Vikata Sankashti Chaturthi Vrat Katha: यहां पढ़ें विकट संकष्टी चतुर्थी की पूरी कथा, इसे सुने बिना नहीं मिलेगा व्रत का पूरा फल

Published : Apr 05, 2026, 08:11 AM IST
Vikata Sankashti Chaturthi Vrat Katha

सार

Vikata Sankashti Chaturthi Vrat Katha In Hindi: इस बार 5 अप्रैल, रविवार को विकट संकष्टी चतुर्थी का व्रत किया जाएगा। धर्म ग्रंथों में इस व्रत का विशेष महत्व बताया गया है। इस व्रत की कथा सुने बिना इसका पूरा फल नहीं मिलता। 

Vikata Sankashti Chaturthi Vrat Katha: धर्म ग्रंथों के अनुसार वैसाख मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को विकट संकष्टी चतुर्थी के नाम से जाना जाता है। ये साल में आने वाली 4 प्रमुख चतुर्थी तिथियों में से एक है। इस बार ये व्रत 5 अप्रैल, रविवार को किया जाएगा। इस चतुर्थी व्रत का महत्व स्वयं भगवान श्रीकृष्ण ने युधिष्ठिर को बताया था। इस व्रत से जुड़ी एक कथा भी है, उसे सुनने के बाद ही इस व्रत का पूरा फल मिलता है। आगे पढ़ें विकट संकष्टी चतुर्थी व्रत की पूरी कथा…

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विकट संकष्टी चतुर्थी व्रत कथा

प्राचीन समय में रन्तिदेव नाम के एक पराक्रमी राजा थे। उनके राज्य में धर्मकेतु नाम का एक ब्राह्मण रहता था, उसकी दो पत्नियां थी-  सुशीला और चंचला। सुशीला धार्मिक प्रवृत्ति की थी, इसलिए वह व्रत उपवास किया करती थी, जिससे उसका शरीर बहुत दुर्बल हो गया था। वहीं चंचला कभी कोई व्रत नहीं करती थी।

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कुछ समय बाद सुशीला ने एक कन्या को और चंचला ने एक पुत्र को जन्म दिया। ऐसा होने पर चंचला सुशीला को ताना देने लगी ‘तूने इतने व्रत-उपवास किए लेकिन फिर भी तुझे कन्या की प्राप्ति हुई और बिना उपवास किए बिना भी मैंने पुत्र को जन्म दिया। ये बात सुनकर सुशीला का मन आहत हो जाता।
सुशीला द्वारा भक्तिपूर्वक गणेशजी के व्रत करने से प्रसन्न होकर एक दिन भगवान गणेश उसके सामने प्रकट होकर बोले ‘तेरी कन्या के मुख से बहुमूल्य रत्न झरने लगेंगे और जल्दी ही मेरे गर्भ से एक शास्त्रवेत्ता पुत्र उत्पन्न होगा।' श्रीगणेश की कृपा से ऐसा ही हुआ लेकिन कुछ समय बात धर्मकेतु की मृत्यु हो गई।
ऐसा होने पर चंचला ने पूरे धन पर अधिकार कर लिया और सुशीला को बाहर निकाल दिया। लेकिन श्रीगणेश की कृपा से सुशीला कुछ ही समय में चंचला से भी अधिक धनवान हो गई, ये देख चंचला उससे ईर्ष्या करने लगी। एक बार जब सुशीला की पुत्री कुएं पर पानी भर रही थी, उसी समय चंचला ने उसे धक्का दे दिया।
लेकिन श्रीगणेश की कृपा से वह बच गई। ये देख चंचला का चंचला का हृदय परिवर्तन हो गया और उसने सुशीला के पास जाकर अपने किए की माफी मांगी। सुशीला के कहने पर चंचला भी भगवान श्रीगणेश का व्रत करने लगी। ऐसा करने से सुशीला और चंचला के बीच प्रेम और आपसी सौहार्द बढ़ने लगा।

 

 

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