JDU का बड़ा एक्शन: पूर्व मंत्री-विधायक सहित 11 नेता पार्टी से OUT, फिर बच गया एक दिग्गज

Published : Oct 26, 2025, 02:31 PM IST
cm nitish kumar

सार

बिहार चुनाव 2025 से पहले JDU ने पार्टी विरोधी गतिविधियों के लिए 11 नेताओं को निष्कासित कर दिया है। ये नेता निर्दलीय चुनाव लड़ने की तैयारी में थे। हालांकि, नीतीश कुमार के प्रति वफादारी दिखाने वाले गोपाल मंडल पर कोई कार्रवाई नहीं हुई।

पटनाः बिहार विधानसभा चुनाव 2025 से ठीक पहले जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) ने पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप में कड़ा कदम उठाते हुए 11 नेताओं को पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से निष्कासित कर दिया है। जिन लोगों पर यह गाज गिरी है, उनमें कई अनुभवी और बड़े चेहरे शामिल हैं, जैसे पूर्व मंत्री शैलेश कुमार, पूर्व विधान पार्षद संजय प्रसाद, और पूर्व विधायक श्याम बहादुर सिंह।

पार्टी ने स्पष्ट किया कि ये नेता आगामी विधानसभा चुनाव के दौरान पार्टी की विचारधारा के विरुद्ध काम कर रहे थे और निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव मैदान में उतरकर पार्टी उम्मीदवारों के लिए मुश्किलें खड़ी कर रहे थे। जेडीयू आलाकमान ने इस कार्रवाई के जरिए अनुशासनहीनता बर्दाश्त न करने का स्पष्ट संदेश दिया है।

जेडीयू ने किन 11 नेताओं को किया बाहर

निष्कासित किए गए 11 नेताओं में कई बड़े और अनुभवी नाम शामिल हैं, जिनका अपने-अपने क्षेत्रों में अच्छा खासा जनाधार रहा है। लेकिन पार्टी का मानना है कि टिकट न मिलने से नाराज इन नेताओं ने निर्दलीय चुनाव लड़ने या पार्टी के आधिकारिक उम्मीदवारों का विरोध करने का फैसला किया था।

  1. शैलेश कुमार (पूर्व मंत्री)
  2. संजय प्रसाद (पूर्व विधान पार्षद)
  3. श्याम बहादुर सिंह (पूर्व विधायक)
  4. रणविजय सिंह (पूर्व विधान पार्षद)
  5. सुदर्शन कुमार (पूर्व विधायक)
  6. अमर कुमार सिंह (पूर्व विधायक)
  7. आस्मां परवीन (पिछले चुनाव में महुआ सीट से प्रत्याशी)
  8. लव कुमार
  9. आशा सुमन
  10. दिव्यांशु भारद्वाज
  11. विवेक शुक्ला

गोपाल मंडल को क्यों मिली 'माफी'?

जेडीयू की इस सामूहिक निष्कासन की कार्रवाई में सबसे बड़ी चर्चा का विषय गोपालपुर के विधायक गोपाल मंडल का नाम न होना है। जबकि गोपाल मंडल भी उन नेताओं में शामिल हैं जिनका टिकट कट गया था और जिन्होंने निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में नामांकन दाखिल किया है।

गोपाल मंडल ने टिकट न मिलने पर सीधे तौर पर जेडीयू के सीनियर नेताओं पर गंभीर आरोप लगाए थे, जिसमें उन्होंने पिछड़ी जाति के नेताओं को आगे न बढ़ने देने का आरोप लगाया था। इसके बावजूद, उनका निष्कासित न होना राजनीतिक गलियारों में नीतीश कुमार की 'सॉफ्ट कॉर्नर' को दर्शाता है।

क्या 'नीतीश प्रेम' आया काम?

गोपाल मंडल ने टिकट कटने के बाद भी अपने बयानों में एक खास सावधानी बरती। उन्होंने भले ही पार्टी के सीनियर नेताओं की आलोचना की हो, लेकिन नीतीश कुमार के खिलाफ कभी कोई टिप्पणी नहीं की। इसके विपरीत, उन्होंने बार-बार यह दावा किया कि अगर वह चुनाव जीतते हैं तो भी वह नीतीश कुमार का ही समर्थन करेंगे और उनके काम की तारीफ करते रहे।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अन्य निष्कासित नेताओं ने जहां नीतीश कुमार के स्वास्थ्य और पार्टी के खात्मे की बात कहकर सीधी बगावत की, वहीं गोपाल मंडल ने केवल 'निर्दलीय' लड़ने का फैसला किया, लेकिन नीतीश कुमार के प्रति अपनी वफादारी बनाए रखी। यही वजह है कि 11 नेताओं पर गाज गिरने के बावजूद, गोपाल मंडल के खिलाफ पार्टी नेतृत्व ने नरमी बरती है।

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