Hanuman Jayanti 2024: हनुमानजी को कलयुग का जीवंत देवता कहा जाता है। देश में हनुमानजी के कईं प्रसिद्ध मंदिर हैं। इन सभी से कोई न कोई मान्यता और परंपरा जुड़ी हुई है। मध्य प्रदेश में भी हनुमानजी के ऐसे ही अजब-गजब मंदिर हैं।
Famous Hanuman Temple of Madhya Pradesh :आपने हनुमानजी के अनेक मंदिरों के बारे में सुना होगा, लेकिन क्या आप जानते हैं मध्य प्रदेश में कुछ मंदिर ऐसे भी हैं जहां हनुमानजी डॉक्टर बनकर मरीजों का इलाज करते हैं तो कहीं जज बनकर फैसला भी सुनाते हैं। सुनने में ये बात अजीब लग सकती है लेकिन ये सच है। इन मंदिरों को दवाई वाले हनुमान और कोर्ट वाले मंदिरों के नाम से जाना जाता है। आज (23 अप्रैल, मंगलवार) हनुमान जयंती के मौके पर जानिए मध्य प्रदेश के ऐसे ही चुनिंदा मंदिरों के बारे में…
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डॉक्टर हनुमान मंदिर, भिंड
मध्य प्रदेश के भिंड में दंदरौआ गांव में है डॉक्टर हनुमान मंदिर। इसे दंदरौआ धाम के नाम से भी जाना जाता है। कहते हैं कि ये मंदिर लगभग 492 साल पुराना है। इस मंदिर में हनुमानजी की नृत्य करती हुई प्रतिमा स्थापित है। यहां सबसे ज्यादा वे लोग आते हैं, जो किसी न किसी बीमारी से पीड़ित होते हैं। मान्यता है कि यहां दर्शन करने मात्र से ही बीमारियां दूर हो जाती हैं, इसलिए इसे डॉक्टर हनुमान मंदिर के नाम से जाना जाता है।
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कोर्ट हनुमान मंदिर, रीवा
मध्य प्रदेश के रीवा में हनुमानजी 3 प्रसिद्ध मंदिर हैं- जिन्हें जिला कोर्ट, हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के नाम से जाना जाता है। यहां हनुमानजी को ही जज के रूप में पूजा जाता है। ये तीनों ही मंदिर लगभग 500 साल पुराने हैं। मान्यता है कि जो लोग किसी कानूनी मामलों में फंसे होते हैं या जिन पर कोई कोर्ट केस चल रहा होता है, वे यहां आकर अर्जी लगाते हैं तो जल्दी ही उनकी परेशानी दूर हो जाती है।
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दवाई वाले हनुमान, सागर
सागर जिले के बीना के कठाई गांव में है दवाई वाले हनुमानजी का मंदिर। ये मंदिर लगभग 150 साल पुराना है। यहां लोगों को हड्डी जोड़ने की दवाई दी जाती है। दूर-दूर से लोग यहां दवाई लेते हैं। मंदिर के मुख्य पुजारी मुलायम सिंह लोधी के अनुसार यहां दवाई देने की शुरूआत उनके दादा ने की थी। जिससे इस मंदिर का नाम दवाई वाले हनुमान पड़ गया।
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परेड वाले हनुमान जी, सागर
सागर के कैंट एरिया में है परेड वाले हनुमानजी का मंदिर। यहां हनुमानजी की पूजा सैनिक के रूप में की जाती है। ये मंदिर लगभग 600 साल पुराना बताया जाता है। कहते हैं कि सेना का एक जवान हनुमान जी का परम भक्त था। वह बार-बार परेड छोड़कर यहां दर्शन करने आ जाता था। एक बार जब कर्नल हाजिरी रजिस्टर का निरीक्षण करने पहुंचे तो वह बहुत डर गया। लेकिन जांच में उस रजिस्टर में सैनिक के दस्तखत पाए गए। तभी से यह परेड हनुमान मंदिर के रूप में जाना जाने लगा।
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तलवार वाले हनुमान, ग्वालियर
आमतौर पर हनुमानजी के हाथ में गदा होती है, लेकिन ग्वालियर के जलालपुर रोड मुरैना हाईवे के पास बने हनुमान मंदिर में स्थापित प्रतिमा में उनके हाथों में तलवार दिखाई देती है, इसलिए इन्हें तलवार वाले हनुमान के नाम से जाना जाता है। मान्यता है कि हनुमानजी ने तलवार से ही अहिरावण का वध किया था, उसी स्वरूप में उनकी ये प्रतिमा यहां स्थापित की गई है। ये मंदिर लगभग 600 साल पुराना बताया जाता है।
Disclaimer : इस आर्टिकल में जो भी जानकारी दी गई है, वो ज्योतिषियों, पंचांग, धर्म ग्रंथों और मान्यताओं पर आधारित हैं। इन जानकारियों को आप तक पहुंचाने का हम सिर्फ एक माध्यम हैं। यूजर्स से निवेदन है कि वो इन जानकारियों को सिर्फ सूचना ही मानें।
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