
रायपुर। 'जब हालात मुश्किल होते हैं, तो मजबूत लोग आगे बढ़ते हैं'- यह कहावत असम की महिला पहलवान देबी डायमारी पर बिल्कुल सही बैठती है। उन्होंने अपनी मेहनत और हौसले के दम पर खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स में महिलाओं के 62 किलोग्राम वर्ग में रजत पदक जीतकर अपनी पहचान बनाई।
देबी डायमारी असम के गोलाघाट जिले के सिसुपानी स्थित दिनेशपुर गांव की रहने वाली हैं। महज 7 साल की उम्र में उन्होंने अपने माता-पिता को खो दिया था। इसके बाद वह अपने चाचा-चाची के साथ रहने लगीं। आर्थिक तंगी के बावजूद उन्होंने अपने सपनों को नहीं छोड़ा और लगातार मेहनत करती रहीं।
देबी बताती हैं कि उन्होंने 2022 में गोलाघाट जिले के बोकाखात स्थित काजीरंगा के पास खेलो इंडिया सेंटर में कुश्ती शुरू की। ट्रेनिंग के लिए उन्हें सेंटर के पास कमरा लेना पड़ा, लेकिन किराया देने के लिए उनके पास पैसे नहीं थे। इसलिए उन्होंने पार्ट-टाइम नौकरी की।
पहले उन्होंने ईजी बाजार स्टोर में 2500 रुपये मासिक वेतन पर काम किया। इसके बाद 2023 में काजीरंगा के बोन विला रिसॉर्ट में लगभग 7000 रुपये महीने की नौकरी की, जहां वह स्वीमिंग पूल की देखभाल और सफाई करती थीं। पूरे दिन काम करने के बाद वह शाम को केवल दो घंटे ही प्रैक्टिस कर पाती थीं।
देबी कहती हैं कि उनकी मेहनत का ही परिणाम है कि उन्हें यह रजत पदक मिला। हालांकि वह इससे पूरी तरह संतुष्ट नहीं हैं और अब उनका लक्ष्य गोल्ड मेडल जीतना है। इसके लिए वह और ज्यादा मेहनत करने को तैयार हैं।
शुरुआत में देबी पॉवरलिफ्टिंग और आर्म रेसलिंग करती थीं। लेकिन 2022 में उनकी मुलाकात असम टीम के कोच अनुस्तूप नाराह से हुई। उन्होंने ही देबी को कुश्ती अपनाने की सलाह दी और उन्हें ट्रेनिंग दी। कोच ने उनके लिए नौकरी और साइकिल की व्यवस्था भी करवाई, जिससे वह काम और प्रैक्टिस दोनों कर सकें। देबी रोज साइकिल से काम पर जाती थीं और फिर सेंटर में अभ्यास करती थीं।
देबी ने 2022 में ही सीनियर चैंपियनशिप के लिए क्वालीफाई कर लिया था। इसके बाद 2024 में उन्होंने स्टेट चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीतकर अपनी प्रतिभा साबित की। उनकी मेहनत लगातार रंग ला रही है।
देबी की शादी पिछले साल हुई है और उनके पति बेंगलुरु में नौकरी करते हैं। वह उन्हें हर तरह से सपोर्ट करते हैं और समय-समय पर आर्थिक मदद भी करते रहते हैं। देबी कहती हैं कि परिवार के सहयोग से ही वह अपने लक्ष्य की ओर आगे बढ़ पा रही हैं।
देबी का अगला लक्ष्य सीनियर स्तर पर और पदक जीतना है, ताकि वह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का प्रतिनिधित्व कर सकें। इसके लिए वह दिन-रात मेहनत कर रही हैं और अपने कोच के मार्गदर्शन में आगे की तैयारी कर रही हैं।
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