मोबाइल-इंटरनेट से दुनिया तक पहुंचेगी छत्तीसगढ़ की लोककला, राज्यपाल रमेन डेका ने बताया कैसे

Asianet News   | ANI
Published : Oct 14, 2026, 01:31 PM IST
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सार

छत्तीसगढ़ राज्यपाल रमेन डेका खैरागढ़ संगीत विवि के 70वें स्थापना दिवस में शामिल हुए। उन्होंने छत्तीसगढ़ की लोककलाओं को डिजिटल माध्यमों से वैश्विक पहचान दिलाने पर जोर दिया। साथ ही छात्रों से कला को आजीविका से जोड़ने का आग्रह किया।

रायपुर, 14 अक्टूबर 2026। छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोककलाओं को देश-दुनिया तक पहुंचाने के लिए डिजिटल माध्यमों का इस्तेमाल किया जाना चाहिए। मोबाइल, इंटरनेट और सोशल मीडिया की मदद से प्रदेश की पारंपरिक कला और संस्कृति को वैश्विक पहचान दिलाई जा सकती है। यह बात राज्यपाल एवं खैरागढ़ संगीत विश्वविद्यालय के कुलाधिपति रमेन डेका ने कही। वह राजकुमारी इंदिरा सिंह कला संगीत विश्वविद्यालय के 70वें स्थापना दिवस समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए।

राज्यपाल ने कहा कि छत्तीसगढ़ की पहचान यहां की समृद्ध लोककलाओं और सांस्कृतिक परंपराओं से है। पंडवानी, पंथी, राउत नाचा, सुवा नृत्य, कर्मा और बस्तर की जनजातीय नृत्य परंपराओं को डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए दुनिया के सामने लाने की जरूरत है।

70 साल की यात्रा में विद्यार्थियों और शिक्षकों का योगदान

राज्यपाल रमेन डेका ने विश्वविद्यालय की 70 वर्षों की गौरवशाली यात्रा की सराहना की। उन्होंने कहा कि किसी भी शिक्षण संस्थान की सफलता विद्यार्थियों, शिक्षकों और कर्मचारियों के सामूहिक प्रयासों से मिलती है। विश्वविद्यालय ने कला और संगीत के क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बनाई है।

उन्होंने विश्वविद्यालय की स्थापना में दानवीर राजा वीरेंद्र बहादुर सिंह और रानी पद्मावती के योगदान को भी याद किया। दोनों ने अपनी पुत्री राजकुमारी इंदिरा सिंह की स्मृति में विश्वविद्यालय की स्थापना के लिए महत्वपूर्ण योगदान दिया था।

कला में सफलता के लिए अभ्यास और समर्पण जरूरी

राज्यपाल ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि कला के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए केवल प्रतिभा होना पर्याप्त नहीं है। इसके लिए धैर्य, नियमित अभ्यास और समर्पण भी जरूरी है। संगीत मन को शांति देता है, जबकि नृत्य, चित्रकला और शिल्प समाज के इतिहास और संस्कृति को दर्शाते हैं।

उन्होंने विद्यार्थियों से अपनी कला को आजीविका और व्यवसाय से जोड़ने की संभावनाएं तलाशने का भी आह्वान किया। उनके अनुसार, डिजिटल माध्यमों के इस्तेमाल से कलाकारों को अपनी प्रतिभा दिखाने और नए अवसर हासिल करने में मदद मिल सकती है।

सांसद संतोष पांडे ने राजपरिवार के योगदान को सराहा

समारोह में सांसद संतोष पांडे ने राजा वीरेंद्र बहादुर सिंह और रानी पद्मावती के योगदान को अनुकरणीय बताया। उन्होंने कहा कि राजपरिवार की दूरदर्शी सोच और दान ने खैरागढ़ को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने में अहम भूमिका निभाई है।

उन्होंने शिक्षा, कला-कौशल, मेहनत और राष्ट्रीयता की भावना को मजबूत करने पर भी जोर दिया।

समारोह में शामिल हुए जनप्रतिनिधि और विद्यार्थी

कार्यक्रम की शुरुआत विश्वविद्यालय की कुलपति डॉ. लवली शर्मा के स्वागत भाषण से हुई। समारोह में राजपरिवार की सदस्य राजकुमारी शताक्षी सिंह, सांसद प्रतिनिधि भागवत शरण सिंह, प्रभारी कुलसचिव आर. वेंकट रमण गुड़े, जिला प्रशासन के अधिकारी, जनप्रतिनिधि, प्राध्यापक, विद्यार्थी और अन्य गणमान्य नागरिक मौजूद रहे।

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