जब शर्मिला ने पहली बार शॉट पुट फेंका, तब उनका थ्रो सिर्फ 5 मीटर था। लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। लगातार मेहनत और प्रैक्टिस के दम पर एक साल के भीतर उन्होंने राष्ट्रीय चैंपियनशिप जीती और 7.40 मीटर का नया नेशनल रिकॉर्ड भी बनाया। साल 2026 में शर्मिला ने दुबई इंटरनेशनल पैरा एथलेटिक्स चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल जीता। इसके बाद कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में गोल्ड जीतकर उन्होंने इतिहास रच दिया। शर्मिला धनकर की कहानी यह साबित करती है कि अगर हौसला मजबूत हो, तो कोई भी मुश्किल इंसान को उसकी मंजिल तक पहुंचने से नहीं रोक सकती।
बता दें कि F57 कैटेगरी उन खिलाड़ियों के लिए होती है, जिनके पैरों में दिव्यांगता, अंगों की कमी या मांसपेशियों की कमजोरी होती है। इस वर्ग के खिलाड़ी एक खास कुर्सी पर बैठकर शॉट पुट, डिस्कस थ्रो और जैवलिन थ्रो जैसी प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेते हैं।
शर्मिला धनकर को लेकर सबसे ज्यादा सर्च किए जाने वाले सवाल
1. शर्मिला धनकर कौन हैं?
शर्मिला धनकर हरियाणा की पैरा एथलीट हैं, जिन्होंने कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में महिला शॉट पुट F57 में गोल्ड मेडल जीता।
2. शर्मिला धनकर किस बीमारी से प्रभावित थीं?
बचपन में पोलियो होने के कारण उनके बाएं पैर की मांसपेशियां कमजोर हो गई थीं।
3. शर्मिला धनकर ने कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में कौन-सा इतिहास रचा?
वह कॉमनवेल्थ गेम्स में पैरा एथलेटिक्स में गोल्ड मेडल जीतने वाली पहली भारतीय खिलाड़ी बनीं।