
रायपुर। छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा स्थित जिला विज्ञान केंद्र को उस समय खास पहचान मिली, जब भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के वरिष्ठ वैज्ञानिक प्रोफेसर आनंद और उनकी विशेषज्ञ टीम ने केंद्र का दौरा किया। इस दौरान वैज्ञानिकों ने विज्ञान केंद्र में संचालित विभिन्न शैक्षणिक और वैज्ञानिक गतिविधियों का अवलोकन किया और वहां की व्यवस्थाओं को करीब से समझा।
दौरे के दौरान इसरो की टीम ने विज्ञान केंद्र में बच्चों और युवाओं के लिए तैयार किए गए विज्ञान आधारित मॉडलों, प्रयोगों और गतिविधियों में विशेष रुचि दिखाई। उन्होंने कहा कि दूरस्थ और जनजातीय क्षेत्रों में विज्ञान को लोकप्रिय बनाने के ऐसे प्रयास भविष्य के वैज्ञानिकों और नवाचारकर्ताओं को तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
विज्ञान केंद्र भ्रमण के दौरान इसरो की टीम ने स्पेस गैलरी, फिजिक्स गैलरी और माइनिंग गैलरी का अवलोकन किया। इसके अलावा विभिन्न विज्ञान प्रदर्शनों, कार्यशील मॉडलों (वर्किंग मॉडल्स) और विद्यार्थियों के लिए संचालित ‘करके सीखें’ गतिविधियों को भी देखा। वैज्ञानिकों ने इन गतिविधियों को बच्चों के लिए विज्ञान को आसान और रोचक बनाने की दिशा में एक प्रभावी प्रयास बताया। उनका मानना है कि जब बच्चे प्रयोगों के माध्यम से सीखते हैं तो उनकी समझ और रुचि दोनों बढ़ती हैं।
इसरो के वैज्ञानिकों ने विशेष रूप से इस बात की प्रशंसा की कि दंतेवाड़ा जैसे सुदूर जनजातीय क्षेत्र में बच्चों को विज्ञान से जोड़ने के लिए जिला प्रशासन और विज्ञान केंद्र लगातार काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि विज्ञान केंद्र केवल जानकारी देने तक सीमित नहीं है, बल्कि बच्चों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करने का काम भी कर रहा है। ऐसे प्रयास ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों के विद्यार्थियों को नई संभावनाओं से जोड़ते हैं।
दौरे के दौरान वैज्ञानिकों ने विज्ञान केंद्र में नियमित रूप से आयोजित होने वाली शैक्षणिक गतिविधियों की भी जानकारी ली। ‘करके सीखें’ कार्यक्रम, विज्ञान प्रयोग, इंटरैक्टिव मॉडल्स और विद्यार्थियों की सहभागिता पर आधारित गतिविधियों को उन्होंने काफी उपयोगी बताया। उनका कहना था कि इस तरह की गतिविधियां बच्चों को किताबों से आगे बढ़कर विज्ञान को व्यवहारिक रूप में समझने का अवसर देती हैं।
इसरो टीम ने विज्ञान केंद्र में आयोजित होने वाली ‘कबाड़ से जुगाड़’ विज्ञान गतिविधियों और खगोल विज्ञान आधारित डॉक्यूमेंट्री प्रदर्शनों की भी सराहना की। वैज्ञानिकों के अनुसार, ऐसे कार्यक्रम बच्चों में जिज्ञासा पैदा करते हैं और उन्हें विज्ञान, अंतरिक्ष अनुसंधान तथा नवाचार के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करते हैं। इससे विद्यार्थियों को नई तकनीकों और वैज्ञानिक अवधारणाओं को समझने का बेहतर अवसर मिलता है।
इसरो के वैज्ञानिकों ने विज्ञान केंद्र के प्रमुख उपेंद्र गौतम और उनकी टीम द्वारा किए जा रहे कार्यों की भी प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि सीमित संसाधनों के बावजूद विज्ञान केंद्र जिस तरह बच्चों तक विज्ञान पहुंचाने का काम कर रहा है, वह सराहनीय है। भ्रमण के अंत में विज्ञान केंद्र प्रबंधन ने इसरो की टीम का आभार व्यक्त किया। इस विशेष दौरे से विज्ञान केंद्र के विद्यार्थियों, शिक्षकों और विज्ञान में रुचि रखने वाले युवाओं के बीच उत्साह का माहौल देखने को मिला। कई विद्यार्थियों ने इसरो वैज्ञानिकों से बातचीत कर अंतरिक्ष विज्ञान और शोध से जुड़ी जानकारी भी प्राप्त की।
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