'भूरा बाल साफ करो...' बिहार चुनाव 2025 में तेजस्वी यादव के लोगों को क्यों याद आया 1996 का नारा?

Published : Sep 20, 2025, 12:36 PM IST
Tejashwi Yadav

सार

बिहार में 1996 का विवादित 'भूरा बाल साफ करो' नारा फिर उभरा है। राजद नेताओं के बयान तेजस्वी यादव के A to Z एजेंडे के विपरीत हैं और 90% बनाम 10% की जातीय राजनीति को बढ़ावा दे रहे हैं, जिससे पार्टी के भीतर हलचल है।

तीन दशक पुराने विवाद ने एक बार फिर बिहार की राजनीति को हिला दिया है। 1996 में तत्कालीन मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव से जुड़े “भूरा बाल साफ करो” नारे की गूंज अब राजद के नेताओं के बयान में सुनाई दे रही है। राजद विधायक मुन्ना यादव ने हाल ही में कहा, “यहाँ शर्मा, मिश्रा का कुछ नहीं होगा, भूरा बाल साफ करना होगा।” इसके अलावा सीनियर नेता अशोक महतो ने भी तंज कसते हुए कहा, “90 फीसदी पर 10 फीसदी कभी हावी नहीं हो सकते, और 10 फीसदी यह तय नहीं करेंगे कि मुख्यमंत्री कौन होगा।”

तेजस्वी का A to Z एजेंडा, नेता बोले B to Z

तेजस्वी यादव ने पार्टी को सर्वसमावेशी और जातियों से ऊपर उठाने का एजेंडा दिया था। यानी A to Z, लेकिन उनके विधायक और नेता इस A to Z की पार्टी को B to Z वाली राजनीति की याद दिला रहे हैं। पुराने विवादित नारे ने पार्टी के भीतर अनुशासन और संदेश को धुंधला कर दिया है।

बिहार की जाति गणित: 90-10 का खेल

बिहार में अति पिछड़ा वर्ग 27.12%, अत्यंत पिछड़ा 36.01%, अनुसूचित जाति 19.65%, अनुसूचित जनजाति 1.68% और सवर्ण 15.52% हैं। राजद के विवादित बयान ने यह साफ कर दिया कि जातीय ध्रुवीकरण फिर से चुनावी मुद्दा बन सकता है।

भाजपा की सख्त टिप्पणी

भाजपा प्रवक्ता प्रभाकर मिश्रा ने कहा, “1996 का ज़हर आज भी राजद के नेताओं से निकल रहा है। तेजस्वी ने खुद को A to Z पार्टी बताया, लेकिन उनके विधायक वही पुराना ज़हर उगल रहे हैं।”

पार्टी के भीतर हलचल 

राजद के नेता फिलहाल चुप हैं। निंदा कोई नहीं, बल्कि भूरा बाल साफ करने वाले नारे से पार्टी के भीतर हलचल बढ़ गई है। तेजस्वी यादव को अब यह दिखाना होगा कि A to Z का एजेंडा सिर्फ पोस्टर और स्लोगन तक सीमित नहीं है।

वोटर का असली मज़ाक या राजनीति?

1996 का नारा अब सिर्फ पुरानी याद नहीं है। यह बिहार की जातीय राजनीति और चुनावी रणनीति की एक झलक है। अगर पार्टी के भीतर यह विवाद बढ़ा तो वोटर भ्रमित हो सकते हैं और 2025 का चुनाव सिर्फ नेता की लोकप्रियता या गठबंधन की ताकत का नहीं, बल्कि पार्टी के अनुशासन का भी परीक्षण बन जाएगा।

सवाल अभी भी बरकरार

तो सवाल वही है: क्या तेजस्वी यादव अपने A to Z एजेंडे को कायम रख पाएंगे, या “भूरा बाल साफ करो” का पुराना विवाद 2025 की राजनीति में फिर भूचाल ला देगा? बिहार की सियासी गलियारों में अब सबकी नजर इस पर टिकी है।

क्या है 'भूरा बाल साफ करो'

'भूरा बाल साफ करो' एक विवादित राजनीतिक नारा है जिसका संबंध 1990 के दशक की बिहार की राजनीति से है। इस नारे में 'भू' से भूमिहार, 'रा' से राजपूत, 'बा' से ब्राह्मण और 'ला' से लाला (कायस्थ) जातियों का जिक्र है। यह नारा उन जातियों को लक्षित करता है जिन्हें बिहार में सवर्ण जाति के रूप में माना जाता है। यह नारा उस समय के तत्कालीन मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव के दौर से जुड़ा है, जब उनकी पार्टी राष्ट्रीय जनता दल (राजद) की पिछड़ा वर्ग और दलित-मुस्लिम गठबंधन की राजनीति चरम पर थी। इस नारे का उद्देश्य माना जाता है कि इन प्रमुख सवर्ण जातियों को सत्ता और प्रभाव से दूर रखना था। हालांकि, लालू प्रसाद यादव और राजद पार्टी ने इस तरह के नारे देने से लगातार इनकार किया है और इसे सामाजिक तनाव बढ़ाने वाला बताया है। हालांकि, यह नारा 1996 के आसपास काफी राजनीतिक विवादों का कारण बना और आज भी बिहार की राजनीति में इस नारे का उल्लेख विवाद पैदा करता है।

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