
Upang Lalita Vrat 2026 Date Muhurat: देवी पुराण में 10 महाविद्याओं के बारे में बताया गया है। इन 10 महाविद्याओं में से एक है देवी ललिता। इनका निवास भगवान शिव के ह्रदय में माना गया है। इन्हें लीलावती, लीलामती, ललिताम्बिका, लीलेशी, लीलेश्वरी, ललितागौरी तथा राजराजेश्वरी भी कहते हैं। देवी ललिता ही प्रलय के बाद पुन: सृष्टि का निर्माण करती हैं। शारदीय नवरात्रि की पचंमी तिथि पर देवी स्कंदमाता के साथ देवी ललिता की पूजा भी की जाती है। इसे उपांग ललिता व्रत और ललिता पंचमी के नाम से जाना जाता है। जानें इस बार ये व्रत कब किया जाएगा...
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पंचांग के अनुसार, आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि 14 अक्टूबर, बुधवार की रात 01 बजकर 13 मिनट से 15 अक्टूबर, गुरुवार की रात 03 बजकर 25 मिनिट तक रहेगी। चूंकि पंचमी तिथि का सूर्योदय 15 अक्टूबर को होगा, इसलिए इसी दिन ये व्रत किया जाएगा।
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सुबह 10:46 से दोपहर 12:12 तक
दोपहर 11:49 से 12:35 तक (अभिजीत मुहूर्त)
दोपहर 12:12 से 01:38 तक
दोपहर 01:38 से 03:05 तक
- 15 अक्टूबर, गुरुवार को सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ कपड़े पहनें। हाथ में जल, चावल और फूल लेकर उपांग ललिता व्रत और पूजा का संकल्प लें।
- किसी साफ स्थान पर देवी ललिता की तस्वीर या प्रतिमा स्थापित करें और तिलक लगाकर फूलों की माला पहनाएं। देवी के सामने शुद्ध घी का दीपक जलाएं।
-देवी को लाल वस्त्र, चंदन, रोली, अबीर, गुलाल, चावल, फूल, हल्दी और मेहंदी सहित अन्य पूजन सामग्री अर्पित करें। कमल का फूल विशेष रूप से अर्पित करें।
- देवी को पीले या लाल रंग की मिठाई का भोग लगाएं। साथ ही मौसमी फल भी अर्पित करें। पूजा पूरी होने के बाद देवी ललिता की आरती करें और आशीर्वाद लें।
- पूजा के अंत में देवी को चढ़ाया गया प्रसाद भक्तों में बांट दें। इस तरह पूजा करने से देवी ललिता की कृपा आप पर बनी रहेगी और परिवार भी खुशहाल रहेगा।
श्री मातेश्वरी जय त्रिपुरेश्वरी । राजेश्वरी जय नमो नमः॥
करुणामयी सकल अघ हारिणी । अमृत वर्षिणी नमो नमः॥
जय शरणं वरणं नमो नमः । श्री मातेश्वरी जय त्रिपुरेश्वरी॥
अशुभ विनाशिनी, सब सुख दायिनी। खल-दल नाशिनी नमो नमः॥
भण्डासुर वधकारिणी जय माँ। करुणा कलिते नमो नम:॥
जय शरणं वरणं नमो नमः। श्री मातेश्वरी जय त्रिपुरेश्वरी॥
भव भय हारिणी, कष्ट निवारिणी। शरण गति दो नमो नमः॥
शिव भामिनी साधक मन हारिणी। आदि शक्ति जय नमो नमः॥
जय शरणं वरणं नमो नमः। जय त्रिपुर सुन्दरी नमो नमः॥
श्री मातेश्वरी जय त्रिपुरेश्वरी। राजेश्वरी जय नमो नमः॥
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