
रायपुर। खीरे की व्यावसायिक खेती कम समय में अधिक मुनाफा देने वाली फसलों में गिनी जाती है। इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि बुवाई के केवल 45 से 50 दिनों के भीतर फसल तुड़ाई के लिए तैयार हो जाती है। यदि खेती आधुनिक तकनीकों के साथ की जाए तो किसानों को बेहतर उत्पादन के साथ बाजार में भी अच्छी कीमत मिलती है।
विशेषज्ञों के अनुसार व्यावसायिक खेती में खीरे की बेलों को जमीन पर फैलाने के बजाय मचान और तारों की सहायता से ऊपर चढ़ाना अधिक लाभदायक होता है। इससे फल मिट्टी के संपर्क में नहीं आते, जिससे सड़न की संभावना कम रहती है। साथ ही फल का आकार, रंग और चमक बेहतर होती है, जिसके कारण बाजार में अच्छी मांग और बेहतर दाम मिलते हैं। मचान पद्धति अपनाने पर एक एकड़ में लगभग 30 से 45 क्विंटल तक उत्पादन प्राप्त किया जा सकता है।
छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले के नगरी विकासखंड स्थित ग्राम सेलबहरा के विशेष पिछड़ी जनजाति (कमार समुदाय) के किसान खीमांशु गजेसिंग ने आधुनिक खेती अपनाकर सफलता की नई कहानी लिखी है। सीमित संसाधनों और पारंपरिक खेती के बावजूद उन्होंने वैज्ञानिक तकनीकों और सरकारी योजनाओं का लाभ उठाकर खेती को लाभकारी व्यवसाय में बदल दिया है। आज वे क्षेत्र के अन्य किसानों के लिए प्रेरणा बन चुके हैं।
खीमांशु गजेसिंग के पास कुल 10 एकड़ कृषि भूमि है। इस वर्ष उन्होंने अपनी 4 एकड़ जमीन पर व्यावसायिक रूप से खीरे की खेती की। उद्यानिकी विभाग के अधिकारियों के नियमित मार्गदर्शन और तकनीकी सहयोग से उन्होंने गुणवत्तापूर्ण बीजों का चयन, संतुलित पोषण प्रबंधन, आधुनिक सिंचाई प्रणाली और वैज्ञानिक पौध संरक्षण तकनीकों को अपनाया। इन उपायों से उनकी फसल की गुणवत्ता और उत्पादन दोनों में उल्लेखनीय वृद्धि हुई।
खीमांशु गजेसिंग बताते हैं कि पहले पारंपरिक खेती के कारण खेती की लागत निकालना भी मुश्किल हो जाता था और आमदनी काफी सीमित थी। लेकिन आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाने के बाद उनकी खेती पूरी तरह बदल गई। वैज्ञानिक पद्धति से तैयार खीरे की गुणवत्ता बेहतर होने के कारण स्थानीय बाजारों के अलावा आसपास के क्षेत्रों में भी इसकी मांग लगातार बढ़ी। अच्छी कीमत मिलने से उनकी आय में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई और परिवार की आर्थिक स्थिति पहले से कहीं अधिक मजबूत हुई है।
खीमांशु गजेसिंग का कहना है कि उद्यानिकी विभाग के अधिकारियों की तकनीकी सलाह और विभिन्न शासकीय योजनाओं का लाभ मिलने से उन्हें खेती को नए दृष्टिकोण से समझने का अवसर मिला। सही मार्गदर्शन ने उन्हें आधुनिक खेती अपनाने के लिए प्रेरित किया, जिसका परिणाम आज सभी के सामने है।
अपनी सफलता से उत्साहित खीमांशु गजेसिंग अब भविष्य में अन्य उद्यानिकी फसलों का भी विस्तार करना चाहते हैं। उनका लक्ष्य आधुनिक कृषि तकनीकों का अधिक से अधिक उपयोग करके उत्पादन और आय दोनों बढ़ाना है।
उद्यानिकी विभाग लगातार किसानों को आधुनिक खेती की तकनीकों से जोड़ने, वैज्ञानिक खेती को बढ़ावा देने और उनकी आय बढ़ाने के लिए काम कर रहा है। विभाग का उद्देश्य किसानों को आत्मनिर्भर बनाना और खेती को अधिक लाभकारी व्यवसाय के रूप में विकसित करना है। खीमांशु गजेसिंग की सफलता यह साबित करती है कि यदि किसान वैज्ञानिक तकनीकों, विभागीय मार्गदर्शन और सरकारी योजनाओं का सही तरीके से लाभ उठाएं तो खेती को टिकाऊ, आधुनिक और अधिक मुनाफे वाला व्यवसाय बनाया जा सकता है।
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