Jagannath Rath Yatra 2024: क्यों खास है पुरी का ‘अलारनाथ मंदिर’, 15 दिनों तक भगवान जगन्नाथ के रूप में क्यों होती हैं यहां पूजा?

Published : Jun 28, 2024, 09:48 AM ISTUpdated : Jul 10, 2024, 10:20 AM IST
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सार

Jagannath Rath Yatra 2024: उड़ीसा के पुरी में स्थित भगवान जगन्नाथ का मंदिर बहुत ही प्राचीन और प्रसिद्ध है। यहां की परंपराएं भी बहुत ही खास हैं। यहां हर साल आषढ़ मास में भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा निकाली जाती है। 

Interesting facts about Alarnath temple: हर साल की तरह इस बार भी उड़ीसा के पुरी में जगन्नाथ मंदिर से रथयात्रा निकाली जाएगी। इस बार ये रथयात्रा 7 जुलाई से शुरू होगी जो 10 दिनों तक चलेगी। रथयात्रा से पहले की परंपराएं भी काफी खास है। रथयात्रा से 15 दिन पहले भगवान जगन्नाथ को विशेष स्नान करवाया जाता है, जिससे वे बीमार हो जाते हैं। इन 15 दिनों तक भगवान जगन्नाथ को एक विशेष कमरे में रखा जाता है और इनकी इलाज किया जाता है। इस दौरान पुरी में ही स्थित अलारनाथ मंदिर में भक्तों की भीड़ उमड़ने लगती है। आगे जानें क्यों खास है पुरी का अलारनाथ मंदिर…

क्या है अलारनाथ मंदिर की मान्यता?
पुरी में जगन्नाथ मंदिर से लगभग 20 किमी दूर ब्रह्मगिरि नामक स्थान पर अलारनाथ मंदिर है। इस मंदिर में भगवान विष्णु को अलारनाथ के रूप में पूजा जाता है। जब भगवान जगन्नाथ 15 दिनों के लिए बीमार होते हैं और भक्तों को दर्शन नहीं देते, तब भगवान अलारनाथ को ही जगन्नाथ के रूप में पूजा जाता है। इन 15 दिनों में यहां भक्तों की भीड़ उमड़ती है।

भोग का विशेष महत्व
जब भगवान जगन्नाथ 15 दिनों के लिए बीमार हो जाते हैं, तब अलारनाथ मंदिर में भगवान को खीर का भोग विशेष रूप से लगाया जाता है और इसे भक्तों को बांट दिया जाता है। मान्यता है कि इस प्रसाद को खाने के रोगों से मुक्ति मिलती है। मंदिर में स्थापित भगवान विष्णु की प्रतिमा गरुड़ के साथ विराजमान हैं। भगवान की चार भुजाएं हैं। एक हाथ में चक्र, दूसरे में कमल, तीसरे में शंख और चौथा वर मुद्र में है।

भगवान जगन्नाथ का अस्थाई निवास है ये मंदिर
अलारनाथ मंदिर को भगवान जगन्नाथ का अस्थाई निवास माना जाता है। सबसे पहले सोलहवीं शताब्दी में श्री चैतन्य महाप्रभु ने भगवान जगन्नाथ के रूप में यहां भगवान अलारनाथ के दर्शन किए थे। 15 दिनों तक भगवान अलारनाथ की पूजा उसी तरह की जाती, जैसी जगन्नाथ मंदिर में होती है। जगन्नाथ भक्त इन 15 दिनों में कम से कम एक बार ब्रह्मगिरि जाकर भगवान अलारनाथ के दर्शन अवश्य करते हैं।


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