँ कैसे। सागर मध्य कमल हैं जैसे ॥
कार्तिक श्याम और गणराऊ। या छवि को कहि जात न काऊ॥
देवन जबहीं जाय पुकारा। तब ही दुख प्रभु आप निवारा॥
किया उपद्रव तारक भारी। देवन सब मिलि तुमहिं जुहारी॥
तुरत षडानन आप पठायउ। लवनिमेष महँ मारि गिरायउ॥
आप जलंधर असुर संहारा। सुयश तुम्हार विदित संसारा॥
त्रिपुरासुर सन युद्ध मचाई। सबहिं कृपा कर लीन बचाई॥
किया तपहिं भागीरथ भारी। पुरब प्रतिज्ञा तासु पुरारी॥
दानिन महँ तुम सम कोउ नाहीं। सेवक स्तुति करत सदाहीं॥
वेद नाम महिमा तव गाई। अकथ अनादि भेद नहिं पाई॥
प्रकटी उदधि मंथन में ज्वाला। जरत सुरासुर भए विहाला॥
कीन्ही दया तहं करी सहाई। नीलकण्ठ तब नाम कहाई॥
पूजन रामचन्द्र जब कीन्हा। जीत के लंक विभीषण दीन्हा॥
सहस कमल में हो रहे धारी। कीन्ह परीक्षा तबहिं पुरारी॥
एक कमल प्रभु राखेउ जोई। कमल नयन पूजन चहं सोई॥
कठिन भक्ति देखी प्रभु शंकर। भए प्रसन्न दिए इच्छित वर॥
जय जय जय अनन्त अविनाशी। करत कृपा सब के घटवासी॥
दुष्ट सकल नित मोहि सतावै। भ्रमत रहौं मोहि चैन न आवै॥
त्राहि त्राहि मैं नाथ पुकारो। येहि अवसर मोहि आन उबारो॥
लै त्रिशूल शत्रुन को मारो। संकट से मोहि आन उबारो॥
मात-पिता भ्राता सब होई। संकट में पूछत नहिं कोई॥
स्वामी एक है आस तुम्हारी। आय हरहु मम संकट भारी॥
धन निर्धन को देत सदा हीं। जो कोई जांचे सो फल पाहीं॥
अस्तुति केहि विधि करैं तुम्हारी। क्षमहु नाथ अब चूक हमारी॥
शंकर हो संकट के नाशन। मंगल कारण विघ्न विनाशन॥
योगी यति मुनि ध्यान लगावैं। शारद नारद शीश नवावैं॥
नमो नमो जय नमः शिवाय। सुर ब्रह्मादिक पार न पाय॥
जो यह पाठ करे मन लाई। ता पर होत है शम्भु सहाई॥
ॠनियां जो कोई हो अधिकारी। पाठ करे सो पावन हारी॥
पुत्र हीन कर इच्छा जोई। निश्चय शिव प्रसाद तेहि होई॥
पण्डित त्रयोदशी को लावे। ध्यान पूर्वक होम करावे॥
त्रयोदशी व्रत करै हमेशा। ताके तन नहीं रहै कलेशा॥
धूप दीप नैवेद्य चढ़ावे। शंकर सम्मुख पाठ सुनावे॥
जन्म जन्म के पाप नसावे। अन्त धाम शिवपुर में पावे॥
कहैं अयोध्यादास आस तुम्हारी। जानि सकल दुःख हरहु हमारी ॥

दोहा

नित्त नेम कर प्रातः ही, पाठ करौं चालीसा।
तुम मेरी मनोकामना, पूर्ण करो जगदीश॥
मगसर छठि हेमन्त ॠतु, संवत चौसठ जान।
अस्तुति चालीसा शिवहि, पूर्ण कीन कल्याण॥

शिव चालीसा किसने लिखी है?

शिव चालीसा का पाठ महादेव को प्रसन्न करने के लिए किया जाता है। इसमें कुल 40 चौपाइयां हैं, इसे संत अयोध्यादासजी ने लिखा है। शिव चालीसा में भगवान शिव की महिमा के बारे में बताया गया है।

क्या रोज शिव चालीसा पढ़ सकते हैं?

हां, शिव चालीसा रोज पढ़ी जा सकती है। लेकिन इसका पाठ करते समय स्वच्छता का खासतौर पर ध्यान रखें यानी स्नान आदि करके साफ वस्त्र पहनकर ही शिव चालीसा का पाठ करें।

कौन-सा समय शिव चालीसा पढ़ने के लिए शुभ है?

वैसे तो शिव चालीसा का पाठ पूरे दिन में कभी भी किया जा सकता है लेकिन ब्रह्म मुहूर्त और प्रदोष काल यानी शाम के समय इसका पाठ करना सबसे अधिक शुभ माना गया है।

रोज शिव चालीसा पढ़ने से क्या लाभ होता है?

विद्वानों की मानें तो प्रतिदिन पूरे विधि-विधान और सच्चे मन से शिव चालीसा का पाठ किया जाए तो महादेव की कृपा से हमारी सभी परेशानियां दूर हो सकती हैं और जीवन में सुख-समृद्धि बनी रहती है।

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