Chhattisgarh News: विष्णुभोग चावल से बदली गांवों की तस्वीर, महिला समूहों ने रचा नया इतिहास

Published : Jul 06, 2026, 08:21 PM IST
Chhattisgarh GPM Vishnu Bhog rice

सार

गौरेला-पेंड्रा-मरवाही का विष्णुभोग चावल अब जिले की नई पहचान बन रहा है। महिला स्व-सहायता समूहों की मेहनत से किसानों की आय बढ़ रही है और स्थानीय उत्पादों को नई पहचान मिल रही है।

रायपुर। गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले की पारंपरिक कृषि विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा माने जाने वाला विष्णुभोग चावल अब जिले की एक विशिष्ट पहचान के रूप में तेजी से उभर रहा है। यह चावल न केवल अपनी प्राकृतिक सुगंध और बेहतरीन गुणवत्ता के लिए प्रसिद्ध है, बल्कि ग्रामीण महिलाओं की मेहनत, किसानों के समर्पण और आत्मनिर्भर ग्रामीण अर्थव्यवस्था का भी प्रतीक बन चुका है।

जिले के दौरे पर पहुंचे कौशल विकास, तकनीकी शिक्षा एवं रोजगार तथा अनुसूचित जाति विकास मंत्री श्री गुरु खुशवंत साहेब का कलेक्टर डॉ. संतोष कुमार देवांगन ने जिले के प्रसिद्ध विष्णुभोग चावल का पैकेट भेंट कर स्वागत किया। यह सम्मान केवल एक कृषि उत्पाद का नहीं, बल्कि जिले की समृद्ध कृषि परंपरा और स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देने की दिशा में किए जा रहे प्रयासों का भी प्रतीक रहा।

NRLM Bihan: महिला स्व-सहायता समूह संभाल रहे उत्पादन से विपणन तक की जिम्मेदारी

इस अवसर पर कलेक्टर डॉ. संतोष कुमार देवांगन ने मंत्री श्री गुरु खुशवंत साहेब को जानकारी दी कि राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान) के तहत जिले के महिला स्व-सहायता समूह विष्णुभोग चावल का उत्पादन, प्रसंस्करण, पैकेजिंग और विपणन पूरी जिम्मेदारी के साथ कर रहे हैं।

उन्होंने बताया कि अपनी पारंपरिक खुशबू, उत्कृष्ट गुणवत्ता और खास स्वाद के कारण विष्णुभोग चावल की मांग लगातार बढ़ रही है। इसकी लोकप्रियता अब प्रदेश की सीमाओं से बाहर भी पहुंच रही है। इससे एक ओर महिला समूहों को नियमित रोजगार और आय का स्रोत मिला है, वहीं दूसरी ओर स्थानीय किसानों को भी अपनी उपज का बेहतर बाजार उपलब्ध हो रहा है।

Guru Khushwant Saheb: स्थानीय उत्पादों की ब्रांडिंग बढ़ाने पर दिया जोर

मंत्री श्री गुरु खुशवंत साहेब ने विष्णुभोग चावल की सराहना करते हुए कहा कि यह उत्पाद गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले की समृद्ध कृषि संस्कृति और महिला स्व-सहायता समूहों की मेहनत का उत्कृष्ट उदाहरण है। उन्होंने कहा कि स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देना केवल आर्थिक गतिविधियों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह किसी क्षेत्र की पहचान को राष्ट्रीय स्तर पर स्थापित करने का प्रभावी माध्यम भी बनता है। उन्होंने सुझाव दिया कि ऐसे उत्पादों की ब्रांडिंग और विपणन को और मजबूत किया जाए, ताकि किसानों और महिला समूहों की आय में लगातार वृद्धि हो सके तथा जिले की विशिष्ट पहचान देशभर में और मजबूत बने।

Haribhoomi INH के प्रधान संपादक डॉ. हिमांशु द्विवेदी को भी किया सम्मानित

कार्यक्रम के दौरान कलेक्टर डॉ. संतोष कुमार देवांगन ने हरिभूमि एवं आईएनएच के प्रधान संपादक डॉ. हिमांशु द्विवेदी को भी जिले के प्रसिद्ध विष्णुभोग चावल का पैकेट भेंट कर सम्मानित किया। इस दौरान उन्होंने जिले की विशेष कृषि उपज, महिला स्व-सहायता समूहों द्वारा संचालित आजीविका गतिविधियों और स्थानीय उत्पादों को प्रोत्साहित करने के लिए प्रशासन की ओर से किए जा रहे प्रयासों की विस्तृत जानकारी भी साझा की।

Vishnu Bhog Rice GPM: किसानों, महिलाओं और प्रशासन के संयुक्त प्रयासों का परिणाम

गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले में विष्णुभोग चावल को नई पहचान दिलाने की यह पहल किसानों, महिला स्व-सहायता समूहों और जिला प्रशासन के साझा प्रयासों का परिणाम है। यह अभियान ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने, महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने और जिले की पारंपरिक कृषि विरासत को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

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