Khelo India Tribal Games 2026: चोटिल कंधे के बावजूद पूनम ऑरन ने जीता गोल्ड, 9 साल के संघर्ष के बाद बनीं चैंपियन

Published : Mar 31, 2026, 04:19 PM IST
Khelo India Tribal Games 2026 Raipur jharkhand wrestler Poonam Uraon won gold

सार

झारखंड की पहलवान पूनम ऑरन ने चोटिल कंधे के बावजूद खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स 2026 में स्वर्ण पदक जीता। नौ साल के संघर्ष, चोट और कठिन हालात के बाद उन्होंने शानदार वापसी कर गोल्ड अपने नाम किया।

रायपुर। कुश्ती जैसे कठिन खेल में जहां ताकत और फिटनेस सबसे जरूरी होती है, वहां चोट के साथ मुकाबला करना बेहद चुनौतीपूर्ण होता है। लेकिन झारखंड की 19 वर्षीय पहलवान पूनम ऑरन ने इस चुनौती को स्वीकार किया और शानदार प्रदर्शन करते हुए खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स 2026 में स्वर्ण पदक जीत लिया।

फाइनल मुकाबले में दर्द के बावजूद शानदार जीत

फाइनल मुकाबले में पूनम अपने बाएं कंधे पर पट्टी बांधकर उतरीं। हर मूव के दौरान दर्द साफ नजर आ रहा था, लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी। उन्होंने महिलाओं की 50 किलोग्राम वर्ग में तेलंगाना की के. गीता को हराकर गोल्ड मेडल अपने नाम किया।

'नौ साल से हार नहीं मानी, अब कैसे मानती'- पूनम ऑरन

स्वर्ण पदक जीतने के बाद पूनम ने साई मीडिया से कहा,

मैं हार कैसे मान लेती सर? जब नौ साल से हार नहीं मानी, तो अब कैसे मानती। यह चोट काफी पुरानी है। छह साल पहले मेरा कंधा उतर गया था। बीच में ठीक हुआ, लेकिन ट्रेनिंग के दौरान फिर चोट लग गई। इसके बावजूद मैंने वापसी की और अब गोल्ड जीत लिया। करियर की शुरुआत से ही मैं चोटों से जूझ रही हूं, लेकिन कभी हार नहीं मानी। यह गोल्ड मेडल मेरे लिए सपने के सच होने जैसा है। नौ साल तक गोल्ड न जीत पाने का दर्द, इस चोट से कहीं ज्यादा बड़ा था।

संघर्ष भरी शुरुआत: चोट के कारण एक साल तक मैट से दूर

झारखंड के चतरा जिले के सुइयाबार गांव की रहने वाली पूनम के लिए यह जीत बेहद खास है। साल 2017 में कुश्ती शुरू करने के साथ ही उन्हें गंभीर चोट लगी, जिसके कारण वह करीब एक साल तक मैट से दूर रहीं। वापसी के बाद उन्होंने 2018 और 2019 में स्कूल गेम्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (SGFI) में कांस्य पदक जीते, लेकिन इसके बाद लंबे समय तक उन्हें कोई पदक नहीं मिला।

परिवार ने रोका, कोच ने दिया साथ

पूनम ने बताया कि इस प्रतियोगिता से पहले भी वह पूरी तरह फिट नहीं थीं। उन्होंने कहा,

घर वाले मुझे खेलने से मना कर रहे थे, लेकिन मेरे कोच और सपोर्ट स्टाफ को मुझ पर भरोसा था। उनके सहयोग से ही मैं खेल पाई और गोल्ड जीत सकी।

उन्होंने आगे कहा कि छह साल बाद पदक जीतना उनके लिए बेहद खास है और यह उनकी मजबूत इच्छाशक्ति का परिणाम है।

ऑरन समुदाय से जुड़ी पूनम के लिए खास उपलब्धि

ऑरन समुदाय से आने वाली पूनम के लिए यह स्वर्ण पदक एक बड़ी उपलब्धि है। उन्होंने कहा, “इस गोल्ड के लिए मुझे काफी लंबा इंतजार करना पड़ा। शुरुआत से ही चोटों से जूझती रही, लेकिन कभी हार नहीं मानी। यह जीत मेरे लिए सपने के सच होने जैसी है।”

पढ़ाई और खेल दोनों में संतुलन

पूनम सिर्फ खेल में ही नहीं, बल्कि पढ़ाई में भी आगे हैं। वह रांची यूनिवर्सिटी से बीए (पॉलिटिकल साइंस) की पढ़ाई कर रही हैं और पिछले करीब 10 साल से रांची के हॉस्टल में रहकर अभ्यास कर रही हैं।

अब जूनियर नेशनल्स पर नजर

अब पूनम का अगला लक्ष्य जूनियर नेशनल ट्रायल्स के लिए क्वालीफाई करना है। उन्होंने कहा,

मैं इस सफलता को आगे भी जारी रखना चाहती हूं और जूनियर नेशनल्स में बेहतर प्रदर्शन करना मेरा लक्ष्य है।

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