
बिहार की राजनीति में वह सुबह आखिरकार लौट आई, जब नीतीश कुमार की JDU ने यह साबित कर दिया कि राजनीति में गिरावट और उभार दोनों क्षणिक होते हैं, पर जनविश्वास ही असली पूंजी है। 2020 के चुनाव में लगभग आधी सीटों तक सिमट चुकी JDU ने 2025 में एक ऐसी वापसी की है जिसे राजनीतिक विश्लेषक बिहार की हाल की सबसे महत्वपूर्ण वापसी मान रहे हैं। पार्टी ने इस बार 85 सीटों पर जीत दर्ज कर NDA के जनादेश को निर्णायक रूप दे दिया है।
इस जीत ने बिहार की सियासत के समीकरण न केवल बदल दिए हैं, बल्कि JDU की संगठनात्मक ताकत, कैंडिडेट चयन और लगातार प्रचार रणनीति को भी जनता ने खुलकर स्वीकार किया है। यह नतीजा दिखाता है कि बिहार के कई हिस्सों में नीतीश कुमार की ‘काम की राजनीति’ की पकड़ अभी भी बेहद मजबूत है।
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NDA ने इस बार 202 सीटों के साथ बिहार में एक मजबूत और स्थिर सरकार का रास्ता साफ कर दिया है। JDU की 85 सीटों की जीत गठबंधन की मजबूती और संतुलन दोनों को बनाए रखती है। माना जा रहा है कि आने वाले वर्षों में सड़क, स्वास्थ्य, एजुकेशन और ग्रामीण इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे मुद्दों पर तेज़ी देखी जा सकती है।
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