Chhattisgarh News: उदंती-सीतानदी में बाघिन की एंट्री, लौट रहे जंगल के सुनहरे दिन

Published : Jun 24, 2026, 06:22 PM IST
udanti sitanadi tiger reserve tigress spotted

सार

उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व में कैमरा ट्रैप में बाघिन की मौजूदगी दर्ज हुई है। इसे वन्यजीव संरक्षण और आवास सुधार की बड़ी सफलता माना जा रहा है।

रायपुर। छत्तीसगढ़ के उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व से वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण और उत्साहजनक खबर सामने आई है। हाल ही में रिजर्व के विभिन्न हिस्सों में लगाए गए कैमरा ट्रैप में एक बाघिन की तस्वीरें और वीडियो लगातार रिकॉर्ड हुए हैं। वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि यह बाघिन प्राकृतिक रूप से विचरण करते हुए इस क्षेत्र तक पहुंची है और अब यहां स्थायी रूप से बसने की दिशा में आगे बढ़ती दिखाई दे रही है।

वन्यजीव संरक्षण प्रयासों का दिखा सकारात्मक असर

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व और वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री श्री केदार कश्यप के मार्गदर्शन में राज्य में वन्यजीव संरक्षण और संवर्धन के लिए लगातार कई प्रभावी कदम उठाए जा रहे हैं। उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व में बाघिन की उपस्थिति को इन प्रयासों की बड़ी सफलता के रूप में देखा जा रहा है। वन विभाग ने पिछले कुछ वर्षों में वन्यजीवों के लिए सुरक्षित और अनुकूल वातावरण तैयार करने पर विशेष ध्यान दिया है। अब बाघिन की मौजूदगी इन संरक्षण कार्यों के सकारात्मक परिणामों को दर्शा रही है।

बेहतर आवास और सुरक्षित वातावरण का मिला प्रमाण

वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार किसी भी बाघ या बाघिन का किसी वन क्षेत्र को अपना निवास क्षेत्र चुनना इस बात का संकेत होता है कि वहां पर्याप्त शिकार उपलब्ध है, आवास अनुकूल है और सुरक्षा व्यवस्था बेहतर है। लंबे समय से बाघों की वापसी की प्रतीक्षा कर रहे उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व के लिए यह एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है। बाघिन की नियमित उपस्थिति यह संकेत देती है कि पूरे वन क्षेत्र में पारिस्थितिकी तंत्र मजबूत हो रहा है और संरक्षण प्रयास सही दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।

कैमरा ट्रैप में स्वस्थ और सक्रिय नजर आई बाघिन

वन अधिकारियों के अनुसार कैमरा ट्रैप में कैद तस्वीरों और वीडियो में बाघिन पूरी तरह स्वस्थ और सक्रिय दिखाई दे रही है। उसकी गतिविधियों से यह स्पष्ट होता है कि वह क्षेत्र का निरीक्षण कर रही है और अपना प्रभाव क्षेत्र स्थापित करने की प्रक्रिया में है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि वर्तमान परिस्थितियां अनुकूल बनी रहीं तो आने वाले समय में यह क्षेत्र एक बार फिर बाघों की स्थायी मौजूदगी का केंद्र बन सकता है।

आवास सुधार और एंटी-पोचिंग अभियान का मिला लाभ

पिछले कुछ वर्षों के दौरान उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व में आवास सुधार और वन्यजीव संरक्षण के लिए व्यापक स्तर पर कार्य किए गए हैं। इनमें सघन गश्त, एंटी-पोचिंग नेटवर्क को मजबूत करना, सैकड़ों कृत्रिम जलस्रोत और झिरियों का निर्माण, क्षतिग्रस्त वन क्षेत्रों का पुनर्विकास तथा अतिक्रमण हटाकर वनभूमि की पुनर्प्राप्ति जैसे महत्वपूर्ण कदम शामिल हैं। वन विभाग का मानना है कि बाघिन की मौजूदगी इन्हीं प्रयासों का प्रत्यक्ष और सकारात्मक परिणाम है।

मध्य भारत के प्रमुख टाइगर हब बनने की बढ़ी संभावना

कैमरा ट्रैप में मिले प्रमाणों ने वन अधिकारियों, पर्यावरणविदों और वन्यजीव प्रेमियों में नई ऊर्जा का संचार किया है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि बाघिन यहां स्थायी रूप से बसती है तो उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व मध्य भारत के प्रमुख बाघ आवासों में फिर से अपनी पहचान स्थापित कर सकता है। इसके साथ ही भविष्य में अन्य बाघों के आगमन की संभावनाएं भी मजबूत होंगी, जिससे पूरे क्षेत्र का जैव विविधता संतुलन और अधिक सशक्त होगा।

बाघिन की सुरक्षा के लिए बढ़ेगी निगरानी

वन विभाग ने बाघिन की सुरक्षा और उसके लिए अनुकूल वातावरण बनाए रखने के उद्देश्य से निगरानी और संरक्षण गतिविधियों को और मजबूत करने का निर्णय लिया है। अधिकारियों का कहना है कि यह केवल एक बाघिन की मौजूदगी भर नहीं है, बल्कि यह जंगलों के पुनर्जीवन, बेहतर संरक्षण प्रबंधन और प्रकृति की सकारात्मक प्रतिक्रिया का प्रतीक है। उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व में बाघिन की यह दस्तक आने वाले समय में वन्यजीव संरक्षण की दिशा में एक नए अध्याय की शुरुआत साबित हो सकती है।

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