Lakhpati Didi Yojana: 4 लाख की मदद से महिला ने बदली किस्मत, सफलता ने पूरे गांव को चौंकाया

Published : Jun 12, 2026, 06:32 PM IST
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सार

Chhattisgarh News: कैसे एक किसान परिवार की महिला ने शुरू किए कई कारोबार? क्या स्वयं सहायता समूह सफलता की नई कुंजी बन रहे हैं? आखिर कांति साहू की आय 3 लाख सालाना से अधिक कैसे पहुंची? जानिए बिहान योजना और महिला सशक्तिकरण की प्रेरक कहानी।

रायपुर। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान) के अंतर्गत संचालित लखपति दीदी अभियान छत्तीसगढ़ के कोरिया जिले में ग्रामीण महिलाओं के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला रहा है। इस अभियान से जुड़कर महिलाएं आर्थिक रूप से मजबूत बन रही हैं और स्वरोजगार के माध्यम से अपने परिवार की आय बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। बैकुण्ठपुर विकासखंड के ग्राम तलवापारा निवासी कांति साहू इसकी एक प्रेरणादायक मिसाल हैं, जिन्होंने सीमित संसाधनों के बावजूद अपनी मेहनत और लगन से सफलता की नई कहानी लिखी है।

स्वयं सहायता समूह से जुड़ने के बाद खुला सफलता का रास्ता

कांति साहू एक साधारण किसान परिवार से संबंध रखती हैं। लंबे समय से उनका सपना अपना व्यवसाय शुरू करने का था, लेकिन आर्थिक संसाधनों की कमी उनके लिए सबसे बड़ी चुनौती थी। लगभग तीन वर्ष पहले उन्होंने गांव की अन्य महिलाओं के साथ शारदा महिला स्वयं सहायता समूह की सदस्यता ली। समूह से जुड़ने के बाद उन्हें बचत, वित्तीय प्रबंधन और व्यवसाय संचालन की महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त हुई।

बिहान योजना और बैंक सहायता से मिला 4 लाख रुपये का सहयोग

स्वयं सहायता समूह के माध्यम से कांति साहू को विभिन्न सरकारी योजनाओं का लाभ मिला। बिहान योजना, बैंक लिंकेज, एसवीईपी (स्टार्टअप विलेज एंटरप्रेन्योरशिप प्रोग्राम) तथा मुद्रा ऋण योजना के तहत उन्हें लगभग 4 लाख रुपये की वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई गई। इस आर्थिक सहयोग ने उनके व्यवसायिक सपनों को साकार करने का अवसर प्रदान किया।

एक साथ कई व्यवसाय शुरू कर बढ़ाई आय

कांति साहू ने केवल एक व्यवसाय पर निर्भर रहने के बजाय अलग-अलग क्षेत्रों में काम करने का निर्णय लिया। उन्होंने दोना-पत्तल निर्माण इकाई, धान कृषि बीज केंद्र, कपड़ा व्यवसाय के लिए मैचिंग सेंटर और सिलाई केंद्र की शुरुआत की। विविध व्यवसायों में निवेश करने की उनकी रणनीति सफल साबित हुई और धीरे-धीरे उनके सभी उद्यम आय के मजबूत स्रोत बन गए।

पति के सहयोग ने आसान किया संघर्ष का सफर

कांति साहू का कहना है कि उनकी सफलता के पीछे उनके पति महेंद्र साहू का महत्वपूर्ण योगदान है। व्यवसाय की शुरुआत से लेकर उसे स्थापित करने तक हर चुनौतीपूर्ण दौर में उनके पति ने उनका पूरा साथ दिया। दोनों की संयुक्त मेहनत और समर्पण ने कठिन परिस्थितियों को अवसर में बदल दिया।

सालाना 3 लाख रुपये से अधिक आय, बनीं लखपति दीदी

आज कांति साहू के सभी व्यवसाय सफलतापूर्वक संचालित हो रहे हैं। वर्तमान में उनके उद्यमों का मासिक कारोबार लगभग 1 लाख से 1.5 लाख रुपये तक पहुंच चुका है। इसमें से उन्हें हर महीने 30 से 35 हजार रुपये का शुद्ध लाभ प्राप्त हो रहा है। इस तरह उनकी वार्षिक शुद्ध आय 3 लाख रुपये से अधिक हो गई है और उन्होंने आधिकारिक रूप से ‘लखपति दीदी’ का दर्जा हासिल कर लिया है।

महिला सशक्तिकरण की मिसाल बनीं कांति साहू

आर्थिक मजबूती के साथ कांति साहू का आत्मविश्वास भी बढ़ा है। आज वे अपने परिवार की जरूरतों को बेहतर तरीके से पूरा कर रही हैं। इसके साथ ही गांव की अन्य महिलाओं को भी स्वरोजगार और आत्मनिर्भरता के लिए प्रेरित कर रही हैं। उनकी सफलता यह साबित करती है कि सही मार्गदर्शन, वित्तीय सहायता और अवसर मिलने पर ग्रामीण महिलाएं न केवल अपने जीवन को बदल सकती हैं बल्कि समाज में महिला सशक्तिकरण की नई मिसाल भी स्थापित कर सकती हैं।

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