Shivji Ki Aarti Lyrics: ‘ओम जय शिव ओंकारा’, सावन में इस विधि से करें आरती, मिलेगा पूजा का पूरा फल

Published : Jul 30, 2026, 06:30 AM IST
Shivji Ki Aarti Lyrics

सार

Om Jai Shiv Omkara Lyrics: वैसे तो भगवान शिव की अनेक प्रसिद्ध आरती हैं लेकिन इन सभी में सबसे ज्यादा प्रचलित है ‘ओम जय शिव ओंकारा’। इस आरती के बिना शिव पूजा अधूरी लगती है।

Shivji Ki Aarti Om Jai Shiv Omkara: भगवान शिव का प्रिय सावन मास इस बार 30 जुलाई से शुरू हो चुका है जो 28 अगस्त तक रहेगा। इस महीने में शिव पूजा का विशेष महत्व है। पूजा के बाद महादेव की आरती भी जरूर की जाती है। शिवजी की अनेक आरतियों में से एक है ‘ओम जय शिव ओंकारा’, जो सबसे ज्यादा प्रचलित है। शिवजी की आरती की एक खास विधि है। सावन के इस पवित्र महीने में जानें कैसे करें शिवजी की आरती…

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महादेव की आरती कैसे करें?

शिवजी की आरती के लिए सबसे पहले दीपक जलाएं और मूर्ति या चित्र के चरणों में 4 बार, नाभि से 2 बार, चेहरे से 1 बार और 7 बार पूरी मूर्ति पर आरती घुमाएं। शिवलिंग की आरती करनी हो तो भी कुल 14 बार आरती की थाली घुमानी चाहिए। दीपक आरती करने के बाद कर्पूर आरती करें। आरती पूरी होने के बाद थोड़ा का जल छिड़कें। सबसे पहले भगवान और आरती देकर चारों दिशाओं में आरती घुमाएं। इसके बाद अन्य लोगों को आरती दें।

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शिवजी की आरती लिरिक्स हिंदी में (Shivji Ki Aarti Lyrics in Hindi)

ओम जय शिव ओंकारा॥
ब्रह्मा, विष्णु, सदाशिव, अर्द्धांगी धारा॥
ओम जय शिव ओंकारा॥
एकानन चतुरानन, पंचानन राजे।
हंसासन गरूड़ासन, वृषवाहन साजे॥
ओम जय शिव ओंकारा॥
दो भुज चार चतुर्भुज, दसभुज अति सोहे।
त्रिगुण रूप निरखत, त्रिभुवन जन मोहे॥
ओम जय शिव ओंकारा॥
अक्षमाला वनमाला, मुण्डमाला धारी।
त्रिपुरारी कंसारी, कर माला धारी॥
ओम जय शिव ओंकारा॥
श्वेताम्बर पीताम्बर, बाघम्बर अंगे।
सनकादिक गरुणादिक, भूतादिक संगे॥
ओम जय शिव ओंकारा॥
कर के मध्य कमण्डलु, चक्र त्रिशूलधारी।
जगकर्ता जगभर्ता, जगसंहारकर्ता॥
ओम जय शिव ओंकारा॥
ब्रह्मा विष्णु सदाशिव, जानत अविवेका।
प्रणवाक्षर के मध्ये, ये तीनों एका॥
ओम जय शिव ओंकारा॥
पर्वत सोहैं पार्वती, शंकर कैलासा।
भांग धतूरे का भोजन, भस्मी में वासा॥
ओम जय शिव ओंकारा॥
जटा में गंग बहत है, गल मुण्डन माला।
शेष नाग लिपटावत, ओढ़त मृगछाला॥
ओम जय शिव ओंकारा॥
काशी में विराजे विश्वनाथ, नन्दी ब्रह्मचारी।
नित उठि दर्शन पावत, महिमा अति भारी॥
ओम जय शिव ओंकारा॥
त्रिगुणस्वामी जी की आरती, जो कोइ नर गावे।
कहत शिवानंद स्वामी, मनवांछित फल पावे॥
ओम जय शिव ओंकारा॥
स्वामी ओम जय शिव ओंकारा॥

 

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