
रायपुर। छत्तीसगढ़ के उप मुख्यमंत्री और लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री श्री अरुण साव ने कहा है कि जल जीवन मिशन के तहत बनाई गई ग्रामीण पाइपलाइन जल आपूर्ति योजनाओं को लंबे समय तक सफल बनाए रखने के लिए जल संरक्षण और वर्षा जल संचयन बेहद जरूरी है। उनका कहना है कि यदि बारिश के पानी को सहेजा जाए और भूजल स्रोतों को लगातार रिचार्ज किया जाए, तभी भविष्य में जल उपलब्धता बनी रह सकेगी।
श्री साव नवा रायपुर स्थित राजीव गांधी राष्ट्रीय भूमि जल प्रशिक्षण एवं अनुसंधान संस्थान (RGNGWTRI) में आयोजित राज्य स्तरीय कार्यशाला को संबोधित कर रहे थे। यह कार्यशाला जल जीवन मिशन के तहत हर घर जल प्रमाणित गांवों की महिला सरपंचों के लिए आयोजित की गई थी।
कार्यशाला के दौरान उप मुख्यमंत्री ने महिला सरपंचों से सीधे संवाद किया। उन्होंने जानना चाहा कि गांवों में हर घर तक नल से पानी पहुंचने के बाद लोगों के जीवन में क्या बदलाव आए हैं, विशेषकर महिलाओं को इससे किस तरह राहत मिली है। उन्होंने पंचायतों द्वारा नल जल योजनाओं के संचालन और रखरखाव के लिए बनाई गई व्यवस्थाओं की भी जानकारी ली। साथ ही जल स्रोतों की स्थिति, पानी की गुणवत्ता की नियमित जांच और रखरखाव शुल्क संग्रह की व्यवस्था पर भी चर्चा की।
लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग ने यूनिसेफ और एसीई (Action for Community Development) संस्था के सहयोग से इस एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया था, जिसमें प्रदेशभर से करीब 100 महिला सरपंच शामिल हुईं।
कार्यशाला में हर घर जल प्रमाणित गांवों में संचालित नल जल योजनाओं के संचालन, रखरखाव और मरम्मत से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की गई। महिला सरपंचों ने अपनी पंचायतों के अनुभव साझा करते हुए बताया कि किस तरह जल जीवन मिशन के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल व्यवस्था बेहतर हुई है। इस दौरान कई सफल मॉडल और बेस्ट प्रैक्टिसेस भी सामने आए, जिनसे अन्य पंचायतें सीख ले सकती हैं। विशेषज्ञों ने महिला सरपंचों को योजनाओं के दीर्घकालीन और निर्बाध संचालन के लिए जरूरी तकनीकी और प्रबंधन संबंधी सुझाव भी दिए।
उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने कहा कि किसी भी जल आपूर्ति योजना की असली सफलता उसके टिकाऊपन पर निर्भर करती है। यदि जल स्रोत सुरक्षित और पर्याप्त रहेंगे, तभी योजनाएं लंबे समय तक प्रभावी ढंग से चल सकेंगी। उन्होंने कहा कि नल जल योजनाओं का निर्माण पूरा होने और पंचायतों को हस्तांतरित होने के बाद उनकी जिम्मेदारी ग्राम पंचायतों की होती है। इसलिए गांवों को अपनी जल व्यवस्था को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में काम करना होगा।
श्री साव ने भूजल स्तर बनाए रखने के लिए स्टॉप डैम निर्माण, वर्षा जल संग्रहण और जल संरक्षण गतिविधियों को बढ़ावा देने की आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा कि गांवों में बारिश के पानी के प्राकृतिक बहाव में आने वाले अवरोधों और अतिक्रमणों को हटाकर तालाबों को भरने की व्यवस्था सुनिश्चित की जानी चाहिए।
उप मुख्यमंत्री ने कहा कि जल जीवन मिशन केवल सरकारी योजना नहीं है, बल्कि यह गांव और ग्रामीण परिवारों की जरूरतों से जुड़ा अभियान है। इसकी सफलता तभी संभव है जब पंचायतें और ग्रामीण मिलकर जल स्रोतों के संरक्षण और जल आपूर्ति व्यवस्था के संचालन में सक्रिय भागीदारी निभाएं। उन्होंने महिला सरपंचों से कहा कि वे अपने गांवों में जल संरक्षण को जन आंदोलन का रूप दें ताकि आने वाली पीढ़ियों के लिए भी पर्याप्त जल उपलब्ध रह सके।
कार्यशाला में लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के सचिव श्री मोहम्मद कैसर अब्दुलहक, राजीव गांधी राष्ट्रीय भूमि जल प्रशिक्षण एवं अनुसंधान संस्थान की निदेशक सुश्री रूबी मुखर्जी और यूनिसेफ की जल एवं स्वच्छता विशेषज्ञ सुश्री श्वेता पटनायक ने भी अपने विचार साझा किए। इस अवसर पर लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के प्रमुख अभियंता श्री के.के. मरकाम और अधीक्षण अभियंता श्री समीर गौड़ सहित विभाग के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे।
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