Chhattisgarh News: हाथीदांत तस्करी नेटवर्क पर वन विभाग का बड़ा वार

Published : Aug 04, 2026, 07:19 PM IST
Chhattisgarh illegal ivory trade accused arrested

सार

बलरामपुर-रामानुजगंज में वन विभाग की संयुक्त कार्रवाई में हाथीदांत तस्करी का खुलासा हुआ। तीन आरोपी गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेजे गए।

रायपुर। छत्तीसगढ़ में वन्यजीव तस्करी और संगठित वन अपराधों पर अंकुश लगाने के लिए वन विभाग लगातार अभियान चला रहा है। इसी कड़ी में बलरामपुर-रामानुजगंज जिले में हाथीदांत की तस्करी से जुड़े एक मामले का खुलासा हुआ है। संयुक्त कार्रवाई के दौरान तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया गया, जिन्हें बाद में न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया। वन मंत्री केदार कश्यप के निर्देशन में वन विभाग द्वारा वन्यजीव अपराधों पर निगरानी बढ़ाई गई है और तस्करी से जुड़े मामलों में सख्त कार्रवाई की जा रही है।

मुखबिर की सूचना पर धर्मशाला में हुई छापेमारी

वन मंडलाधिकारी आलोक वाजपेयी के मार्गदर्शन में 3 अगस्त 2026 को एक अहम कार्रवाई की गई। मुखबिर से मिली सूचना के आधार पर वन्यजीव अपराध नियंत्रण ब्यूरो (मध्य क्षेत्र, भोपाल), राज्य उड़न दस्ता रायपुर और वनमंडल बलरामपुर की संयुक्त टीम ने रामानुजगंज स्थित एक धर्मशाला में दबिश दी। टीम ने सूचना के आधार पर धर्मशाला के एक कमरे की जांच की, जहां संदिग्ध गतिविधियों की जानकारी मिली थी।

कमरे से बरामद हुए हाथी के तीन दांत

जांच के दौरान संयुक्त टीम ने आमंत्रण धर्मशाला के कमरा नंबर 205 की तलाशी ली। तलाशी के दौरान एक बैग से हाथी के जबड़े से जुड़े तीन हाथीदांत बरामद किए गए। मौके पर मौजूद तीन संदिग्ध व्यक्तियों से पूछताछ की गई। संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर उन्हें तत्काल हिरासत में लिया गया और आगे की कार्रवाई शुरू की गई।

झारखंड और छत्तीसगढ़ के तीन आरोपी गिरफ्तार

गिरफ्तार किए गए आरोपियों में झारखंड के पलामू जिले निवासी संतोष कुमार विश्वकर्मा (42 वर्ष) तथा बलरामपुर-रामानुजगंज जिले के अजय कुमार गुप्ता (49 वर्ष) और सतेन्द्र कुमार (50 वर्ष) शामिल हैं। वन विभाग ने आरोपियों के कब्जे से बरामद हाथीदांत को जब्त कर लिया है और मामले से जुड़े अन्य पहलुओं की भी जांच शुरू कर दी है।

वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत दर्ज हुआ मामला

वन अधिकारियों के अनुसार आरोपियों के खिलाफ वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है। भारतीय जंगली हाथी कानून के तहत अनुसूची-1 में शामिल संरक्षित वन्यजीव है। ऐसे में हाथीदांत की खरीद-फरोख्त, परिवहन या तस्करी को गंभीर अपराध माना जाता है और इसके लिए कड़े कानूनी प्रावधान लागू होते हैं।

अदालत में पेशी के बाद न्यायिक हिरासत

वन विभाग ने जब्त किए गए हाथीदांत को अपने कब्जे में लेकर तीनों आरोपियों को मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, रामानुजगंज की अदालत में पेश किया। सुनवाई के बाद अदालत ने सभी आरोपियों को न्यायिक हिरासत में जेल भेजने का आदेश दिया।

तस्करी नेटवर्क की जांच जारी

वन परिक्षेत्राधिकारी, रामानुजगंज ने बताया कि मामले की विस्तृत जांच अभी जारी है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि हाथीदांत की तस्करी

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