दुनिया के वो 5 खूंखार फिनिशर्स, जिनके मैदान में आते ही कांपते थे गेंदबाज; न्यूजीलैंड से 1 नाम

Published : Jan 10, 2026, 09:53 PM IST

Top 5 Dangerous Finishers in Cricket: क्रिकेट के मैदान पर ओपनर्स शुरुआत दिलाते हैं बॉलर्स विकेट लेते हैं, लेकिन असली कहानी तब लिखी जाती है, जब ग्राउंड पर फिनिशर आते हैं। उनके सामने प्रेशर, आखिरी ओवर और जीत के बोझ होता है। 

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5 खतरनाक फिनिशर्स

वैसे तो, क्रिकेट फैंस को सबसे ज्यादा ध्यान ओपनर्स और गेंदबाजों पर रहता है, लेकिन असली माहौल फिनिशर्स बनाते हैं। अंतिम के ओवर्स में दबाव, फिनिशिंग और जीत में बल्लेबाजों की असली परिक्षा होती है। इसी बीच यहां हम आपको उन 5 सबसे खूंखार फिनिशरों के बारे में जानकारी देने जा रहे हैं, जिन्होंने बल्ले से धमाल मचाया है। इनके जैसा अब विश्व क्रिकेट को मिलना आसान नहीं है।

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माइकल बेवन (ऑस्ट्रेलिया)

क्रिकेट के मैदान पर जब बेस्ट फिनिशर का नाम लिया जाता है, तो सबसे पहले ऑस्ट्रेलिया के माइकल बेवन आते हैं। वो एक तूफानी बल्लेबाज नहीं थे, लेकिन उनके पास वो था, जो किसी दिग्गज के पास भी नहीं होता। धैर्य, समझदारी और अंत तक खड़े रहना उनकी ताकत है। 253 वनडे में 53 की अधिक की औसत से रन बनाए हैं। उन्होंने ऐसे दौर में रन बनाए, जब 40 की औसत अच्छी मानी जाती थी। आज ऑस्ट्रेलिया के पास बड़े नाम हैं, लेकिन बेवन जैसा क्लासिक फिनिशर नहीं मिला।

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लांस क्लूजनर (दक्षिण अफ्रीका)

90 के दशक में दक्षिण अफ्रीका की टीम सबसे खूंखार दिखती है, उसमें एक बड़ा श्रेय बाएं हाथ के बल्लेबाज लांस क्लूजनर को जाता है। 1999 वर्ल्ड कप में प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट बने। 8 पारियों में 122 की स्ट्राइक रेट से 281 रन बना दिए। लेकिन, किस्मत उनका साथ छोड़ दिया। सेमीफाइनल में उनका रन आउट टीम को नुकसान कर गया। उनके जाने के बाद दक्षिण अफ्रीका को तगड़ा फिनिशर नहीं मिला।

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अर्जुन राणातुंगा (श्रीलंका)

जब दुनिया श्रीलंका को छोटी टीम मानती थी, तब एक कप्तान लड़ता था और मैदान के बाहर भी धमाल मचाता था, उनका नाम अर्जुन राणातुंगा था। उनकी फिटनेस सवालों के घेरे में रहते थे, लेकिन इरादे फौलादी थे। 1996 में एक ऐसी टीम को चैंपियन बनाया, जिसकी उम्मीद किसी ने नहीं की थी। दबाव में धैर्य और समझदारी के खेल ने श्रीलंका की तस्वीर बदल दी। वो खेल को पढ़ते थे और वही करते थे, जो टीम के काम आए। आज श्रीलंका के पास कई टैलेंट हैं, लेकिन अर्जुन जैसा नहीं मिला।

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इयोन मॉर्गन (इंग्लैंड)

2015 वर्ल्ड कप में इंग्लैंड की टीम की हालात खराब थी और ग्रुप स्टेज में बाहर हो गई। क्रिकेट का जन्मदाता इंग्लैंड बोर्ड को कहा जाता है, लेकिन लिमिटेड ओवर में खुद पिछड़ गई। उसी समय कप्तानी इयोन मॉर्गन को दी गई और उन्होंने टीम की सोच ही बदल डाली। उन्होंने अगली बार ही 2019 में इंग्लैंड को विश्व चैंपियन बना दिया। वो इंग्लिश क्रिकेट के रिवॉल्यूशन के जनक थे। इंग्लैंड ने कई कप्तान देखे, लेकिन मॉर्गन जैसा तेज, चालक और आक्रामक नहीं मिला।

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रॉस टेलर (न्यूजीलैंड)

जब न्यूजीलैंड की टीम को अंडरडॉग माना जाता था, तब एक ऐसा खिलाड़ी उभरकर सामने आया, जिसने टीम की हालात और जज्बात बदल दी, उनका नाम रॉस टेलर था। कई बार इन्हें केन विलियमसन की छाया कहा जाता था, लेकिन असल में ये न्यूजीलैंड की वो दीवार थे, जब टीम मुश्किल में होती थी, तब वो अकेले मैच निकालकर ले जाते थे। उन्होंने सिर्फ मैच खत्म नहीं किए, बल्कि असंभव वाले मैचों में भी जान फूंक दी। वो ज्यादा चर्चा में नहीं रहे, लेकिन टीम को जब जरूरत होती थी, तब टेलर खड़े होते थे। आज कीवी के पास कई टैलेंटेड खिलाड़ी हैं, लेकिन इनके जैसा कंसिस्टेंट नहीं मिला।

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