Holashtak 2024 Date: कब से शुरू होगा होलाष्टक, इसे क्यों मानते हैं अशुभ? जानें इससे जुड़ी हर बात

Published : Mar 11, 2024, 11:13 AM ISTUpdated : Mar 15, 2024, 10:16 AM IST
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सार

Holashtak 2024 Details: ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, होली के पहले आठ दिनों को होलाष्टक कहते हैं। इन 8 दिनों में कोई भी शुभ कार्य जैसे विवाह आदि नहीं की जाती क्योंकि इसे अशुभ समय माना जाता है। जानें इस बार कब से कब तक रहेगा होलाष्टक? 

Kab Se Shuru Hoga Holashtak 2024: ज्योतिष शास्त्र में अशुभ मुहूर्त की मान्यता हजारों साल पुरानी है। होली के पहले के 8 दिनों को होलाष्टक कहा जाता है, इसे भी अशुभ समय माना जाता है। इस दौरान कोई भी शुभ कार्य जैसे विवाह आदि नहीं किए जाते। होलाष्टक से जुड़ी कईं मान्यताएं और परंपराएं भी हमारे समाज में प्रचलित हैं। होलाष्टक पर भी विद्वानों का अलग-अलग मत है। आगे जानिए इस बार होलाष्टक कब से शुरू होगा और क्यों इसे अशुभ समय माना जाता है…

कब से शुरू होगा होलाष्टक 2024? (Holashtak 2024 Start Date)
उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. प्रवीण द्विवेदी के अनुसार, इस बार होलाष्टक 17 मार्च 2024 से शुरू होगा, जो 24 मार्च तक रहेगा। इसके अगले दिन यानी 25 मार्च, सोमवार को धुरेड़ी यानी रंगों से होली उत्सव मनाया जाएगा। होलाष्टक में कोई भी मांगलिक कार्य जैसे विवाह, नामकरण संस्कार, जनेऊ संस्कार, गृह प्रवेश, विवाह, सगाई आदि मांगलिक कार्य नहीं किए जाते।

क्यों होलाष्टक को मानते हैं अशुभ? (Why is Holashtak considered inauspicious)
धर्म ग्रंथों के अनुसार, राक्षसों के राजा हिरण्यकश्यिपु का पुत्र प्रह्लाद भगवान विष्णु का परम भक्त था। हिरण्यकश्यिपु ने उसे कईं बार भक्ति मार्ग से हटने को कहा, लेकिन वह नहीं माना। क्रोध में आकर हिरण्यकश्यिपु ने प्रह्लाद को मारने का निर्णय लिया। हिरण्यकश्यिपु ने प्रह्लाद को मारने के लिए 8 दिन तक लगातार प्रयास किया, लेकिन सफल नहीं हो पाया। इन्हीं 8 दिनों को आज के समय में होलाष्टक कहा जाता है। ज्योतिषियों के अनुसार, होलाष्टक में ग्रहों का स्वभाव उग्र हो जाता है, इसलिए इस दौरान किए गए मांगलिक कामों का शुभ फल नहीं मिल पाता।

होलाष्टक को लेकर ज्योतिषियों में मतभेद
होलाष्टक को लेकर ज्योतिषियों में कईं मतभेद देखने को मिलते हैं। ज्योतिषाचार्य पं. द्विवेदी के अनुसार, होलाष्टक में शुभ कार्य न करने की मान्यता गुजरात, महाराष्ट्र और पंजाब के कुछ हिस्सों में प्रचलित है, जबकि देश के अन्य हिस्सों में इस तरह की कोई मान्यता नहीं है। इसलिए जहां इस तरह की मान्यता है, उन स्थानों को छोड़कर अन्य जगह शुभ कार्य किए जा सकते हैं।


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Disclaimer : इस आर्टिकल में जो भी जानकारी दी गई है, वो ज्योतिषियों, पंचांग, धर्म ग्रंथों और मान्यताओं पर आधारित हैं। इन जानकारियों को आप तक पहुंचाने का हम सिर्फ एक माध्यम हैं। यूजर्स से निवेदन है कि वो इन जानकारियों को सिर्फ सूचना ही मानें।

 

 

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