मौत को भी मात दे सकता है ये मंत्र, इसे बनाने वाले आज भी हैं जिंदा

Published : Jan 06, 2025, 09:29 AM ISTUpdated : Jan 06, 2025, 11:35 AM IST
mantra shiva

सार

Shivji Ke Mantra: हमारे धर्म ग्रंथों में शिवजी के अनेक मंत्रों के बारे में बताया गया है। लेकिन इन सभी में महामृत्युंजय मंत्र का विशेष महत्व है। मान्यता है कि इस मंत्र के जाप से मौत को भी मात दी जा सकती है।  

Mahamrityunjaya Mantra: हिंदू धर्म में मंत्रों की विशेष मान्यता है। अलग-अलग देवताओं को प्रसन्न करने के लिए विभिन्न मंत्रों की रचना की गई है। इन्हीं में से एक मंत्र है महामृत्युंजय। ये मंत्र भगवान शिव से संबंधित है। ऐसी मान्यता है कि इस मंत्र का जाप यदि विधि-विधान से किया जाए तो इसके प्रभाव को मरते हुए व्यक्ति को भी बचाया जा सकता है। खास बात ये भी है इस मंत्र की रचना करने वाले महर्षि मार्कण्डेय अमर हैं। आगे जानिए मंत्र से जुड़ी खास बातें…

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ये है महामृत्युंजय मंत्र

ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्।
उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥

अर्थ- हम भगवान भोलेनाथ की पूजा करते हैं, जो तीन नेत्रों वाले हैं। जो हर सांस में जीवन शक्ति का संचार करते हैं एवं पूरी सृष्टि का पालन-पोषण करते हैं।

ये हैं मंत्र जाप के नियम

1. महामृत्युंजय मंत्र का जाप भगवान शिव की प्रतिमा या तस्वीर के सामने बैठकर करें तो शुभ रहता है।
2. इस मंत्र का जाप अशुद्ध अवस्था में भूलकर भी न करें। यानी स्नान आदि करने के बाद ही करें।
3. मंत्र जाप के लिए रुद्राक्ष की माला का उपयोग करें। अगर स्वयं इसका जाप नहीं कर सकते तो किसी योग्य ब्राह्मण से भी करवा सकते हैं।
4. मंत्र जप के दौरान इधर-उधर की बातों पर ध्यान न लगाएं। मंत्र का उच्चारण शुद्ध रूप से करें।
5. महामृत्युंजय मंत्र का जाप करते समय मुख पूर्व या उत्तर दिशा की ओर हो तो ठीक रहता है।

कौन हैं महर्षि मार्कण्डेय?

ग्रंथों के अनुसार किसी समय मृकंद के नाम के ऋषि थे। उनकी कोई संतान नहीं थी। उन्होंने भगवान शिव को प्रसन्न कर पुत्र होने का वरदान प्राप्त किया। तभ भगवान शिव ने कहा कि ‘तुम्हारे पुत्र की आयु सिर्फ 12 साल होगी।’
शिवजी के वरदान से ऋषि मृकंद के घर पुत्र का जन्म हुआ। इसका नाम मार्कण्डेय रखा। जब ऋषि मार्कण्डेय बड़े हुए तो उनके पिता को उनको एक दिन सब कुछ सच-सच बता दिया। इसके बाद बालक मार्कण्डेय ने भी शिवजी की भक्ति करने लगे।
बालक मार्कण्डेय ने ही महामृत्युंजय मंत्र की रचना की और उसका जाप करने लगे। जब बालक बालक मार्कण्डेय की मृत्यु का समय आया तो उस समय वे भगवान शिव की भक्ति कर रहे थे।
यमराज ने जैसे ही उनके प्राण निकालने के लिए अपना पाश फेंक, उन्होंने शिवलिंग को कसकर पकड़ लिया और जोर-जोर से शिवजी का नाम पुकारने लगे। उसी समय वहां शिवजी प्रकट हुए और उन्होंने यमराज को वहां से चले जाने को कहा। 
साथ ही बालक मार्कण्डेय को अमरता का वरदान भी दिया। इस तरह महामृत्युंजय मंत्र के जाप से बालक मार्कण्डेय अमर हो गए। मान्यता है महर्षि मार्कण्डेय आज भी जीवित हैं।


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