Vinayak Chaturthi 2026: कब करें विनायक चतुर्थी व्रत, 17 या 18 जून? जानें मंत्र-मुहूर्त, पूजा विधि सहित हर बात

Published : Jun 16, 2026, 11:59 AM IST
Vinayak Chaturthi June 2026

सार

Vinayak Chaturthi 2026: जून 2026 में विनायक चतुर्थी का व्रत कब किया जाएगा? इस दिन पुष्य नक्षत्र होने से कौन-सा राजयोग बनेगा? ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को किस नाम से जाना जाता है?

Vinayak Chaturthi June 2026: धर्म ग्रंथों के अनुसार हर महीने के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को विनायक चतुर्थी व्रत किया जाता है। इस बार जून 2026 में ज्येष्ठ मास की विनायक चतुर्थी का संयोग बन रहा है। ज्येष्ठ शुक्ल चतुर्थी को प्रद्युम्न चतुर्थी के नाम से भी जाना जाता है। मान्यता है कि इस व्रत को करने से जीवन में खुशहाली बनी रहती है और हर तरह की समस्या का निदान होता है। आगे जानिए जून 2026 में कब करें प्रद्युम्न विनायक चतुर्थी व्रत…

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कब करें प्रद्युम्न विनायक चतुर्थी व्रत 2026?

पंचांग के अनुसार, ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि 17 जून, बुधवार की रात 09 बजकर 38 मिनिट से शुरू होगी जो अगले दिन 18 जून, गुरुवार की शाम 06 बजकर 58 मिनिट तक रहेगी। चूंकि चतुर्थी तिथि का सूर्योदय 18 जून को होगा, इसलिए इसी दिन प्रद्युम्न विनायक चतुर्थी का व्रत किया जाएगा।

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प्रद्युम्न विनायक चतुर्थी 2026 पूजा मुहूर्त

18 जून, गुरुवार को भगवान श्रीगणेश की पूजा का शुभ मुहूर्त सुबह 10 बजकर 58 मिनिट से दोपहर 01 बजकर 46 मिनिट तक रहेगी। यानी पूजा के लिए भक्तों को पूरे 02 घण्टे 48 मिनट का समय मिलेगा। इस दिन पुष्य नक्षत्र होने स गुरु पुष्य नाम का राजयोग भी बनेगा।

इस विधि से करें प्रद्युम्न विनायक चतुर्थी व्रत-पूजा

- 18 जून, गुरुवार की सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि करने के बाद हाथ में जल, चावल और फूल लेकर व्रत-पूजा का संकल्प लें। दिन भर व्रत के नियमों का पालन करें।
- मुहूर्त शुरू होने पर श्रीगणेश की प्रतिमा घर में साफ स्थान पर स्थापित करें। सबसे पहले कुंकुम से तिलक करें, फूलों की माला पहनाएं और शुद्ध घी का दीपक जलाएं।
- अबीर, गुलाल, कुंकुम, चावल, इत्र, सुपारी, जनेऊ, दूर्वा आदि चीजें एक-एक करके श्रीगणेश को अर्पित करें। साथ ही ऊं गं गणपतयै नम: मंत्र का जाप मन में करते रहें।
- भगवान श्रीगणेश को भोग लगाएं और आरती करें। शाम को चंद्रमा उदय होने पर जल से अर्घ्य दें और फूल-चावल, कुमकुम आदि से पूजा करें। प्रसाद खा कर व्रत पूर्ण करें।
- इसके बाद भोजन करें। इस विधि से चतुर्थी व्रत करने से घर में सुख-समृद्धि और शांति बनी रहती है। इस व्रत का महत्व अनेक धर्म ग्रंथों में भी बताया गया है।


Disclaimer
इस आर्टिकल में जो जानकारी है, वो धर्म ग्रंथों, विद्वानों और ज्योतिषियों से ली गईं हैं। हम सिर्फ इस जानकारी को आप तक पहुंचाने का एक माध्यम हैं। यूजर्स इन जानकारियों को सिर्फ सूचना ही मानें।

 

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