
वैसे तो, क्रिकेट के इतिहास में अब तक एक से बढ़कर एक धांसू गेंदबाजों ने अपना जलवा दिखाया है, लेकिन यहां हम आपको उन 5 सबसे खूंखार गेंदबाज से मिलाएंगे, जिनके क्रीज पर आते हैं सामने खड़े बल्लेबाजों के पांव का कांपने लगते थे। इनके जैसा बॉलर अब शायद ही विश्व क्रिकेट को मिल पाएगा। इनका मैदान पर एक अलग ही रुतबा रहता था। आइए बिना देर किए सभी के बारे में जानते हैं।
4 जून 1993 को ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड के बीच वनडे मुकाबला खेला जा रहा था। इंग्लैंड बल्लेबाजी कर रहा था, तभी उनके सामने शेन वॉर्न गेंद लेकर आते हैं। उनके सामने अनुभवी बल्लेबाज माइक गैटिंग खड़े थे। वॉर्न गेंद डालते हैं और माइक को लगता है कि वह पीछे से निकल जाएगी, लेकिन गेंद सीधे स्टांप पर जाकर लगती है और सभी क्रिकेट फैंस हैरान रह जाते हैं। कमेंटेटर तक बोला यह कैसे हो सकता है? यह गेंद बॉल ऑफ द सेंचुरी बनी। वॉर्न में दिखाया, कि एक बॉलर कैसे अपना जादू चला सकता है। उन्होंने बताया कि लीजेंड क्या होता है। उनके जाने के बाद ऑस्ट्रेलिया में ही नहीं, बल्कि दुनिया में ऐसा स्पिनर नहीं आया।
जब गेंद पिच पर गिरती और हवा में कटती थी, तब फैंस को या पता चल जाता था, कि सामने वसीम अकरम आ चुके हैं। वह सिर्फ एक गेंदबाज नहीं थे, बल्कि रिवर्स स्विंग के जादूगर थे। नई गेंद से स्विंग और पुरानी गेंद से ऐसी रिवर्स स्विंग डालते थे, कि सामने खड़े बल्लेबाजों की पैरों तले जमीन खिसक जाती थी। उनका लेफ्ट आर्म एक्शन और लाजवाब गति विपक्ष के लिए डर पैदा करती थी। टेस्ट में 414 और वनडे में 502 विकेट इस बात का एक बड़ा उदाहरण है, कि वह किस लेवल के गेंदबाज रहे हैं। उन्हें स्विंग ऑफ सुल्तान भी कहा जाता है।
जब भी भारतीय गेंदबाजी का जिक्र होता है, तो एक नाम सबसे ऊपर आता है और वो अनिल कुंबले हैं। उनकी गेंद ज्यादा स्पिन नहीं होती थी और ना ही वह बल्लेबाजों को कभी स्लेज करते थे। वह चुपचाप आते, विकेट लेते और निकल जाते थे। जितनी शांति उनकी आंखों में दिखती थी, उतना ही तूफान उनकी गेंद में होता था। उन्होंने टेस्ट में 619 विकेट लिए, जिसका रिकॉर्ड आज तक किसी भी भारतीय नहीं तोड़ा। वनडे में 337 विकेट चटकाए। 1999 में पाकिस्तान के खिलाफ एक ही पारी में 10 विकेट झटके , जो उनके लिए बहुत बड़ा यादगार लम्हा आ रहा है। वो हर पिच पर विकेट ले सकते थे। उनके रिटायरमेंट के बाद जडेजा और अश्विन जैसे अच्छे गेंदबाज आए, लेकिन कुंबले जैसा धैर्य और बाहर जाकर विकेट लेने वाली क्षमता किसी में नहीं दिखी।
जेम्स एंडरसन एक ऐसा नाम, जिसने दुनिया को दिखाया कि स्विंग गेंदबाजी आज भी कितनी खतरनाक होती है। तेज गेंदबाजी में जहां रफ्तार को सबकुछ माना जाता है, वहां एंडरसन ने कला से खेल जीता। नई गेंद से हो बल्लेबाजों को ऐसे फंसाते थे कि उन्हें पता ही नहीं चलता था, गेंद बाहर जाएगी या अंदर आएगी। यही एंडरसन की सबसे बड़ी ताकत थी। क्रिकेट में उन्होंने 707 विकेट लिए, किसी भी तेज गेंदबाज के लिए एक सपना होता है। यह सिर्फ आंकड़े नहीं है, उसे बात का सबूत है जो उन्होंने दो दशकों तक अपनी कंसिस्टेंसी से कायम रखी। उन्होंने कई बार इंग्लैंड को ऐसे मौके पर विकेट दिलाए, जब टीम को लगा की मैच हाथ से निकल गया है। सीम, स्विंग और रिवर्स स्विंग जैसी कंडीशन में गेंद को नचाना जानते थे।
अगर किसी तेज गेंदबाजी को चेहरे में डालना होता, तो वह चेहरा डेल स्टेन का रहता। उनकी चीते जैसी रफ्तार और बाघ जैसा अग्रेशन बल्लेबाजों के हौसले तोड़ने वाला रहता था। स्टेन एक गेंदबाज नहीं, बल्कि बल्लेबाजों के लिए खौफ का दूसरा नाम थे। वह गेंदबाज कम और किसी शिकार पर निकले शिकारी की तरह लगते थे। तेज गति के साथ अंदर आई हुई गेंद उनकी सबसे बड़ी ताकत थी। उन्होंने टेस्ट में 439 विकेट लिए। लगभग हर जगह उन्होंने तेज गेंदबाजी से अपनी छाप छोड़ी। 2010 से 2015 का दौर उनके नाम था, जिसमें बल्लेबाज उनका नाम सुनते ही डिफेंसिव हो जाते थे। उनके जाने के बाद रबाडा और एनरिक नार्किया जैसे तेज गेंदबाज आए, लेकिन अग्रेशन और जोश उनकी तरह नहीं दिखा।